परिहार की नदियां क्यों हो रही हैं खत्म? कभी सिंचाई का सहारा थीं, अब बाढ़ और सूखे की पहचान बन गईं

Author Md. dulare|Edited by Aaruni Thakur
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भारत नेपाल सीमा पर स्थित हरदी नदी पर बने लोहे का पुल,सुखी नदी

सीतामढ़ी के परिहार क्षेत्र में हरदी और मरहा नदियां अपना अस्तित्व खो रही हैं. कभी किसानों की खुशहाली का प्रतीक ये नदियां अब सूखे और बाढ़ की दोहरी मार झेल रही हैं. अवैध खनन ने इनकी दशा और खराब कर दी है.

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Sitamarhi News: नेपाल से निकलकर परिहार क्षेत्र से गुजरने वाली हरदी और मरहा नदी कभी किसानों की खुशहाली और इलाके की जीवनरेखा मानी जाती थीं. आज हालात ऐसे हैं कि ये नदियां धीरे-धीरे अपना अस्तित्व खोती जा रही हैं. बरसात के कुछ महीनों को छोड़ दें तो अधिकांश समय इनकी धारा सूखी रहती है, जबकि मानसून आते ही यही नदियां बाढ़ का कारण बन जाती हैं.

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कभी सिंचाई का आधार थीं, अब सूखी पड़ी हैं धाराएं

परिहार प्रखंड से होकर बहने वाली मरहा नदी लंबे समय से मृतप्राय स्थिति में है. वहीं हरदी नदी में भी अब केवल मानसून के दौरान ही पानी का प्रवाह दिखाई देता है.

स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले इन नदियों के पानी से हजारों एकड़ खेतों की सिंचाई होती थी. नदी का पानी खेती के लिए बेहद उपजाऊ माना जाता था और जिन खेतों तक यह पहुंचता था, वहां अच्छी पैदावार होती थी.

अवैध खनन ने और बढ़ाई परेशानी

नदियों के सूखने के साथ-साथ इनके किनारों और तल से मिट्टी तथा बालू के अवैध खनन की शिकायतें भी लगातार सामने आ रही हैं.

ग्रामीणों का कहना है कि लगातार हो रहे खनन से नदी की प्राकृतिक संरचना प्रभावित हुई है. कई जगहों पर नदी की धारा अब सूखी नहर जैसी दिखाई देती है.

अधवारा समूह की नदियों पर भी संकट

परिहार क्षेत्र से गुजरने वाली अधवारा समूह की नदियों की स्थिति भी चिंताजनक बताई जा रही है. स्थानीय लोगों के अनुसार इन नदियों का पानी अब न तो पशु-पक्षियों और अन्य जीवों के उपयोग के लायक बचा है और न ही खेती के लिए पर्याप्त माना जा रहा है.

लोगों का कहना है कि यदि समय रहते संरक्षण के प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाली पीढ़ियां इन नदियों को केवल किताबों में ही पढ़ पाएंगी.

बरसात में यही नदियां बन जाती हैं आफत

विरोधाभास यह है कि जो नदियां साल के अधिकांश समय सूखी रहती हैं, वही मानसून के दौरान विकराल रूप ले लेती हैं.

नेपाल के तराई क्षेत्रों में भारी बारिश होने पर हरदी और मरहा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ जाता है. इससे परिहार प्रखंड के कई गांवों में बाढ़ का खतरा पैदा हो जाता है.

बाढ़ के दौरान सड़कें टूट जाती हैं, संपर्क मार्ग बाधित हो जाते हैं और कई गांवों का संपर्क मुख्य मार्ग से कट जाता है. खेतों में पानी भरने से किसानों की फसलें भी प्रभावित होती हैं.

संरक्षण की जरूरत

स्थानीय लोगों का मानना है कि नदियों के संरक्षण, अवैध खनन पर रोक और नियमित सफाई व पुनर्जीवन की योजनाओं पर समय रहते काम नहीं हुआ तो स्थिति और गंभीर हो सकती है.

ग्रामीणों ने प्रशासन और संबंधित विभागों से हरदी और मरहा नदी के संरक्षण तथा बाढ़ और सूखे दोनों समस्याओं के स्थायी समाधान की दिशा में प्रभावी कदम उठाने की मांग की है.


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