डेढ़ लाख की आबादी पर महज तीन चिकत्सिक
डेढ़ लाख की आबादी पर महज तीन चिकित्सक फोटो नंबर- 9 पीएचसी, पुपरी पुपरी : प्रखंड की जनसंख्या करीब डेढ़ लाख है. इतनी बड़ी आबादी की चिकित्सा के लिए मात्र तीन चिकित्सक हैं. चिकित्सक की कमी का खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ता है. मरीज निजी चिकित्सक के यहां इलाज कराने को मजबूर होते हैं और […]
डेढ़ लाख की आबादी पर महज तीन चिकित्सक फोटो नंबर- 9 पीएचसी, पुपरी पुपरी : प्रखंड की जनसंख्या करीब डेढ़ लाख है. इतनी बड़ी आबादी की चिकित्सा के लिए मात्र तीन चिकित्सक हैं. चिकित्सक की कमी का खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ता है. मरीज निजी चिकित्सक के यहां इलाज कराने को मजबूर होते हैं और वहां उनको काफी आर्थिक क्षति उठानी पड़ती है. — नहीं है एक भी एपीएचसी यह जान कर हैरानी होगी कि इतनी बड़ी आबादी वाले प्रखंड में एक भी एपीएचसी नहीं है. कुल नौ उप स्वास्थ्य केंद्र है, जहां एएनएम हीं रहती है. पीएचसी में चार में से तीन चिकित्सक हैं तो संविदा वाले चार में से मात्र एक चिकित्सक हैं. — ड्रेसर व अन्य पद रिक्त यहां एलएचवी का दो तो फर्मासिस्ट, ड्रेसर, प्रयोगशाला प्रावैधिकी, महिला कक्ष सेविका, कंपाउंडर, स्वास्थ्य निरीक्षक, एक्सट्रेशन एजुकेटर, पुरुष कक्ष सेवक व प्रशिक्षित दाई का एक-एक पद स्वीकृत है और सभी पद खाली है. एएनएम आर नौ में से सात तो कार्यालय परिचारी दो में से एक है. — जांच होती है प्रभावित प्रयोगशाला प्रावैधिकी के नहीं रहने से काफी परेशानी होती है. सभी प्रकार की जांच प्रभावित हो रही है. बिना किसी जांच के अनुभव के आधार पर या बाहरी जांच रिपोर्ट के आधार पर चिकित्सा करना चिकित्सकों की मजबूरी बन गयी है. पीएचसी में स्वास्थ्य प्रबंधक, बीसीएम व यक्ष्मा नियंत्रण कार्यालय में कार्यरत प्रयोगशाला प्रावैधिकी संविदा पर हैं. ग्रेड ए नर्स का पद स्वीकृत हीं नहीं है. — कर्मियों की संख्या घटती गयीबताया गया है कि वर्ष 1940 में पीएचसी की स्थापना हुई थी. उस समय से आज तक क्षेत्र की आबादी कई गुणी बढ़ गयी, पर सुविधाएं नहीं बढ़ी. कर्मियों की संख्या कम होती गयी, लेकिन रिक्त पदों पर बहाली नहीं हुई. सूत्रों ने बताया कि स्वास्थ्य प्रबंधक के आने-जाने का कोई समय निश्चित नहीं है. विलंब से आते हैं और निर्धारित समय से पूर्व चले जाते हैं. — बैठने की व्यवस्था नहीं चिकित्सा व्यवस्था पर सरकार भले हीं हर वर्ष करोड़ों रुपये खर्च करती है, लेकिन इस पीएचसी में मरीजों के बैठने तक की व्यवस्था नहीं है. पूरजा कटाने के लिए मरीज व उनके परिजन को धूप अथवा बारिश झेलना पड़ता है. ऑपरेशन थियेटर में पर्याप्त रौशनी की व्यवस्था नहीं है. माह भर से पंखा खराब है. आउट डोर का नल करीब तीन माह से खराब है. — प्रसव कक्ष का हाल ठीक नहीं प्रसव कक्ष का हाल दयनीय है. सरकार व प्रशासन के आदेश के बावजूद प्रसव कक्ष के बेड का चादर प्रतिदिन नहीं बदला जाता है. सर्पदंश की दवा का घोर अभाव है. पीएचसी में चहारदीवारी नहीं रहने के कारण परिसर में बराबर आवारा पशु व सुअर विचरण करते रहते हैं. बता दें कि इस पीएचसी में अनुमंडल के सभी प्रखंडों के मरीज आते रहते हैं. — पांच माह में 225 सर्पदंश पांच माह के अंदर सर्पदंश के 225 मरीज पीएचसी में आये. दर्जनों को बेहतर इलाज के लिए सदर अस्पताल व डीएमसीएच रेफर कर दिया गया. वहीं समुचित व समय पर पर्याप्त चिकित्सा सुविधा नहीं मिलने के चलते सर्पदंश के आधा दर्जन पीडि़तों की मौत हो गयी. — कहते हैं पीएचसी प्रभारी पीएचसी प्रभारी डा सुरेंद्र कुमार ने बताया कि दो माह से सर्पदंश की दवा नहीं है. जिला को बार-बार पत्र भेजा जा रहा है. इधर, स्वास्थ्य प्रबंधक मनोज कुमार से प्रयास के बावजूद संपर्क नहीं हो सका.
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