सीवान में हिंदी सप्ताह के दौरान आशु भाषण प्रतियोगिता, विद्यार्थियों ने विभिन्न विषयों पर रखे विचार

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प्रतियोगिता में उपस्थित प्राचार्य व अन्य | Prabhat Khabar Network

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सीवान के स्नातकोत्तर महाविद्यालय में हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में हिंदी सप्ताह मनाया गया. इसी क्रम में शुक्रवार को आशु भाषण प्रतियोगिता का आयोजन हुआ, जिसमें विद्यार्थियों ने विभिन्न विषयों पर अपने विचार रखे.

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Siwan News : स्नातकोत्तर महाविद्यालय, सीवान के हिंदी विभाग के तत्वावधान में हिंदी दिवस के अंतर्गत आयोजित हिंदी सप्ताह महोत्सव के दौरान शुक्रवार को आशु भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. कैलाशपति गोस्वामी ने की. उन्होंने विद्यार्थियों को दैनिक जीवन में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने के साथ हिंदी लिखते समय होने वाली मात्रात्मक त्रुटियों पर विशेष ध्यान देने की बात कही.

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विद्यार्थियों को बताये गये आशु भाषण के मापदंड

प्राचार्य डॉ. कैलाशपति गोस्वामी ने विद्यार्थियों को आशु भाषण प्रतियोगिता के विभिन्न मापदंडों की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि किसी भी विषय पर विचार व्यक्त करते समय भाषा की शुद्धता के साथ प्रस्तुति और आत्मविश्वास भी महत्वपूर्ण है. विद्यार्थियों को सहजता के साथ अपनी बात रखने के लिए प्रेरित किया गया.

अंग्रेजी मिश्रित हिंदी पर भी हुई चर्चा

डॉ. विशा शर्मा ने कहा कि दैनिक जीवन में अंग्रेजी मिश्रित हिंदी का प्रयोग लगातार बढ़ा है. इसे पूरी तरह अलग करना आसान नहीं है, क्योंकि यह अब लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है. उन्होंने विद्यार्थियों से अभिव्यक्ति के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करते हुए भाषा के व्यावहारिक इस्तेमाल को समझने की बात कही.

वहीं डॉ. आशुतोष उपाध्याय ने हिंदी की उपयोगिता पर प्रकाश डाला और आशु भाषण से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों की जानकारी विद्यार्थियों को दी.

आत्मविश्वास के साथ अपनी बात रखने की दी सीख

डॉ. पंकज कुमार ने विनोदपूर्ण अंदाज में विद्यार्थियों को संबोधित किया. उन्होंने कहा कि मंच पर अपनी बात रखने के दौरान झिझक और डर को दूर कर आत्मविश्वास के साथ विचार व्यक्त करना चाहिए. उन्होंने विद्यार्थियों को बेहतर अभिव्यक्ति के लिए निरंतर अभ्यास करने की सलाह दी.

विज्ञान और तकनीक में हिंदी के इस्तेमाल पर जोर

डॉ. निवेदिता प्रियदर्शिनी ने कहा कि विज्ञान और तकनीक के विकास में भाषा की महत्वपूर्ण भूमिका है. वैज्ञानिक ज्ञान तभी व्यापक समाज तक पहुंच सकता है, जब वह लोगों की समझ की भाषा में उपलब्ध हो.

उन्होंने कहा कि हिंदी केवल साहित्य और भावनाओं की भाषा तक सीमित नहीं है, बल्कि विज्ञान, शिक्षा और ज्ञान के विस्तार की भी सशक्त भाषा बन सकती है. हिंदी को केवल हिंदी दिवस तक सीमित रखने के बजाय ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में इसके प्रयोग को बढ़ावा देने का संकल्प लेना चाहिए.

विद्यार्थियों ने विभिन्न विषयों पर रखे विचार

आशु भाषण प्रतियोगिता में शीतल, कृति, निकिता, श्वेता, रितु, प्रीति, सुमन, अलीशा, सैयद सज्जाद, निर्मला, स्नेहा सहित अन्य छात्र-छात्राओं ने भाग लिया. विद्यार्थियों ने ‘हिंदी दिवस केवल औपचारिक उत्सव है’ सहित विभिन्न विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत किये. प्रतियोगिता के दौरान विद्यार्थियों ने अपनी अभिव्यक्ति और तर्क के माध्यम से विषयों को सामने रखा.

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