Saran News : सदर अस्पताल में करेंट से झुलसी महिला को नहीं मिला समय पर इलाज

Author Alok kumar
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Saran News : सदर अस्पताल में करेंट से झुलसी महिला को नहीं मिला समय पर इलाज

Saran News : सदर अस्पताल में सोमवार को एक बार फिर स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खुल गयी, जब करेंट से झुलसी एक महिला को 35 मिनट तक इमरजेंसी वार्ड में इलाज नहीं मिल सका.

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छपरा. सदर अस्पताल में सोमवार को एक बार फिर स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खुल गयी, जब करेंट से झुलसी एक महिला को 35 मिनट तक इमरजेंसी वार्ड में इलाज नहीं मिल सका. इमरजेंसी में डॉक्टर की गैरहाजिरी से नाराज परिजनों ने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया और प्रशासन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाये. घायल महिला की पहचान बनियापुर थाना क्षेत्र के प्यारेपुर गांव निवासी अखिलेश राय की पत्नी पुष्पा कुमारी के रूप में हुई है. परिजनों के अनुसार, घर में मोटर चलाते समय महिला करेंट की चपेट में आ गयी, जिसके बाद उसे तत्काल सदर अस्पताल लाया गया. लेकिन अस्पताल पहुंचने पर पता चला कि इमरजेंसी विभाग में तैनात चिकित्सक डॉ हरेंद्र कुमार न्यायालय में गवाही देने गये हैं और वहां कोई भी वैकल्पिक डॉक्टर मौजूद नहीं है. इस दौरान पारामेडिकल स्टाफ ने प्राथमिक उपचार की कोशिश की, लेकिन महिला की हालत लगातार बिगड़ती चली गयी. इलाज में हो रही देरी को लेकर परिजनों ने नाराजगी जतायी और अस्पताल प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की.

सूचना मिलने पर अस्पताल प्रबंधक राजेश्वर प्रसाद और इमरजेंसी इंचार्ज डॉ शाहिद मौके पर पहुंचे और तत्काल ओपीडी में मौजूद डॉ किशोर कुणाल को बुलाकर महिला का इलाज शुरू कराया गया. हालांकि प्राथमिक जांच के बाद ही महिला को पटना रेफर कर दिया गया. परिजनों का आरोप है कि यदि समय पर इलाज मिल गया होता तो रेफर करने की नौबत नहीं आती. 35 मिनट तक कोई डॉक्टर नहीं आया और जब डॉक्टर आये भी, तो बिना समुचित इलाज के ही महिला को रेफर कर दिया गया. यह डॉक्टरों की घोर लापरवाही है.

रोस्टर के अनुसार इमरजेंसी विभाग में नहीं लगती ड्यूटी

गौरतलब है कि सदर अस्पताल के इमरजेंसी विभाग में ड्यूटी रोस्टर के अनुसार चिकित्सकों की नियुक्ति नहीं की जाती है. डॉक्टर अपनी सहूलियत के अनुसार ड्यूटी करते हैं, जिससे आम लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है. पूर्व में जिलाधिकारी अमन समीर ने निरीक्षण के दौरान सिविल सर्जन को निर्देश दिया था कि चिकित्सकों की ड्यूटी रोस्टर के अनुसार तय की जाए, लेकिन इसके बावजूद भी इसका पालन नहीं किया जा रहा है. इस घटना ने एक बार फिर अस्पताल की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिये हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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