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भिखारी मेहता को राजभवन पटना में मिला पर्यावरण संरक्षण का सम्मान

Updated at : 28 Jan 2026 5:57 PM (IST)
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भिखारी मेहता को राजभवन पटना में मिला पर्यावरण संरक्षण का सम्मान

पर्यावरण संरक्षण व जैविक विकास के क्षेत्र में भिखारी मेहता का रहा उल्लेखनीय योगदान

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वीरपुर. गरीब परिवार में जन्म लेना किसी भी व्यक्ति की असफलता का प्रमाण नहीं होता. अभाव इंसान से सुविधाएं छीन सकता है, लेकिन उसके हौसले, सपने और आगे बढ़ने की जिद को कभी खत्म नहीं कर सकता. इसी कथन को सच कर दिखाया है वीरपुर के साधारण किसान परिवार से आने वाले भिखारी मेहता ने. जिनकी जीवन यात्रा आज पूरे समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी है. सीमित संसाधनों, कठिन परिस्थितियों और लगातार आने वाली परेशानियों के बावजूद भिखारी मेहता जी ने कभी हार नहीं मानी. उन्होंने मेहनत को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया और धैर्य को जीवन का स्थायी साथी. असफलताओं से निराश होने के बजाय उन्होंने उनसे सीख ली और हर चुनौती को सफलता की सीढ़ी बनाते चले गए. दिन-रात की अथक मेहनत, मजबूत इरादे और आत्मविश्वास ने अंततः उन्हें सफलता के शिखर तक पहुंचा दिया. पर्यावरण संरक्षण व जैविक विकास के क्षेत्र में भिखारी मेहता का रहा उल्लेखनीय योगदान भिखारी मेहता का योगदान विशेष रूप से पर्यावरण संरक्षण और जैविक विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय रहा है. उन्होंने न केवल स्वयं जैविक खेती को अपनाया, बल्कि आसपास के किसानों को भी इसके लिए प्रेरित किया. रासायनिक उर्वरकों के दुष्प्रभावों से किसानों को अवगत कराते हुए उन्होंने प्राकृतिक और जैविक तरीकों से खेती के लाभों को व्यवहार में उतार कर दिखाया. आज उनके प्रयासों से कई किसान पर्यावरण के अनुकूल खेती की ओर अग्रसर हुए हैं, जिससे न केवल उत्पादन बढ़ा है बल्कि मिट्टी की उर्वरता और स्वास्थ्य भी सुरक्षित हुआ है. उनकी इन्हीं अनुकरणीय सेवाओं को सम्मान देते हुए 26 जनवरी 2026 को गणतंत्र दिवस के अवसर पर राजभवन, पटना में उन्हें विशेष रूप से सम्मानित किया गया. यह सम्मान केवल भिखारी मेहता की व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि पूरे वीरपुर क्षेत्र के लिए गर्व और सम्मान की बात है. उनके सम्मान की खबर मिलते ही इलाके में खुशी की लहर दौड़ गई. सम्मान समारोह के बाद वीरपुर सहित आसपास के क्षेत्रों के स्थानीय लोगों, किसानों और समाजसेवियों ने भिखारी मेहता को बधाइयां दीं और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की. किसानों का कहना है कि श्री मेहता ने उन्हें यह सिखाया कि सीमित संसाधनों के बावजूद यदि सही दिशा में प्रयास किया जाए, तो खेती न केवल आजीविका का साधन बनती है, बल्कि समाज और पर्यावरण के लिए भी वरदान साबित हो सकती है. भिखारी मेहता की सफलता की कहानी यह संदेश देती है कि गरीबी कभी भी प्रतिभा और परिश्रम की राह में स्थायी बाधा नहीं बन सकती. यदि मन में सच्ची लगन, मेहनत करने का जज्बा और आत्मविश्वास हो, तो कोई भी व्यक्ति असंभव को संभव बना सकता है. आज भिखारी मेहता न केवल स्वयं एक सफल व्यक्ति हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए आशा, प्रेरणा और संघर्ष से सफलता की मिसाल बन चुके हैं.

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RAJEEV KUMAR JHA

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By RAJEEV KUMAR JHA

RAJEEV KUMAR JHA is a contributor at Prabhat Khabar.

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