औपचारिक समापन के बाद भी मेले की रौनक बरकरार, हो रही सामानों बिक्रि

Author Alok kumar
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औपचारिक समापन के बाद भी मेले की रौनक बरकरार, हो रही सामानों बिक्रि

विश्व प्रसिद्ध सोनपुर मेला का औपचारिक समापन भले ही हो चुका है, लेकिन मेला परिसर की चहल-पहल और रौनक अभी भी पूरी तरह बरकरार है.

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सोनपुर. विश्व प्रसिद्ध सोनपुर मेला का औपचारिक समापन भले ही हो चुका है, लेकिन मेला परिसर की चहल-पहल और रौनक अभी भी पूरी तरह बरकरार है. मेला समाप्त होने के बाद जिस सन्नाटे की उम्मीद लोग करते हैं. उसकी जगह यहां चारों तरफ लगातार बढ़ती भीड़ और खरीदारी का उत्साह देखने को मिल रहा है. विशेषकर लकड़ी बाजार, ऊन-कपड़ा बाजार और सजावटी सामान की दुकानों पर लोगों की बड़ी भीड़ जुट रही है. स्थानीय लोगों के साथ-साथ दूर-दराज से आये खरीदार भी मेला खत्म होने के बाद मिलने वाली विशेष छूट और सौदेबाजी के अवसर का लाभ उठाने के लिए पहुंच रहे हैं. दुकानदारों का कहना है कि मेला समाप्त होने के बाद भीड़ अपेक्षा से अधिक है, जिससे उनकी बिक्री में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. लकड़ी बाजार में बने हस्तशिल्प, फर्नीचर, पारंपरिक घरेलू सामान, किसान उपयोगी लकड़ी के औजार और प्राकृतिक लकड़ी से निर्मित डेकोरेटिव आइटम लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं. लोग यहां अपनी पसंद के अनुसार सौदेबाज़ी कर सामान खरीदते नजर आये. कई दुकानदारों ने बताया कि मेला समाप्ति के बाद अक्सर खरीदारों की संख्या कम हो जाती है. लेकिन इस बार भीड़ लगातार बढ़ रही है जिससे व्यापारियों का हौसला बुलंद है. वहीं, ऊन–कपड़ा बाजार में सर्दियों के मौसम को देखते हुए ग्राहकों की भारी भीड़ उमड़ रही है. कश्मीरी शॉल, हाथ से बुने स्वेटर, ऊनी टोपी, मफलर, दस्ताने और बच्चों के गर्म कपड़ों की खूब खरीदारी हो रही है. महिलाओं के लिए आकर्षक डिजाइन वाले स्टॉल पर लोगों की लंबी कतारें लगी रहीं. कई दर्जी और कश्मीरी शिल्पकार अपनी कला और गुणवत्ता से ग्राहकों को प्रभावित करते दिखे. मेला के अन्य भागों में भी खिलौने, चूड़ी–बिंदी, आभूषण, इलेक्ट्रॉनिक आइटम, जूते–चप्पल और खान–पान के स्टॉल पर रौनक सामान्य दिनों की तरह बनी हुई है. शाम होते–होते मेला परिसर रोशनी और भीड़ से फिर से जीवंत हो उठता है, मानो समापन सिर्फ औपचारिकता हो. दुकानदारों का मानना है कि इस बार सोनपुर मेला ने लोगों के मन में ऐसी छाप छोड़ी है कि ऑफिशियल समापन के बाद भी दर्शक और खरीदार उत्साह के साथ पहुंच रहे हैं. इससे न सिर्फ स्थानीय व्यापारियों को लाभ मिल रहा है बल्कि मेला की पहचान और प्रतिष्ठा भी और मजबूत हो रही है. कुल मिलाकर यह साफ है कि सोनपुर मेला की रौनक अभी खत्म नहीं हुई है. यह उत्साह आने वाले कई दिनों तक इसी तरह बाजारों में गूंजता रहेगा.

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