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शिवहर में 70 रुपये की एक्सपायारी दवा में 17 साल चला कोर्ट में मामला, खर्च हुए 20 हजार

Updated at : 08 Jul 2022 5:05 PM (IST)
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शिवहर में 70 रुपये की एक्सपायारी दवा में 17 साल चला कोर्ट में मामला, खर्च हुए 20 हजार

Sheohar News : बिहार के शिवहर में एक शख्स को अपनी बात को सही साबित करने के लिए 17 साल का वक्त लग गया. साथ उक्त शख्स को इन 17 साल में 20 हजार रुपये भी खर्च करने पड़े. जज की कमी से जूझ रहे प्रदेश में एक्सपायरी दवा को लेकर मुकदमा दर्ज करने में एक शख्स को 17 साल लग गए.

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शिवहर. बिहार के शिवहर में एक शख्स को अपनी बात को सही साबित करने के लिए 17 साल का वक्त लग गया. साथ उक्त शख्स को इन 17 साल में 20 हजार रुपये भी खर्च करने पड़े. जज की कमी से जूझ रहे प्रदेश में एक्सपायरी दवा को लेकर मुकदमा दर्ज करने में एक शख्स को 17 साल लग गए. 17 साल बाद कोर्ट ने मामले में केस दर्ज करने का आदेश दिया है. इस बीच केस की पैरवी में पीड़ित के 20 हजार रुपये भी खर्च हो गए.

मामला वर्ष-2005 का है. जिले में पुरनहिया प्रखंड के बराही गांव निवासी सुरेंद्र राउत के पेट में अचानक दर्द होने लगा था. जिसके बाद वे अस्पताल जाने के लिए घर से निकल गए. बीच रास्ते में किसी ने उन्हें अदौरी चौक स्थित नंदलाल साह की दवा दुकान पर जाने की सलाह दी. पेट दर्द से परेशान सुरेंद्र राउत बताए गए दवा दुकान पर पहुंचे. जांच के बाद बताया गया कि गैस की परेशानी है. लिहाजा उन्हें एक सिरप और कुछ कैप्सूल दवा दुकानदार ने दे दिया. इसके लिए उन्हें दुकानदार को 70 रुपये उक्त दुकानदार को दिया. दवा दुकानदार द्वारा दी गई दवा को खाने के बाद उनकी तबीयत और भी बिगड़ने लगी. गांव के एक शख्स ने जब दवा की शीशी पर लगा लेबल देखा तो बताया कि उन्हें एक्सपायरी दवा दे दी गई है. सुरेंद्र राउत जब इस बात की शिकायत लेकर नंदलाल की दवा दुकान पर गए तो वहां से उन्हें मारपीट कर भगा दिया गया. अपनी गुहार लेकर वे स्थानीय थाने में गए लेकिन किसी ने भी उनकी नहीं सुनी. न्याय के लिए दर दर भटक रहे सुरेंद्र राउत ने 6 अक्टूबर 2005 को शिवहर अनुमंडल कोर्ट का दरवाजा खटखटाया.

पीड़ित सुरेंद्र राउत ने दवा दुकानदार नंदलाल साह और उसके भाई सुखलाल साह के खिलाफ कोर्ट में मामला दायर किया. सुरेंद्र ने एक्सपायर्ड दवा बेचने, बिना लाइसेंस के दवा दुकान चलाने और बिना डिग्री के लोगों का इलाज करने का आरोप लगाया था. तारीख पर तारीफ पड़ती रही और समय बीतता चला गया. 17 साल बाद न्यायिक दंडाधिकारी राकेश कुमार की कोर्ट ने पुरनहिया थाने में केस दर्ज कर जांच का आदेश पुलिस को दिया. केस दर्ज होने के बाद पुलिस मामले की तफ्तीश में जुट गई है.

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