15 साल बाद मिला न्याय! शेखपुरा कोर्ट ने हत्या के 5 दोषियों को सुनाई उम्रकैद की सजा
शेखपुरा जिला न्यायालय
Sheikhpura Court Five Lifelong Imprisonment News: प्रधान जिला जज संतोष कुमार तिवारी ने भूमि विवाद में हुई मो. वकील की हत्या के 15 साल पुराने मामले में पांच दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. तियाय गांव के मो. खालिद, मो. अलाउद्दीन, मो. शाहिद, मो. जाहिद और मो. सलाउद्दीन को भादवि की धारा 302 सहित अन्य धाराओं में दोषी पाया गया. पढ़ें पूरी रिपोर्ट.
शेखपुरा से निरंजन कुमार की रिपोर्ट
Sheikhpura Court Five Lifelong Imprisonment News: शेखपुरा से न्यायिक और प्रशासनिक हलके से कानून का इकबाल बुलंद करने वाली और लंबे समय से लंबित एक बड़े हत्याकांड में फैसले की बड़ी खबर सामने आई है. शेखपुरा के माननीय प्रधान जिला जज संतोष कुमार तिवारी की अदालत ने हत्या के एक बेहद जघन्य मामले में सुनवाई करते हुए पांच अभियुक्तों को दोषी पाया है और उन्हें उम्रकैद (आजीवन कारावास) की सजा सुनाई है. इसके साथ ही न्यायालय ने सभी दोषियों पर पांच-पांच हजार रुपये का अर्थदंड (जुर्माना) भी लगाया है. जुर्माना की राशि समय पर अदा नहीं करने की स्थिति में नियमों के तहत सभी को 3 माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी.

करंडे थाना क्षेत्र के एक ही गांव के रहने वाले हैं सजा पाने वाले पांचों दोषी
न्यायालय और लीगल सेल से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस हाई-प्रोफाइल हत्याकांड में सजा पाने वाले सभी पांचों व्यक्ति जिले के करंडे थाना अंतर्गत तियाय गांव के मूल निवासी हैं. सजा प्राप्त करने वालों में मो. खालिद, मो. अलाउद्दीन, मो. शाहिद, मो. जाहिद और मो. सलाउद्दीन शामिल हैं. प्रधान जिला जज द्वारा इन सभी को इस हत्या के मामले में बीते 18 जून को ही साक्ष्यों के आधार पर दोषी पाते हुए न्यायिक हिरासत में लेते हुए जेल भेज दिया गया था.

IPC की धारा 302 के सहित इन धाराओं के तहत तय हुआ अपराध
सजा के बिंदु पर अंतिम सुनवाई और फैसले के लिए मंगलवार को सभी पांचों अभियुक्तों को पुलिस की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मंडल कारा (जेल) से सीधे न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया था. अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद इन सभी को भारतीय दंड विधान (IPC) की धारा 302, 323, 148 और 149 के तहत सामूहिक रूप से गंभीर अपराध का दोषी पाया.
15 साल पहले भूमि खरीद के विवाद में घर में घुसकर किया था जानलेवा हमला
इस मामले के संदर्भ में विस्तृत जानकारी देते हुए जिला लोक अभियोजक उदय नारायण सिन्हा और अपर लोक अभियोजक शंभू शरण प्रसाद सिंह ने बताया कि यह पूरा विवाद गांव में ही भूमि खरीद-बिक्री को लेकर शुरू हुआ था. इसी रंजिश में 19 जनवरी 2011 को इन सभी आरोपियों ने एकमत (एक राय) होकर अपने ही गांव के मो. वकील, मो. हैदर अली, मो. इकबाल, मो. मुमताज और मो. समशाद आदि के घर में लाठी, डंडे और अन्य घातक हथियारों से लैस होकर धावा बोल दिया था. हमलावरों ने सबको बुरी तरह पीटकर लहुलुहान कर दिया था. सभी घायलों को तुरंत इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां जिंदगी और मौत की जंग लड़ते हुए एक सप्ताह के बाद 27 जनवरी 2011 को मो. वकील की मृत्यु हो गई थी, जबकि शेष पीड़ितों का लंबा इलाज चलता रहा.
इस मामले में स्थानीय पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की थी और गहन अनुसंधान पूरा कर न्यायालय में आरोप पत्र (चार्जशीट) समर्पित किया था. अदालत में अभियोजन पक्ष द्वारा 15 साल तक चले इस लंबे ट्रायल के दौरान कुल 17 गवाहों को बारी-बारी से मुख्य मंच पर प्रस्तुत किया गया. इसमें मृतक की विधवा, पीड़ित परिजन और घायल प्रत्यक्षदर्शियों के अलावा केस के अनुसंधान अधिकारी (पुलिस पदाधिकारी) और पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर ने भी न्यायालय के समक्ष अपनी-अपनी गवाही को कलमबद्ध कराया.
न्यायालय में अभियोजन और अभियुक्तों के वकीलों द्वारा अपने-अपने पक्ष में जोरदार कानूनी बहस की गई. अंततः अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए पांचों को दोषी ठहराया और आजीवन कारावास का हुक्म सुनाया, जिसके बाद सभी को कड़ी सुरक्षा में मंडल कारा भेज दिया गया.
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By Aditya Kumar Ravi
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