चनउ जाति को अति पिछड़ा घोषित करने की मांग
Updated at : 05 Nov 2016 5:18 AM (IST)
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योजनाओं का मिल सकेगा लाभ शिवहर : पूर्व जिला परिषद सदस्य अजब लाल चौधरी ने मुख्यमंत्री को एक पत्र लिखकर चनउ जाति को अति पिछड़ी जाति में शामिल करने की मांग की है कि पत्र में कहा गया है कि 1974 के पहले चनउ जाति के संबंध में बिहार विधान सभा में सरकार की ओर […]
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योजनाओं का मिल सकेगा लाभ
शिवहर : पूर्व जिला परिषद सदस्य अजब लाल चौधरी ने मुख्यमंत्री को एक पत्र लिखकर चनउ जाति को अति पिछड़ी जाति में शामिल करने की मांग की है कि पत्र में कहा गया है कि 1974 के पहले चनउ जाति के संबंध में बिहार विधान सभा में सरकार की ओर से जानकारी दी गयी थी कि इस राज्य में चनउ जाति नहीं है.
उस पर तत्कालीन विधायक रघुनाथ झा ने कहा कि चनउ जाति है. सरकार सर्वे करा ले. तत्पश्चात मुंगेरी लाल पिछड़ा आयोग ने जांच कर अनुशंसा किया कि चनउ जाति बिहार में है. तत्पश्चात सरकार की जातिगत सूची में शामिल किया गया.चनउ महासभा का गठन मधुबनी आश्रम में हुई. उसे बाद गांव-गांव में सभा हुई. कुशीनगर यूपी में भी आप जैसे बुद्धिजीवी ने सवाल किया था कि उसे चंदेल क्षेत्रीय ही रहने दिया जाए.पर बहुमत चनउ जाति को अपना पहचान रवयं रखने का निर्णय लिया. गोरखपुर विश्वविद्यालय के विधि विभागाध्यक्ष अनिरुद्ध प्रसाद को अध्यक्ष एवं श्री चौधरी प्रधान सचिव मनोनीत किया गया.
आज तेली जाति अति पिछड़ा में है. जिसका वर्चस्व राजनीति में भी राष्ट्रीय स्तर पर है. पर चनउ जाति को अब तक अति पिछड़ा में शामिल नहीं किया गया. इस जाति को अति पिछड़ी जाति में शामिल करें. ताकि युवा वर्ग को सरकार द्वारा घोषित कल्याणकारी योजनाओं एवं राजनीति में लाभ लेने का अवसर मिल सके.
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