एक माह में ढाई गुनी बढ़ी आलू की कीमत
Author :Prabhat Khabar Digital Desk
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Updated at :21 Jul 2016 5:23 AM
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सीतामढ़ी : दाल की महंगाई ने तो गरीबों की थालियों से पहले ही छीन चुकी है. अब आलू की बढ़ती महंगाई ने गरीब व मध्यमवर्गीय परिवारों की चिंता और बढ़ा दी है. आलू एक ऐसी सब्जी है जो हर घर की पहली जरूरत है. जिस घर के मुखिया किसी कारणवश सब्जियां खरीदना भूल भी जाते […]
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सीतामढ़ी : दाल की महंगाई ने तो गरीबों की थालियों से पहले ही छीन चुकी है. अब आलू की बढ़ती महंगाई ने गरीब व मध्यमवर्गीय परिवारों की चिंता और बढ़ा दी है.
आलू एक ऐसी सब्जी है जो हर घर की पहली जरूरत है. जिस घर के मुखिया किसी कारणवश सब्जियां खरीदना भूल भी जाते हैं तो उन्हें कोई खास चिंता नहीं होती है, क्योंकि हर घर में आलू हमेशा मौजूद रहता है. आलू एक ऐसी सब्जी है जो शहर से लेकर गांव तक की छोटी से छोटी दुकानों पर भी उपलब्ध होता है. इसलिए किसी परिवार के मुखियाओं को यहां सब्जियों को लेकर कोई खास चिंता नहीं होती है. लेकिन आलू की महंगाई बढ़ने से हमारे समाज पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने लगता है. समोसे से लेकर आलू से बनने वाले अधिकांश खाद्य सामग्रियों के दामों में वृद्धि हो जाती है.
एक माह पूर्व स्थानीय बाजार समिति में आलू का भाव सात से आठ सौ रुपये प्रति क्विंटल व खुदरा बाजार में इसकी कीमत एक हजार से 12 सौ रुपये प्रति क्विंटल था. अब एक माह बाद इसकी कीमत ढ़ाई गुना बढ़कर बाजार समिति में करीब 1700 से 1800 रुपये प्रति क्विंटल व खुदरा बाजार में इसकी कीमत 24 सौ रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गया है. जिसके चलते गरीबों की थाली से अब आलू के भी गायब होने का खतरा बढ़ गया है.
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