Sasaram News : संशय में डालमियानगर का रेल मेंटेनेंस कारखाना

Published by : PRABHANJAY KUMAR Updated At : 25 Aug 2025 9:24 PM

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पूर्व मध्य रेल मंत्रालय हाजीपुर व पंडित दीनदयाल उपाध्याय द्वारा सात व 11 जुलाई 2025 को जारी पत्र के आलोक में डालमियानगर रेल बैगन कारखाना पुनः संशय के साये में फंस गया है

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डालमियानगर. पूर्व मध्य रेल मंत्रालय हाजीपुर व पंडित दीनदयाल उपाध्याय द्वारा सात व 11 जुलाई 2025 को जारी पत्र के आलोक में डालमियानगर रेल बैगन कारखाना पुनः संशय के साये में फंस गया है. टीआइकोल एके सिंह के नेतृत्व में सर्वे की टीम गठित कर दुर्गावती से डेहरी ऑन सोन या बरवाडीह सेक्शन में नवीनगर से करकटा के बीच जमीन सर्वे का आदेश दिया गया है. इससे रेल मेंटेनेंस कारखाना जल्द से जल्द चालू हो सके. सोशल मीडिया पर पत्र जारी होते ही टीम डेहरियंस के साथ कई सामाजिक संगठनों ने आदेश का विरोध करना प्रारंभ कर दिया है. कहा कि रेल बैगन मरम्मत कारखाना खोलने के नाम पर रोहतास उद्योग के 204 एकड़ भूमि रेल मंत्रालय द्वारा खरीदी गयी है. भूमि रहने के बाद भी अन्यत्र जमीन की तलाश करना यहां के लोगों के साथ धोखा है. रेल बैगन मरम्मत कारखाना अन्यत्र जाने की स्थिति में शहर से लेकर प्रदेश स्तर तक बड़ा आंदोलन खड़ा किया जायेगा. जानकारों की माने तो गया व नवीनगर लाइन में माल ढुलाई में लगातार हो रही वृद्धि से मंत्रालय को इन क्षेत्रों के आस पास मेगा रेल बैगन मरम्मत कारखाना खोलने की आवश्यकता है. इससे जल्द मरम्मत होने के साथ मरम्मत क्षमता को हर वर्ष बढ़ाया जा सके. डालमियानगर में कारखाना नहीं खुलने के क्या है पेच सूत्रों की माने तो रेल पदाधिकारियों के लगातार प्रयास के बाद डालमियानगर रेल बैगन मरम्मत कारखाना का सबसे बड़ा पेच डीएफसीसी लाइन है. डीएफसीसी लाइन को क्रॉस कर डालमियानगर स्थित रेलवे अधिकृत रोहतास उद्योग पुंज तक रेल लाइन लाना होगा. इससे मरम्मत के लिए बैगन आसानी से पहुंच सके. लेकिन मार्ग अवरुद्ध होने की संभावना से डीएफसीसी तैयार नहीं हो रहा है. हालांकि, ओपन लाइन पदाधिकारियों व डीएफसीसी पदाधिकारियों ने आपसी सामंजस्य के लिए कई बार बैठक कर चुके है. लेकिन कोई नतीजा नहीं निकलने से मामला अधर में लटका हुआ है. जानकारों ने बताया कि रेल मंत्रालय के अधीनस्थ डीएफसीसी है. मंत्रालय के हस्तक्षेप के बाद स्वतः रास्ता निकल जायेगा. करवंदिया अथवा पहलेजा में ओवरब्रिज बनाकर आसानी पूर्वक समस्या का समाधान किया जा सकता है. रोहतास उद्योग का इतिहास : 1933 में अंग्रेजों के जमाने में स्थापित रोहतास उद्योग समूह का इतिहास उतार चढ़ाव के बीच रहा है. 1992 में उद्योग समूह पूर्ण रूप से बंद होने के बाद पूरा शहर गुमनामी के अंधेरे में खो गया था. लेकिन, 2009 में तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद के निर्देश पर रेलवे द्वारा रेल बैगन कारखाना खोलने के लिए 204 एकड़ जमीन क्रय किया गया. इससे स्थानीय लोगों में आस जगी थी. वहीं, जमीन क्रय के बाद रेल पदाधिकारियों ने बंद पड़े कारखाना के कबाड़ को हटाने के बाद रेल बैगन कारखाना खोलने की बात कही थी. चार वर्ष पहले रेल मंत्रालय द्वारा लगभग सौ करोड़ का कबाड़ बेचकर मुनाफा कमाया तथा पदाधिकारियों द्वारा रेल बैगन कारखाना के लिए कई बार सर्वे भी किया गया, तब से स्थानीय लोग रेल बैगन मरम्मत कारखाना खुलने के इंतजार में हैं. क्या कहते हैं लोग:— — न्यू सिधौली डालमियानगर निवासी कामेश्वर पांडे का कहना है कि केंद्र सरकार की इच्छा शक्ति के अभाव में सारी पेच आ रही है. रेल बैगन कारखाना खोलने नहीं था तो रेल मंत्रालय द्वारा रोहतास उद्योग पुंज की भूमि की खरीद क्यों की गयी. मंत्रालय के कार्य से सरकार से भरोसा उठ रहा है. इसी प्रकार रहा तो आम लोग बड़ा आंदोलन खड़ा करने को विवश होंगे. –रजवरवा बिगहा डालमियानगर निवासी मदन मिश्रा का कहना है कि रोहतास उद्योग पुंज बंद होने के बाद क्षेत्र के लिए रेल बैगन मरम्मत कारखाना काफी अहम है. लेकिन सोशल मीडिया पर जारी खबर के बाद से क्षेत्र के विकास के प्रति आम लोगों में बेचैनी बढ़ गयी है. केंद्र सरकार को यथाशीघ्र डालमियानगर में रेल बैगन कारखाना खोलने पर कदम उठाना चाहिए. जिससे क्षेत्र का विकास संभव हो सके. –न्यू सिधौली डालमियानगर निवासी नंद किशोर गुप्ता का कहना है कि रेलवे द्वारा रेल वैगन कारखाना के लिए रोहतास उद्योग पुंज का 204 एकड़ भूमि रेल लाइन के ठीक बगल में खरीद की गयी है. इतनी बड़ी मात्रा में भूमि तथा इससे अधिक सुविधा अन्यत्र कहीं नहीं मिल सकता है. इसलिए रेल मंत्रालय को अन्यत्र भूमि सर्वे छोड़कर रेल वैगन कारखाना खोलने का हर संभव प्रयास करना चाहिए. जिससे आम लोग लाभान्वित हो सके. –मथुरापुर निवासी सरोज सिंह ने कहा कि मेरे ससुर रोहतास उद्योग पुंज के कर्मी थे. उद्योग बंद होने के बाद रोजगार की स्थिति बिल्कुल चौपट हो चुकी है. लोग किसी प्रकार यहां जीवन यापन कर रहे हैं. डालमियानगर में रेल बैगन मरम्मत कारखाना खुलने से जहां मंत्रालय को लाभ मिलेगा, तो वही आम लोगों को भी रोजगार मिलेगा. रेल मंत्रालय व अन्य सभी राजनीतिक दलों को यथाशीघ्र पहल कर सभी समस्याओं का निबटारा कराने में सहयोग करना चाहिए. ——क्या कहते हैं सांसद:— सांसद राजाराम सिंह का कहना है कि रेलवे द्वारा अन्य जगह भूमि का सर्वे करना न्यायोचित नहीं है. डालमियानगर के लोगों के लंबित मांग रेल बैगन कारखाना के लिए मंत्रालय द्वारा यथाशीघ्र कदम उठाना चाहिए. जल्द कदम नहीं उठाया जाता है तो पार्लियामेंट खुलने के बाद रेल बैगन कारखाना की मांग जोर शोर से रखी जायेगी तथा इसके लिए रेल मंत्री से भी मिला जायेगा.

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