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छात्रों की मेहनत पर तय होंगे क्रेडिट मार्क्स, खेल व अन्य कलाओं में बेहतर प्रदर्शन करने वालों को मिलेगा क्रेडिट

Updated at : 13 Apr 2023 1:53 AM (IST)
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छात्रों की मेहनत पर तय होंगे क्रेडिट मार्क्स, खेल व अन्य कलाओं में बेहतर प्रदर्शन करने वालों को मिलेगा क्रेडिट

छात्रों को घंटे के अनुसार क्रेडिट दिया जायेगा. एक क्रेडिट के लिए कुल 30 घंटे की पढ़ाई करनी होगी. अगर वो अन्य एक्टिविटी में है, तो उसी अनुसार उनके मेहनत व वर्क को देख कर क्रेडिट दिया जायेगा.

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पटना. नये सत्र से स्पोर्ट्स, कलाओं के अलावे अन्य विद्याओं में विशेषता हासिल करने वाले स्टूडेंट्स को एकेडमिक क्रेडिट अंक मिलेगा. यह अंक स्टूडेंट्स के प्रदर्शन पर मिलेगा. यूजीसी के अध्यक्ष प्रो एम जगदीश कुमार ने बताया है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए कई तरह के बदलाव किये जा रहे हैं. पढ़ाई के साथ-साथ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्टता हासिल करने वाले स्टूडेंट्स क्रेडिट प्रदान किया जायेगा.

कक्षा के बाहर की कला भी मूल्यांकन में शामिल

खेल, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, सामाजिक कार्य, मंचीय कला, ललित कला, पारंपरा, धरोहर, साहित्य, भारतीय ज्ञान परंपरा आदि क्षेत्रों में बढ़ावा देने के उद्देश्यों से यह किया गया है, ताकि स्टूडेंट्स इन क्षेत्र में भी बेहतर कर सकें. कक्षा के बाहर की कलाओं को भी मूल्यांकन में शामिल किया गया है. कुछ भी छोड़ा नहीं गया है. कक्षा के बाहर सीखने, खेल, योग, शारीरिक गतिविधियों, प्रदर्शन कला, हस्तशिल्प भी मूल्यांकन फ्रेमवर्क का हिस्सा है.

वेदों-पुराणों में विशेषज्ञता होने पर भी मिलेगा एकेडमिक क्रेडिट अंक

अगर कोई स्टूडेंट नेशनल, इंटरनेशल या ओलिंपिक में स्वर्ण पदक हासिल किया है, तो इस परिणाम एवं उपलब्धि को लेकर उसकी तैयारी और अभ्यास को शारीरिक शिक्षा में स्नातक व्यवसायिक डिग्री के कौशल क्रेडिट जरूरतों के समतुल्य माना जायेगा. यूजीसी ने नये नेशनल क्रेडिट फ्रेमवर्क में कई बातों को रखा है. इसमें वेदों, पुराणों, धर्मशास्त्रों, ज्योतिष आदि को क्रेडिट प्रणाली में भी शामिल किया गया है. यानी अब स्टूडेंट्स को वेद-पुराणों में विशेषज्ञता होने पर भी क्रेडिट मिलेगा. इसमें भारतीय ज्ञान परंपरा में 18 प्रमुख विद्याओं और 64 कलाओं, कला कौशल आदि का जिक्र किया गया है.

लोक परंपरा को प्रोत्साहित किया जायेगा

प्रो कुमार ने कहा कि चार वेद, उनके सहयोगी वेद (आयुर्वेद, धनुर्वेद, गंधर्व वेद) के अलावा पुराण, मीमांसा, न्याय, धर्मशास्त्र, वेदांग, व्याकरण, ज्योतिष आदि में भी क्रेडिट मिलने की बात कही गयी है. इससे अलग-अलग लोक परंपरा को प्रोत्साहित किया जायेगा. एनसीआरएफ रिपोर्ट में कहा गया है कि सीखने का परिणाम प्रत्येक मामले में उपयुक्त राष्ट्रीय क्रेडिट ढांचा के स्तर पर पहले से परिभाषित होगा, जिसमें विशेष उपलब्धियां हासिल करने वालों के लिए मानदंड निर्धारित होंगे.

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सीखने के घंटे के आधार पर तय किया जायेगा क्रेडिट

नये ड्रॉफ्ट में कक्षा पांच से लेकर पीएचडी तक की पढ़ाई के लिए घंटों के अनुसार क्रेडिट दिया जायेगा. एक क्रेडिट के लिए कुल 30 घंटे की पढ़ाई करनी होगी. अगर वो अन्य एक्टिविटी में है, तो उसी अनुसार उनके मेहनत व वर्क को देख कर क्रेडिट दिया जायेगा. स्टूडेंट्स को ये क्रेडिट उसी तरह से दिये जायेंगे, जैसे उन्हें कोर्स की पढ़ाई, असाइनमेंट और व्यवहार के लिए दिये जाते हैं. स्टूडेंट्स को क्रेडिट हर विषय के अंत में ग्रेड प्वाइंट के हिसाब से दिया जायेगा. क्रेडिट प्वाइंट में 10वीं-12वीं को भी वरीयता दी जायेगी. क्रेडिट को सीखने की घंटे के आधार पर तय जायेगा. इसे 2023-24 में लागू करना होगा.

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