टीबी मुक्त बिहार की नई पहल. अब गांव-गांव चलेगा जागरूकता अभियान, प्रखंड स्तर पर बनेगी निगरानी टीम

फोटो -अभियान चलते स्वास्थ्य विभाग की टीम
बिहार सरकार टीबी उन्मूलन अभियान को जन-आंदोलन बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठा रही है. अब हर प्रखंड और शहरी वार्ड में एक वरीय उपसमाहर्ता के नेतृत्व में विशेष निगरानी टीम गठित की जाएगी. यह टीम घर-घर जाकर लोगों को जागरूक करेगी और टीबी के प्रसार को रोकने में मदद करेगी.
छपरा. टीबी उन्मूलन अभियान को जन-आंदोलन का स्वरूप देने के लिए बिहार सरकार ने प्रखंड स्तर पर विशेष निगरानी तंत्र विकसित करने का निर्णय लिया है. अब प्रत्येक प्रखंड और शहरी वार्ड में एक वरीय उपसमाहर्ता स्तर के अधिकारी को नामित किया जाएगा, जो अपने आवंटित क्षेत्र में टीबी उन्मूलन से जुड़ी सभी गतिविधियों की नियमित निगरानी करेंगे. उनके सहयोग के लिए एनसीसी कैडेट और ‘माई भारत’ स्वयंसेवकों की टीम गठित की जाएगी, जो गांव-गांव और मोहल्लों में जाकर लोगों को जागरूक करने के साथ फील्ड मॉनिटरिंग भी करेगी.
मुख्य सचिव ने सभी जिलों को दिए विशेष निर्देश
बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने सभी जिलाधिकारियों को जारी निर्देश में कहा है कि टीबी मुक्त बिहार के लक्ष्य को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें. उन्होंने अभियान को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सभी आवश्यक कार्रवाई तय समय सीमा के भीतर पूरी करने के निर्देश दिए हैं.
14 अगस्त तक चलेगा विशेष स्क्रीनिंग अभियान
स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिले में टीबी मरीजों की पहचान के लिए विशेष स्क्रीनिंग अभियान चलाया जा रहा है, जो 14 अगस्त तक जारी रहेगा. अभियान के दौरान उच्च जोखिम वाले लोगों की पहचान कर डिजिटल एक्स-रे, एनएएटी जांच और टीबी की पुष्टि होने पर निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराया जाएगा. विभाग का मानना है कि समय पर जांच और इलाज से टीबी के प्रसार को प्रभावी ढंग से रोका जा सकता है.
पहले भी सफल रहा था सौ दिवसीय अभियान
मुख्य सचिव के पत्र के अनुसार, 14 दिसंबर 2024 से उच्च प्राथमिकता वाले जिलों में 100 दिवसीय विशेष अभियान चलाया गया था, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए थे. इसी सफलता को देखते हुए 24 मार्च 2026 से दोबारा 100 दिवसीय अभियान शुरू किया गया है. इस अभियान के तहत अधिक से अधिक संभावित मरीजों की पहचान कर उन्हें उपचार से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है.
डब्ल्यूएचओ के मानकों के अनुसार बनेगा टीबी मुक्त क्षेत्र
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मानकों के अनुसार किसी क्षेत्र को तभी टीबी मुक्त माना जाएगा, जब वहां टीबी के मामले घटकर 47 प्रति लाख आबादी और मृत्यु दर तीन प्रति लाख आबादी रह जाए. इसी लक्ष्य को हासिल करने के लिए राज्य सरकार सभी जिलों में स्क्रीनिंग, जांच और उपचार व्यवस्था को और मजबूत बना रही है.
प्रखंड स्तर पर बनेगी टीबी मुक्त भारत अभियान टीम
नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक प्रखंड और शहरी वार्ड में एक वरीय उपसमाहर्ता को नोडल पदाधिकारी बनाया जाएगा. उनके साथ पांच एनसीसी कैडेट और पांच ‘माई भारत’ स्वयंसेवकों को जोड़कर टीबी मुक्त भारत अभियान टीम बनाई जाएगी. यह टीम घर-घर जाकर लोगों को टीबी के लक्षण, जांच और उपचार के प्रति जागरूक करेगी तथा स्क्रीनिंग अभियान की निगरानी भी करेगी. इस कार्य में रक्षा मंत्रालय और युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय का भी सहयोग लिया जाएगा.
जिला स्तर पर होगी नियमित समीक्षा
मुख्य सचिव ने निर्देश दिया है कि जिलाधिकारी अभियान की नियमित समीक्षा करें. वहीं राज्य स्तर पर भी प्रत्येक माह चार बार अभियान की प्रगति की समीक्षा की जाएगी. स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी समय-समय पर जिलों का मूल्यांकन भी करेंगे.
जनभागीदारी से मिलेगा टीबी उन्मूलन अभियान को बल
जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने कहा कि केवल सरकारी प्रयासों से टीबी का पूर्ण उन्मूलन संभव नहीं है. इसके लिए आम लोगों की भागीदारी, सामाजिक जागरूकता, समय पर जांच और नियमित उपचार बेहद जरूरी है. उन्होंने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों, स्वास्थ्य कर्मियों, एनसीसी कैडेटों और स्वयंसेवी युवाओं की संयुक्त भागीदारी से टीबी मुक्त बिहार और टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को समय पर हासिल किया जा सकेगा.
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By Prabhat Khabar News Desk
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