₹38 करोड़ खर्च… फिर भी फिसड्डी निकलीं शिवसागर की पंचायतें, राष्ट्रीय पुरस्कार में नहीं मिली जगह
Published by : Vikas Jha Updated At : 03 Jun 2026 8:36 PM
पंचायत सरकार भवन सोनहर
Rohtas News: राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कार-2026 में रोहतास की 10 पंचायतों के मुखियाओं को दिल्ली में सम्मानित किया गया है, लेकिन शिवसागर की एक भी पंचायत का चयन नहीं हुआ. पिछले चार वर्षों में 38 करोड़ रुपये से अधिक की भारी-भरकम राशि मिलने के बावजूद चयन न होने पर क्षेत्र में समीक्षा की मांग उठ रही है.
Rohtas News (सुजीत कुमार): रोहतास जिले के शिवसागर से सुजीत कुमार की रिपोर्ट. राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कार-2026 में रोहतास जिले की 10 पंचायतों के मुखियाओं को उत्कृष्ट विकास कार्यों के लिए केंद्र सरकार द्वारा सम्मानित किया गया. नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित भव्य समारोह में जिले की चयनित पंचायतों के जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया. जिले के विभिन्न प्रखंडों की पंचायतों को जहां राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली, वहीं शिवसागर प्रखंड की एक भी पंचायत का चयन नहीं होना क्षेत्र में भारी चर्चा का विषय बना हुआ है.
चार वर्षों में करोड़ों का खर्च
जानकारी के अनुसार पिछले चार वर्षों के दौरान शिवसागर प्रखंड की 15 पंचायतों को विकास कार्यों के लिए कुल 38 करोड़ 33 लाख 6 हजार 46 रुपये की राशि प्राप्त हुई. इस राशि से सड़क, नाली, गली, पेयजल, स्वच्छता, सामुदायिक भवन, प्रकाश व्यवस्था तथा अन्य आधारभूत सुविधाओं से संबंधित योजनाओं का क्रियान्वयन किया गया. इसके बावजूद राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कार की सूची में प्रखंड की किसी भी पंचायत का नाम शामिल नहीं हो सका.
राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कार के लिए पंचायतों का चयन पंचायत एडवांसमेंट इंडेक्स (पीएआइ) 2.0, सतत विकास लक्ष्य, जनभागीदारी, पारदर्शिता, नवाचार, सामाजिक विकास तथा योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन जैसे मानकों के आधार पर किया गया. ऐसे में स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठ रहा है कि करोड़ों रुपये की विकास राशि खर्च होने के बावजूद शिवसागर प्रखंड की पंचायतें राष्ट्रीय स्तर के मूल्यांकन में पीछे क्यों रह गयीं.
समीक्षा करने की उठ रही मांग
जिले की अन्य पंचायतों को सम्मान मिलने के बाद शिवसागर प्रखंड में पंचायतों के विकास कार्यों और उपलब्धियों को लेकर चर्चा काफी तेज हो गयी है. ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि विकास योजनाओं पर बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद यदि कोई पंचायत राष्ट्रीय स्तर पर चयनित नहीं हो सकी, तो इसके कारणों की गहन समीक्षा होनी चाहिए. लोगों का मानना है कि पंचायतों के कार्यों और उपलब्धियों का वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन आवश्यक है.
इस संबंध में कमलेश सिंह उर्फ झुन्ना सिंह (अध्यक्ष, शिवसागर प्रखंड मुखिया संघ) ने बताया कि शिवसागर प्रखंड की पंचायतों में हुए विकास कार्यों और उपलब्धियों की जानकारी संभवतः जिला पंचायत राज पदाधिकारी कार्यालय से संबंधित उच्च स्तर तक समय पर नहीं पहुंच सकी. यदि पंचायतों के कार्यों का समुचित प्रतिवेदन भेजा गया होता तो हमारे प्रखंड की पंचायतों को भी राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कार में स्थान मिल सकता था. मामले की समीक्षा होनी चाहिए.
जनप्रतिनिधियों ने जताई गहरी चिंता
इस संबंध में शिवसागर उप प्रखंड प्रमुख विनय कुमार सिंह ने बताया की शिवसागर प्रखंड में विकास के क्षेत्र में काफी कार्य हुए हैं. इसके बावजूद एक भी पंचायत का चयन नहीं होना आश्चर्यजनक और दुर्भाग्यपूर्ण है. जिस प्रखंड में करोड़ों रुपये की योजनाएं संचालित हुई हों, वहां की पंचायतों को पूरी तरह नजरअंदाज किया जाना कई सवाल खड़े करता है. विभाग को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए.
चार वर्षों में पंचायतों को प्राप्त विकास राशि
पहली पांच पंचायतें:
- आलमपुर : ₹3,00,60,598.
- डुमरी : ₹2,73,54,762.
- करूप : ₹3,14,77,259.
- कोनार : ₹2,34,65,802.
- कोनकी : ₹2,27,10,541.
दूसरी पांच पंचायतें:
- मोहम्मदपुर : ₹2,62,24,328.
- नाद : ₹2,45,89,911.
- पडरी : ₹3,50,23,670.
- पताढ़ी : ₹3,21,70,748.
- रायपुरचोर : ₹2,22,25,965.
तीसरी पांच पंचायतें:
- शिवसागर : ₹2,64,25,670.
- सिकरौर : ₹3,53,57,758.
- सिलारी : ₹1,53,91,876.
- सोनहर : ₹2,24,19,490.
- उल्हो : ₹84,07,668.
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