सुरक्षित प्रसव कराने में जिले में अव्वल रहा कोचस सीएचसी
Updated at : 02 Jan 2026 9:48 PM (IST)
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SASARAM NEWS.सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) कोचस में जननी सुरक्षा योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान एक अप्रैल से 31 दिसंबर तक कुल 845 धात्री महिलाएं लाभान्वित हुई हैं. वहीं, इसी अवधि में सीएचसी में 2127 महिलाओं का सुरक्षित प्रसव कराया गया है.
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सीएचसी में 275 दिनों में 2127 शिशुओं का हुआ जन्म
845 धात्री महिलाओं के बीच 11.83 लाख की सहायता राशि वितरित
कोचस.
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) कोचस में जननी सुरक्षा योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान एक अप्रैल से 31 दिसंबर तक कुल 845 धात्री महिलाएं लाभान्वित हुई हैं. वहीं, इसी अवधि में सीएचसी में 2127 महिलाओं का सुरक्षित प्रसव कराया गया है. अस्पताल प्रबंधन से मिली जानकारी के अनुसार, एक अप्रैल से 31 दिसंबर 2025 तक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 2127 महिलाओं का सफल और सुरक्षित प्रसव संपन्न कराया गया. इसी वित्तीय वर्ष के नौ माह के दौरान जननी सुरक्षा योजना के अंतर्गत 845 धात्री महिलाओं के बीच कुल 11.83 लाख रुपये की आर्थिक सहायता वितरित की गयी. बेहतर कार्य निष्पादन के आधार पर राज्य स्तरीय सर्वेक्षण में यह सीएचसी जिले में प्रथम स्थान पर रहा. दूसरे स्थान पर दिनारा सीएचसी, जबकि सासाराम सदर सीएचसी को तीसरा स्थान प्राप्त हुआ है.जननी सुरक्षा योजना के तहत प्रसव के बाद मिलती है सहायता राशि
प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक मतिऊर रहमान ताज ने बताया कि जननी सुरक्षा योजना राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत संचालित एक महत्वपूर्ण सुरक्षित मातृत्व कार्यक्रम है. इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में गरीब गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा और संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देना है. इस योजना के तहत सरकार गर्भवती महिलाओं को प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता उपलब्ध कराती है.उन्होंने बताया कि मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए सरकार लगातार ऐसी योजनाएं चला रही है. जननी सुरक्षा योजना के तहत प्रसव के 48 घंटे के भीतर सहायता राशि सीधे लाभुक के बैंक खाते में भेज दी जाती है.सीएचसी को आधुनिक तकनीकों से किया गया लैस
ग्रामीण क्षेत्रों में प्रसव कराने वाली महिलाओं को 1400 रुपये और शहरी क्षेत्रों की महिलाओं को 1000 रुपये की सहायता दी जाती है. इसके अतिरिक्त बाल विकास परियोजना मंत्रालय द्वारा प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के तहत पांच हजार रुपये की अलग से सहायता राशि दी जाती है. इस प्रकार सरकारी अस्पतालों में प्रसव कराने वाली धात्री महिलाओं को कुल 6400 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है. प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक ने बताया कि जिले के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में आधुनिक तकनीकों से लैस प्रसव सुविधाएं उपलब्ध करायी गयी हैं. इन सुविधाओं का सकारात्मक परिणाम यह है कि जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में हर माह प्रसव का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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