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3740 टैबलेट मिलने के बावजूद ‘स्मार्ट’ नहीं बन सके सुपौल के स्कूल, रजिस्टर पर ही चल रहा काम

Updated at : 18 Jan 2026 6:39 PM (IST)
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3740 टैबलेट मिलने के बावजूद ‘स्मार्ट’ नहीं बन सके सुपौल के स्कूल, रजिस्टर पर ही चल रहा काम

जिले के सरकारी स्कूलों को स्मार्ट बनाने के उद्देश्य से शिक्षा विभाग द्वारा 1774 स्कूलों को 3740 टैबलेट उपलब्ध कराये गये हैं.

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चिंताजनक. नेटवर्क की समस्या व कहीं अधूरी ट्रेनिंग के कारण शिक्षक नहीं कर पा रहे हैं टैबलेट का उपयोग सुपौल. जिले के सरकारी स्कूलों को स्मार्ट बनाने के उद्देश्य से शिक्षा विभाग द्वारा 1774 स्कूलों को 3740 टैबलेट उपलब्ध कराये गये हैं. इन टैबलेट के माध्यम से छात्रों की ऑनलाइन उपस्थिति, मिड-डे मील (एमडीएम) उपस्थिति, स्टूडेंट एनरोलमेंट सहित अन्य शैक्षणिक व प्रशासनिक कार्य ऑनलाइन किये जाने है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि अधिकांश स्कूलों में आज भी काम रजिस्टर और कागजी फाइलों के सहारे ही हो रहा है. कई स्कूलों में टैबलेट अलमारी में रखे हुए हैं. कहीं नेटवर्क की समस्या है तो कहीं अधूरी ट्रेनिंग के कारण शिक्षक इनका सही उपयोग नहीं कर पा रहे हैं. कुछ जगहों पर इंटरनेट कनेक्टिविटी कमजोर होने से ऑनलाइन सिस्टम चलाना मुश्किल हो रहा है, वहीं कई शिक्षकों को ऐप और पोर्टल से जुड़ी पूरी जानकारी अब तक नहीं मिल पायी है. स्कूल प्रशासन का कहना है कि वे ट्रेनिंग पूरी होने का इंतजार कर रहे हैं, ताकि बिना गलती के ऑनलाइन काम शुरू किया जा सके. दूसरी ओर, विभाग यह मानकर चल रहा है कि स्कूल अपने आप ही टैबलेट का उपयोग शुरू कर देंगे. इस आपसी तालमेल की कमी के कारण स्मार्ट शिक्षा की योजना धरातल पर पूरी तरह लागू नहीं हो पायी है. सबसे चिंताजनक बात यह है कि अब तक इस योजना को लेकर कोई स्पष्ट गाइडलाइन जारी नहीं की गयी है. न ही नियमित समीक्षा बैठक हो रही है. इससे स्कूलों को यह समझने में दिक्कत हो रही है कि टैबलेट का उपयोग किस तरह, किन कार्यों के लिए और किस प्रक्रिया के तहत किया जाना है. ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क बनी समस्या ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में स्थिति और भी गंभीर है. वहां नेटवर्क की समस्या आम है. कई जगहों पर मोबाइल सिग्नल तक ठीक से नहीं मिलता, इससे ऑनलाइन उपस्थिति और डेटा एंट्री जैसे काम संभव नहीं हो पाते. इसके चलते शिक्षक मजबूरी में पुराने रजिस्टर सिस्टम पर ही निर्भर हैं. इन टैबलेट के जरिये छात्रों की डिजिटल उपस्थिति, एमडीएम रिपोर्टिंग, शैक्षणिक डेटा अपलोड और अन्य विभागीय कार्य ऑनलाइन किये जाने हैं. सरकार का उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना और शिक्षा व्यवस्था को तकनीक से जोड़ना है, लेकिन क्रियान्वयन की धीमी गति से यह सपना अधूरा नजर आ रहा है. डिजिटल सिस्टम से जुड़ने में असहज महसूस कर रहे शिक्षक हालांकि, विभाग की ओर से आश्वासन दिया गया है, लेकिन जमीनी स्तर पर अब तक इसका व्यापक असर देखने को नहीं मिला है. कई स्कूलों में शिक्षक अब भी डिजिटल सिस्टम से जुड़ने में असहज महसूस कर रहे हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ टैबलेट बांट देने से स्कूल स्मार्ट नहीं बनते. इसके लिए जरूरी है कि मजबूत नेटवर्क, व्यावहारिक ट्रेनिंग, निरंतर निगरानी और स्पष्ट गाइडलाइन दी जाये. तभी डिजिटल शिक्षा का सही लाभ छात्रों तक पहुंच सकेगा. अगर समय रहते इन समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो करोड़ों रुपये की लागत से खरीदे गए ये टैबलेट महज शोपीस बनकर रह जायेंगे. स्मार्ट स्कूल की योजना कागजों तक ही सीमित रह जायेगी. दी गयी है ऑनलाइन ट्रेनिंग : डीपीओ इस संबंध में डीपीओ एसएसए प्रवीण कुमार ने बताया कि शिक्षा विभाग की ओर से टैबलेट वितरण के बाद शिक्षकों को ऑनलाइन ट्रेनिंग दी गयी है. सभी आवश्यक एप्लिकेशन पहले से मोबाइल में इंस्टॉल है. ई-कोष पोर्टल पर सभी काम किए जायेंगे. सभी स्कूलों को जल्द से जल्द स्टूडेंट एनरोलमेंट पूरा करवाकर ऑनलाइन उपस्थिति सहित अन्य कार्य शुरू करने का निर्देश दिया जायेगा. इसे लेकर जल्द ही समीक्षा कर दिशा-निर्देश भी जारी किये जायेंगे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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RAJEEV KUMAR JHA

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By RAJEEV KUMAR JHA

RAJEEV KUMAR JHA is a contributor at Prabhat Khabar.

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