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सदर अस्पताल का ब्लड बैंक बिना लाइसेंस के

Updated at : 10 Nov 2025 7:57 PM (IST)
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सदर अस्पताल का ब्लड बैंक बिना लाइसेंस के

सदर अस्पताल स्थित मातृ ब्लड बैंक पिछले लगभग दो वर्षों से जिला स्वास्थ्य समिति के अधीन संचालित हो रहा है, लेकिन अब तक इसका लाइसेंस नवीनीकरण नहीं हो सका है. विभागीय उदासीनता और अधिकारियों की लापरवाही के कारण ब्लड बैंक का संचालन बिना वैध लाइसेंस के जारी है.

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प्रतिनिधि,सीवान. सदर अस्पताल स्थित मातृ ब्लड बैंक पिछले लगभग दो वर्षों से जिला स्वास्थ्य समिति के अधीन संचालित हो रहा है, लेकिन अब तक इसका लाइसेंस नवीनीकरण नहीं हो सका है. विभागीय उदासीनता और अधिकारियों की लापरवाही के कारण ब्लड बैंक का संचालन बिना वैध लाइसेंस के जारी है. इसका सीधा असर जिले के रेफरल अस्पतालों, अनुमंडलीय अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में संचालित रक्त संग्रह इकाइयों की आपूर्ति पर पड़ रहा है. साल 2021 में कोलकाता से आई टीम ने लाइसेंस नवीनीकरण के लिए निरीक्षण किया था. टीम ने अपनी रिपोर्ट में 13 बिंदुओं पर गंभीर खामियां गिनाते हुए लाइसेंस नवीनीकरण की अनुशंसा से साफ इंकार कर दिया. जांच में पाया गया कि ब्लड बैंक में गंदगी, अव्यवस्था और संसाधनों की भारी कमी है. रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि 2013 में हुई जांच में भी कमियां पाई गई थीं, जिसके बाद तत्काल प्रभाव से लाइसेंस निरस्त करने की अनुशंसा की गई थी. बावजूद इसके, ब्लड बैंक की गतिविधियां निरंतर जारी रहीं, नये भवन में ब्लड बैंक शिफ्ट करने का निर्देश, फिर भी नहीं हुई कार्रवाई बिहार राज्य एड्स कंट्रोल सोसाइटी के अपर परियोजना निदेशक डॉ. एन.के. गुप्ता ने 26 दिसंबर को मॉडल सदर अस्पताल में ब्लड बैंक के नए कक्ष का निरीक्षण किया था. उन्होंने 1600 वर्ग फीट क्षेत्र में ब्लड बैंक के लिए पंजीकरण, काउंसेलिंग, रक्त संग्रह, सेरोलॉजी, क्वालिटी कंट्रोल और स्टोर कक्ष तैयार करने का निर्देश दिया था. अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार सिंह ने एक अतिरिक्त कमरा भी उपलब्ध कराया था. उस समय आश्वासन दिया गया था कि नए भवन में स्थानांतरण के बाद नए सिरे से लाइसेंस प्रक्रिया शुरू की जाएगी, लेकिन लगभग एक साल होने को है फिर भी विभाग ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया. 2001 से बिना लाइसेंस के चल रहा मातृ ब्लड बैंक सदर अस्पताल के ब्लड बैंक का भवन करीब 17 लाख रुपये की लागत से रेडक्रॉस निधि से बना था.बाद में भवन परिवर्तन होने पर 2001 से लाइसेंस नवीनीकरण नहीं हुआ. 2005 में तत्कालीन डीएम सीके अनिल के आदेश पर इसे सदर अस्पताल की ऊपरी मंजिल में स्थानांतरित किया गया, जो ड्रग्स कंट्रोल नियमों के विपरीत था. क्या कहते हैं जिम्मेदार आवश्यकता के अनुसार जगह नहीं मिलने के कारण ब्लड बैंक का रजिस्ट्रेशन नहीं हो पा रहा है.वरीय पदाधिकारी द्वारा कहा गया है कि रजिस्ट्रेशन नहीं होने पर जिम्मेदार पर एफआइआर होगा. मॉडल अस्पताल भवन में जगह नहीं मिल पाया. जिसके कारण प्रस्तावित जगहों पर ब्लड स्टोरेज यूनिट नहीं खुल पा रहा है. डॉ अनूप कुमार दुबे, नोडल पदाधिकारी ब्लड बैंक सदर अस्पताल,सीवान

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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