अब सुपौल में ही तैयार होगी रेशम की साड़ी
Updated at : 30 Aug 2019 7:21 AM (IST)
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936 किसान कर रहे हैं मलवरी की खेती, अब तक 20 क्विंटल कोकून का उत्पादन कोकून उत्पादन में सुपौल जिला सूबे में अव्वल सुपौल/त्रिवेणीगंज : मलवरी रेशम के उत्पादन से जुड़े किसानों की मेहनत अब रंग लाने लगी है़ किसानों के मलवरी कोकून से जीविका रेशम के धागे एवं सिल्क साड़ियों का निर्माण करा रहा […]
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936 किसान कर रहे हैं मलवरी की खेती, अब तक 20 क्विंटल कोकून का उत्पादन
कोकून उत्पादन में सुपौल जिला सूबे में अव्वल
सुपौल/त्रिवेणीगंज : मलवरी रेशम के उत्पादन से जुड़े किसानों की मेहनत अब रंग लाने लगी है़ किसानों के मलवरी कोकून से जीविका रेशम के धागे एवं सिल्क साड़ियों का निर्माण करा रहा है. जिले में जल्द ही मलवरी कोकून से धागा निर्माण की इकाई यानी रिलिंग सेंटर स्थापित किया जायेगा.
गौरतलब है कि सुपौल जिले में 2014-15 में जीविका के माध्यम से मुख्यमंत्री कोसी मलवरी परियोजना शुरू की गयी थी. इससे अब तक 936 किसानों को जोड़ा गया है, जो मलवरी की खेती कर रहे हैं. इनमें त्रिवेणीगंज के 264, बसंतपुर के 347, छातापुर के 213, सरायगढ़ के 64 एवं किशनपुर के 48 किसान शामिल हैं. इधर, छातापुर के बीपीएम रामबाबू ने बताया कि यहां के उत्पादित कोकून को पश्चिम बंगाल के मालदा में ले जाकर बेचा जाता है. इससे किसानों को उचित कीमत नहीं मिल पाती है. जिले में धागा निर्माण केंद्र स्थापित होने से मलवरी किसानों को कोकून की अच्छी कीमत मिलेगी.
2014-15 में पांच प्रखंडों में शुरू किया गया उत्पादन, िकसानों की बढ़ी आमदनी
इस साल 500 नये किसानों को जोड़ने का रखा गया है लक्ष्य
जीविका के सामाजिक विकास प्रबंधक अमरजीत कुमार ने बताया कि इस साल जिले में 500 नये किसानों को मलवरी खेती से जोड़ने का लक्ष्य है.
इसके बाद इनकी संख्या 1500 हो जायेगी. उन्होंने बताया कि जिले में अब तक 120 क्विंटल कोकून का उत्पादन हो चुका है. कोकून उत्पादन के मामले में सुपौल पूरे बिहार में अव्वल रहा है. उन्होंने बताया कि यहां रिलिंग केंद्र स्थापित करने की योजना है. रिलिंग सेंटर स्थापित होने से कोकून से जिले में ही धागा तैयार किया जायेगा. इसके बाद इन धागों से सिल्क साड़ी एवं अन्य वस्त्रों का निर्माण किया जायेगा.
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