तीन जिलों के बदमाशों की पहले इसी जेल में होती है इंट्री, जानें क्यों है ऐसी व्यवस्था

शाहाबाद प्रक्षेत्र के तीन जिलों के किसी भी थाने में पकड़े जाने वाले कैदी को पहले 14 दिनों तक इसी जेल में रखा जाता है. उसके बाद कैदी अपने संबंधित कोर्ट की जेल भेजे जाते हैं. ऐसी व्यवस्था कोरोना को लेकर की गयी है.
बिक्रमगंज : स्थानीय उप कारा कोरोना काल में बंदियों के लिए इंट्री जेल बनी हुई है. शाहाबाद प्रक्षेत्र के तीन जिलों के किसी भी थाने में पकड़े जाने वाले कैदी को पहले 14 दिनों तक इसी जेल में रखा जाता है. उसके बाद कैदी अपने संबंधित कोर्ट की जेल भेजे जाते हैं. ऐसी व्यवस्था कोरोना को लेकर की गयी है. ताकि, किसी भी जेल में कोरोना संक्रमित कैदी नहीं पहुंच सके.
इस बाबत जेल सुपरिटेंडेंट किरण निधि ने कहा कि बिक्रमगंज उपकारा में तीन कैदी कोरोना पॉजिटिव हैं. हालांकि, तीनों के संक्रमित हुए 10 दिन हो चुके हैं. सभी बेहतर हैं. जल्द ही इनकी दूसरी जांच होगी. ये 14 दिन की कोरेंटिन मियाद पूरी कर भी अपने संबंधित कोर्ट की जेल में चले जायेंगे.
बता दें कि बिक्रमगंज के करियावाबाल स्थित व्यवहार न्यायालय के साथ ही मंडल उपकारा का उद्घाटन 25 सितंबर 2004 को हुआ था. 304 कैदियों की क्षमता वाली इस जेल में अभी कितने कैदी हैं, सुरक्षा कारणों से यह जानकारी सार्वजनिक नहीं की गयी है. सुपरिटेंडेंट ने बताया कि फिलहाल बिक्रमगंज उपकारा में सासाराम, बक्सर व कैमूर जिले के कैदी भरे पड़े हैं. उन्हें गिरफ्तारी के साथ यहां बनी इंट्री जेल लाये जाते हैं और 14 दिनों के कोरेंटिन पूरा करने के बाद पुनः कोर्ट की जेल में चले जाते हैं.
अभी कोरोना का काल है, जिसके कारण एहतियातन यह कदम उठाया जा रहा है. स्थिति सामान्य होते ही पहले की तरह व्यवस्था हो जायेगी. मंडल उपकारा बिक्रमगंज में आये सभी बाहरी कैदियों के साथ स्थानीय कैदियों का विशेष ख्याल रखा जा रहा है. ताकि, कैदियों में संक्रमण नहीं फैले.
जेल सुपरिटेंडेंट ने बताया कि सावन में कैदियों को मांसाहार भोजन नहीं दिया गया है. लेकिन सावन के बाद मांसाहार भोजन शुरू किया जायेगा. अभी कोरोना के कारण सभी कैदियों को गर्म पानी, नीबूं पानी व काढ़ा विशेष रूप में दिया जा रहा है. कैदियों में आपस में दो गज की दूरी का ख्याल रखा जा रहा है.इसी के अनुरूप 304 कैदियों वाली जेल के कमरों में प्रत्येक कमरों में 15 कैदियों को रखा जा रहा है. ताकि, आपस में कोई संक्रमित नहीं हों. 2004 में बनी जेल में अभी और अतिरिक्त कमरे हैं, जिसे जरूरत पड़ने पर उपयोग में लाया जा सकता है.
posted by ashish jha
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By Prabhat Khabar News Desk
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