रोहतास: विश्व प्रसिद्ध शेरशाह सूरी मकबरा पर पार्किग का संकट, पर्यटकों की बढ़ी परेशानी, सरकारी स्टैंड बनाने की उठी मांग

फोटो-1ए: विश्व प्रसिद्ध शेरशाह सूरी मकबरा (पानी रोजा). | Prabhat Khabar Network
रोहतास के विश्व प्रसिद्ध शेरशाह सूरी मकबरा पर पार्किंग की कमी से पर्यटक जूझ रहे हैं. सीमित सुविधाएं और अव्यवस्थित वाहन पार्किंग के कारण जाम और गंदगी की समस्या बनी हुई है. स्थानीय लोग अब मकबरा के पास आधुनिक सरकारी पार्किंग स्टैंड विकसित करने की मांग कर रहे हैं.
Rohtas Sher Shah Suri Tomb Parking : रोहतास के सासाराम स्थित विश्व प्रसिद्ध शेरशाह सूरी मकबरा देश-विदेश के हजारों पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है. लेकिन बढ़ते पर्यटन के बीच पार्किग की समुचित व्यवस्था नहीं होने से पर्यटकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. अब स्थानीय लोगों ने मकबरा के समीप आधुनिक सरकारी पार्किंग स्टैंड विकसित करने की मांग तेज कर दी है.
Rohtas News : पर्यटकों के लिए पार्किग बनी सबसे बड़ी समस्या
इंडो-इस्लामिक वास्तुकला का बेजोड़ नमूना माने जाने वाले शेरशाह सूरी मकबरा पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं. वर्तमान में मुख्य प्रवेश द्वार के पास टिकट काउंटर के समीप दोपहिया और सीमित चारपहिया वाहनों के लिए ही पार्किंग की सुविधा उपलब्ध है. पर्यटकों की संख्या बढ़ने पर यह व्यवस्था नाकाफी साबित होती है. बड़ी बसों और अन्य वाहनों को सड़क किनारे या इनलेट नहर के पास खड़ा करना पड़ता है, जिससे गंदगी और जाम जैसी स्थिति बन जाती है.
एएसआई की भूमि पर पार्किग बनाने का सुझाव
स्थानीय लोगों का कहना है कि मकबरा के आसपास भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की पर्याप्त भूमि उपलब्ध है. यदि यहां सुनियोजित पार्किंग स्टैंड विकसित किया जाए तो पर्यटकों को बेहतर सुविधा मिलेगी, शहर की यातायात व्यवस्था सुधरेगी और ऐतिहासिक धरोहर की गरिमा भी बनी रहेगी.
राजगीर मॉडल अपनाने की मांग
पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि सासाराम में भी राजगीर की तर्ज पर एकीकृत बहुमंजिला पार्किंग एवं यात्री सुविधा केंद्र बनाया जाना चाहिए. पार्किंग के साथ टिकट काउंटर, प्रतीक्षालय, शौचालय और रेस्टोरेंट जैसी सुविधाएं विकसित होने से पर्यटन को नई पहचान मिल सकती है.
52 एकड़ के जलाशय के बीच स्थित है ऐतिहासिक धरोहर
करीब 52 एकड़ के जलाशय के बीच बना शेरशाह सूरी का मकबरा अफगान स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण है. लाल बलुआ पत्थर से निर्मित लगभग 122 फीट ऊंचा यह स्मारक अपनी भव्यता, अद्भुत नक्काशी और प्राकृतिक सौंदर्य के कारण देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करता है. दिल्ली-कोलकाता रेल मार्ग और जीटी रोड से बेहतर संपर्क होने के कारण यहां पूरे वर्ष पर्यटकों की आवाजाही बनी रहती है.
स्थानीय लोगों ने रखी ये मांग
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि आधुनिक पार्किंग स्टैंड के साथ पहुंच पथ, साइन बोर्ड और अन्य नागरिक सुविधाओं का भी विस्तार किया जाना चाहिए. उनका मानना है कि इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बड़े वाहनों की पार्किंग की समस्या दूर होगी और विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक धरोहर का संरक्षण भी बेहतर तरीके से हो सकेगा.
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