शिव-पार्वती विवाह की कथा सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु, जयकारों से गूंजा मंदिर परिसर

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शिव-पार्वती कथा सुनाते कथावाचक रामकरण जी महाराज

Shiv-Parvati Vivah: सानी कुड़वां स्थित रामजानकी-शिव मंदिर परिसर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान शिव-पार्वती विवाह प्रसंग का वर्णन सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए. कथावाचक राणकरण दास महाराज ने बताया कि शांतचित्त होकर कथा सुनने से आत्मिक शांति मिलती है और शिव अपने भक्तों पर शीघ्र प्रसन्न होते हैं.

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Shiv-Parvati Vivah: बड़हरिया प्रखंड के सानी कुड़वां स्थित रामजानकी-शिव मंदिर परिसर में श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान महायज्ञ के तत्वावधान में आयोजित संगीतमयी श्रीराम कथा में मंगलवार को शिव-पार्वती विवाह प्रसंग की मनोहारी कथा सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे. कथा के दौरान भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भक्ति में डूबे रहे. इस दौरान परिसर में भगवान शिव के जयकारे गूंजते रहे और श्रद्धालुओं ने जमकर तालियां बजायीं.

शांतचित्त होकर कथा सुनने से मिलती है आत्मिक शांति

कथावाचक राणकरण दास महाराज ने कहा कि धार्मिक कथा का श्रवण शांतचित्त, एकांत और पूरे मनोयोग के साथ करना चाहिए. कथा श्रवण से मनुष्य को आत्मिक और आध्यात्मिक शांति प्राप्त होती है. उन्होंने कहा कि भगवान की कथा केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि इससे जीवन में सकारात्मक सोच और अच्छे संस्कार विकसित होते हैं.

भक्तों पर शीघ्र प्रसन्न होते हैं भगवान शिव

कथावाचक ने भगवान शिव को औघड़दानी बताते हुए कहा कि महादेव अपने भक्तों की सच्ची भक्ति से शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं. वे अपने भक्तों के संकट दूर करने के साथ उनकी मनोकामनाएं भी पूर्ण करते हैं. शिव की भक्ति में सच्चाई और समर्पण का विशेष महत्व है.

शिव की बारात पहुंची हिमवान के द्वार

शिव-पार्वती विवाह प्रसंग का वर्णन करते हुए कथावाचक ने बताया कि भगवान शिव नंदी पर सवार होकर और नाग की माला धारण कर बारात लेकर हिमवान के द्वार पहुंचे. उनके साथ भगवान विष्णु, ब्रह्मा समेत अन्य देवी-देवताओं की टोली भी थी.

भगवान शिव के इस अलौकिक और अनोखे रूप को देखकर माता मैना विचलित हो गयीं और उन्होंने पार्वती का विवाह शिव से करने से इनकार कर दिया. इसके बाद माता पार्वती के आग्रह पर भगवान शिव ने अपना दिव्य चंद्रमौली रूप धारण किया. शिव के इस मनोहारी रूप को देखकर सभी मोहित हो गये.

बिना बुलावे मायके नहीं जाना चाहिए : कथावाचक

कथा के दौरान कथावाचक ने कहा कि जहां से बुलावा नहीं आये, वहां जाने से बचना चाहिए. उन्होंने महिलाओं से बिना बुलावे मायके नहीं जाने की अपील करते हुए मां पार्वती के प्रसंग का उल्लेख किया.

उन्होंने कहा कि मां पार्वती मायके में अपने पति भगवान शिव के अपमान से व्यथित हो गयी थीं. कथा के इस प्रसंग के माध्यम से उन्होंने पारिवारिक सम्मान और रिश्तों की मर्यादा का संदेश दिया.

जयकारों से गूंजता रहा मंदिर परिसर

शिव-पार्वती विवाह की कथा के दौरान श्रद्धालु भावविभोर हो गये. भगवान शिव के जयकारों से पूरा मंदिर परिसर गूंज उठा. कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से जयकारे लगाये और तालियां बजाकर अपनी श्रद्धा व्यक्त की.

ये रहे मौजूद

इस अवसर पर महायज्ञ संयोजक पं. देवानंद तिवारी, अध्यक्ष चंद्रिका साह, विवेक मिश्र, कोषाध्यक्ष रामप्रवेश भारती, सुनील तिवारी, नीतू देवी, चंदन भारती, किशन कुमार, सौरभ कुमार, वीरबहादुर सिंह, मिश्री भगत, श्रीशेष तिवारी, नीलेश तिवारी, गौतम शर्मा, राघव भगत, विनोद तिवारी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु और श्रोता मौजूद रहे.

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आनंद मिश्र

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