सीवान के सिसवन में सिंचाई व्यवस्था बदहाल, सरकारी ट्यूबवेल बंद और नहरें सूखी, धान की खेती पर गहराया संकट

Author Abhay Kumar|Edited by Sakshi Kumari
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सुखी पड़ी चांदपुर वितरणी नहर

सुखी पड़ी चांदपुर वितरणी नहर

Siswan Irrigation System : सिसवन प्रखंड में सिंचाई व्यवस्था की बदहाली से किसानों की खरीफ खेती पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं. वर्षों से बंद पड़े सरकारी ट्यूबवेल और नहरों में पानी की कमी ने धान की रोपाई मुश्किल बना दी है. किसानों को महंगे निजी साधनों पर निर्भर रहना पड़ रहा है, जिससे खेती की लागत बढ़ गई है.

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Siswan Irrigation System : सीवान जिले के सिसवन प्रखंड में सिंचाई व्यवस्था बदहाल होने से किसानों के सामने खरीफ खेती का संकट खड़ा हो गया है. सरकारी ट्यूबवेल वर्षों से बंद पड़े हैं और नहरों में पानी नहीं पहुंचने से धान की रोपनी सहित अन्य फसलों की सिंचाई प्रभावित हो रही है.

बंद सरकारी ट्यूबवेल और सूखी नहरों से बढ़ी परेशानी

दरअसल, सिसवन प्रखंड में अधिकांश सरकारी ट्यूबवेल लंबे समय से बंद पड़े हैं. वहीं, नहरों में भी पानी नहीं छोड़ा जा रहा है. ऐसे में धान की रोपनी और अन्य फसलों की सिंचाई को लेकर किसानों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है.

हर साल दावे, लेकिन नहीं सुधरी व्यवस्था

किसानों का कहना है कि हर वर्ष सिंचाई व्यवस्था को बेहतर बनाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है. कई पंचायतों में सरकारी ट्यूबवेल खराब पड़े हैं और उनकी मरम्मत अब तक नहीं कराई गई है.

निजी बोरिंग और डीजल पंप पर बढ़ी निर्भरता

सिंचाई के लिए किसानों को मजबूरी में निजी बोरिंग और डीजल पंप का सहारा लेना पड़ रहा है. इससे खेती की लागत लगातार बढ़ रही है. महंगे डीजल और बिजली की अनियमित आपूर्ति के कारण सिंचाई करना और भी कठिन हो गया है. इसका सबसे अधिक असर आर्थिक रूप से कमजोर किसानों पर पड़ रहा है.

धान की फसल पर मंडरा रहा संकट

स्थानीय किसानों का कहना है कि यदि जल्द नहरों में पानी नहीं छोड़ा गया और बंद पड़े सरकारी ट्यूबवेल चालू नहीं किए गए, तो धान की फसल प्रभावित हो सकती है. इससे उत्पादन घटने के साथ किसानों की आय पर भी प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है.

किसानों ने प्रशासन से की तत्काल कार्रवाई की मांग

किसानों ने जिला प्रशासन और सिंचाई विभाग से सभी बंद सरकारी ट्यूबवेलों की तत्काल मरम्मत कराने तथा नहरों में नियमित रूप से पानी छोड़ने की मांग की है. उनका कहना है कि समय रहते व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो खरीफ फसल को भारी नुकसान हो सकता है.

किसानों की जुबानी

किसान राजकिशोर महतो ने कहा कि धान की बेहन तैयार करने के समय नहर में पानी नहीं होने के कारण उन्हें महंगे डीजल पंप से सिंचाई करनी पड़ी. अब आगे की खेती भगवान भरोसे है. किसान विकास सिंह ने बताया कि इस समस्या की जानकारी कई बार संबंधित विभागीय अधिकारियों को दी गई, लेकिन हर बार अलग-अलग कारण बताकर कार्रवाई टाल दी जाती है.

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