sasaram News : पारंपरिक खेती छोड़ स्ट्रॉबेरी से अच्छी आय कमा रहे किसान शशिकांत

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sasaram News : पारंपरिक खेती छोड़ स्ट्रॉबेरी से अच्छी आय कमा रहे किसान शशिकांत

कोलकाता और पटना तक पहुंच रही महादेवा गांव की स्ट्रॉबेरी, पिछले साल पुणे से स्ट्रॉबेरी के पौधे लाकर 17 कट्टा भूमि में की थी खेतीइस साल 20 कट्टे में 13 हजार पौधों से दो लाख तक लाभ की उम्मीद

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डेहरी. नगर प्रखंड मुख्यालय से करीब 10 किलोमीटर दूर रेलवे लाइन के सटे जमुहार पंचायत के महादेवा गांव के प्रगतिशील किसान शशिकांत सिंह उर्फ गांधी पारंपरिक धान और गेहूं की खेती छोड़ स्ट्रॉबेरी की खेती कर अच्छी कमाई कर रहे हैं. वे पहले से तरबूज और सब्जियों की खेती करते आ रहे थे. पिछले वर्ष आसपास के जिलों में स्ट्रॉबेरी की खेती देखकर उन्हें प्रेरणा मिली. उन्होंने पिछले साल महाराष्ट्र के पुणे से स्ट्रॉबेरी के पौधे लाकर 17 कट्टा भूमि में करीब 10 हजार पौधे लगाकर खेती की थी. बाजार में बढ़ती मांग और बेहतर मुनाफा देखकर इस बार उन्होंने 20 कट्टे में 13 हजार पौधे लगाये हैं. पौधों तक खाद, दवा और पानी पहुंचाने के लिए ड्रिप विधि का उपयोग किया जा रहा है. कीट-पतंग से बचाव के लिए आवश्यक उपकरण भी लगाये गये हैं. एक पौधे को तैयार होने में दो माह का लगता है समय किसान शशिकांत ने बताया कि ड्रिप विधि और मल्चिंग पेपर को छोड़ दें, तो एक पौधे को लाने, लगाने, खाद-दवा, देखभाल और बाजार में मार्केटिंग व पैकिंग सहित 40 से 50 रुपये तक खर्च आता है. एक पौधे को तैयार होने में लगभग दो माह का समय लगता है. यह फसल ठंड के मौसम में उगायी जाती है और मार्च माह तक फल देती है. एक पौधे से दो से ढाई किलो तक फल प्राप्त होता है. मौसम अनुकूल रहने पर एक सीजन में खर्च निकालकर डेढ़ से दो लाख रुपये तक का मुनाफा हो जाता है. हालांकि, नीलगाय से नुकसान की समस्या बनी रहती है. कीट-व्याधि से बचाव के लिए कृषि विभाग के अधिकारियों की मदद ली जाती है.उन्होंने बताया कि स्थानीय बाजार में स्ट्रॉबेरी की मांग सीमित है. मुख्य रूप से इसका विपणन दूसरे राज्यों में होता है. व्यापारी खुद संपर्क करते हैं. सबसे अधिक मांग कोलकाता में रहती है. पटना में भी सीजन के दौरान मांग रहती है. यदि स्ट्रॉबेरी से जेली और पाउडर बनाने की मशीन लगा दी जाये तो मुनाफा और बढ़ सकता है. स्ट्रॉबेरी का पौधा हर साल नया लगाना पड़ता किसान ने बताया कि स्ट्रॉबेरी का पौधा हर साल नया लगाना पड़ता है. यह बीज से तैयार नहीं होता है. पौधों की तैयारी पुणे में होती है, जहां से सीजन में लाकर खेतों में रोपण किया जाता है. क्या कहते हैं तकनीकी प्रबंधक आत्मा के प्रखंड तकनीकी प्रबंधक अजय शंकर तिवारी ने बताया कि ऐसे इच्छुक किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए आत्मा द्वारा समय-समय पर प्रशिक्षण दिया जाता है. प्रखंड के नावाडीह और महादेवा गांव में किसान स्ट्रॉबेरी की खेती कर रहे हैं. अधिकारी समय-समय पर विजिट कर पौधों के रखरखाव की जानकारी भी देते हैं.

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Panchdev Kumar

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