बिजली की कमी व ध्वस्त नाला बना कारण
सात नलकूपों की जवाबदेही एक केवल ऑपरेटर पर
बेलसंड : सिंचाई सुविधा के अभाव में जिले के किसान परेशान है. चुनावी मौसम में किसानों की समस्याओं को लेकर तरह-तरह के दावे किये जाते है, लेकिन चुनाव परिणाम निकलने के बाद अधिकांश वादे छलावा साबित होता है. जिले के अन्य हिस्सों की तरह बेलसंड के किसान भी परेशान है.
प्रखंड में कुल सात राजकीय नलकूप है. सात राजकीय नलकूप में परतापुर नलकूप चालू है, लेकिन नाला के अभाव में नलकूप की सुविधा से किसान वंचित है. इसी तरह की स्थिति प्रखंड के पचनोर, मांची, मखनहा व पताही का भी है. दयानगर गांव में स्थापित नलकूप 20 वर्षों से बंद पड़ा है. वहां बिजली व नाला का अभाव है. नगर पंचायत बेलसंड के नलकूप का नाला ध्वस्त है, जगह जगह पाइप फट गया है.
बोरिंग मोटर सही है, जिसका उपयोग अग्निशामक विभाग वाले टंकी में पानी भरने के काम में कर रहे है. सात नलकूप की जवाबदेही मात्र एक ऑपरेटर के सहारे है.
नाबार्ड से स्थापित नलकूप भी बंद: किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने की नियत से वर्ष 2003 एक व 2011 में स्थापित तीन नलकूप भी बंद है. बताया गया कि रुपौली, डुमरा, छप्पन बीघा, कोठिया, तुलसी नगर व बासठपुर गांव में स्थापित नलकूप बिजली के अभाव में बंद है. कोठिया, तुलसीनगर व बासठपुर का नलकूप तरियानी प्रखंड में पड़ता है.
