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को-ऑपरेटिव बैंक के चार अधिकारियों पर मामला दर्ज

Updated at : 19 Sep 2025 9:29 PM (IST)
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को-ऑपरेटिव बैंक के चार अधिकारियों पर मामला दर्ज

सीवान सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक से जुड़े दो पूर्व और दो वर्तमान अधिकारियों के खिलाफ एससी एसटी थाना में कोर्ट परिवाद पत्र के आधार पर मामला दर्ज हुआ है. दरौंदा थाना के उस्ती गांव निवासी अजय कुमार ने बैंक अधिकारियों पर धोखाधड़ी और गबन का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी करायी है.

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प्रतिनिधि,सीवान.सीवान सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक से जुड़े दो पूर्व और दो वर्तमान अधिकारियों के खिलाफ एससी एसटी थाना में कोर्ट परिवाद पत्र के आधार पर मामला दर्ज हुआ है. दरौंदा थाना के उस्ती गांव निवासी अजय कुमार ने बैंक अधिकारियों पर धोखाधड़ी और गबन का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी करायी है. अजय कुमार ने पुलिस को बताया कि उन्होंने महाराजगंज शाखा से अंडा फर्म हाउस खोलने के लिए ऋण का आवेदन दिया था.आवेदन स्वीकार करने के बाद बैंक ने उनसे 10 सादा हस्ताक्षरित चेक जमा करा लिये. इसके बाद बैंक ने 37 लाख रुपये की स्वीकृति दी.नियम के अनुसार यह राशि चार किस्तों में आरटीजीएस या एनइएफटी के माध्यम से काम की प्रगति देखने के बाद मिलनी चाहिए थी. लेकिन बैंक अधिकारियों ने प्रक्रिया का पालन नहीं किया.आरोप है कि बैंक अधिकारियों ने आपसी मिलीभगत से उनके द्वारा जमा कराये गये चेक का गलत इस्तेमाल किया और उनकी गैरमौजूदगी में अलग-अलग तिथियों में करीब 22 लाख रुपये की निकासी कर ली. जबकि अजय कुमार को ऋण की राशि के रूप में केवल 15 लाख 2 हजार 750 रुपये ही मिले.वादी ने अपने आवेदन में लिखा है कि 19 मई 2023 को बिना किसी डॉक्यूमेंटेशन के ही बैंक ने फिर से 20 लाख रुपये का ऋण उनके नाम पर कर दिया.इस राशि में से केवल एक कंपनी को 11 लाख 76 हजार रुपये भेजे गये और दो लाख रुपये एफडी कर दिये गये.बाकी 6 लाख 24 हजार रुपये का कोई हिसाब बैंक ने नहीं दिया.अजय कुमार का कहना है कि बैंक अधिकारियों की इस चालबाजी से उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हुआ है और उनका व्यवसाय भी प्रभावित हुआ है. उन्होंने आरोप लगाया है कि निर्वतमान एमडी निकेश कुमार, पूर्व प्रशासी पदाधिकारी राज कुमार ठाकुर, पूर्व लोन ऑफिसर रंजीत सिंह और निर्वतमान शाखा प्रबंधक मुकेश कुमार ने जानबूझकर यह धोखाधड़ी की है.पुलिस ने इस मामले में एफआइआर दर्ज कर ली है और जांच शुरू कर दी है.निवर्तमान शाखा प्रबंधक मुकेश कुमार ने लगाए गए आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद बताया. उन्होंने कहा कि जब बैंक के स्तर से नीलामवाद की कार्रवाई शुरू हुई. तभी वादी ने यह मामला दर्ज कराया है. उनके अनुसार ऋण की राशि वादी द्वारा जमा नहीं की जा रही है और जिन चेक की बात कही जा रही है.उनसे वादी ने स्वयं निकासी की है.मुकेश कुमार का कहना है कि वादी के आवेदन पर ही लोन की राशि बढ़ाई गई थी. यह एफआईआर गलत तरीके से दर्ज कराई गई है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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