शराब-ताड़ी के कारोबार से सिक्की कला तक पहुंचीं सारण की जीविका दीदियां, अब पटना के सरस मेले में दिखायेंगी हुनर
अपनी कलाकृति के साथ जीविका दीदी | Prabhat Khabar Network
सारण की 38 जीविका दीदियों ने पारंपरिक सिक्की घास की कला को रोजगार का जरिया बनाया है. ये महिलाएं, जो कभी देशी शराब के कारोबार से जुड़ी थीं, अब सिक्की घास से आकर्षक उत्पाद बनाकर आत्मनिर्भर बन रही हैं. इनका हुनर अब पटना के सरस मेले में प्रदर्शित होगा, जहां ये अपने बनाए उत्पादों का प्रदर्शन करेंगी.
Saran News : सारण जिले के मांझी प्रखंड की 38 जीविका दीदियों ने पारंपरिक काम को रोजगार का जरिया बनाकर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है. कभी देशी शराब और ताड़ी के पारंपरिक कारोबार से जुड़ी रहीं ये महिलाएं अब सिक्की घास से आकर्षक और उपयोगी उत्पाद तैयार कर रही हैं. इनके बनाए उत्पाद अब स्थानीय बाजार से निकलकर बड़े मेलों तक पहुंच रहे हैं. इसी उपलब्धि के चलते ये दीदियां 20 से 29 सितंबर तक पटना के ज्ञान भवन में ग्रामीण विकास विभाग की ओर से आयोजित सरस मेले में शामिल होंगी.
बरेजा की पुष्पा और धानमुनि करेंगी सारण का प्रतिनिधित्व
सरस मेले में इस बार सारण की ओर से बरेजा पंचायत की पुष्पा देवी और धानमुनि देवी भाग लेंगी. दोनों महिलाएं जागृति जीविका महिला विकास स्वावलंबी सहकारी समिति से जुड़ी हैं. सतत जीविकोपार्जन योजना से जुड़ने के बाद इनके जीवन में बड़ा बदलाव आया है. अब वे सिक्की घास से बने उत्पाद तैयार कर परिवार की आमदनी बढ़ाने के साथ दूसरे महिलाओं को भी रोजगार से जोड़ने में भूमिका निभा रही हैं.
सरयू किनारे मिलती है सिक्की घास, पहले डलिया तक सीमित था काम
सरयू तट पर बसे बरेजा गांव में सिक्की घास प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है. यहां की महिलाएं लंबे समय से सिक्की घास से पारंपरिक डलिया बनाने का काम करती रही हैं. हालांकि स्थानीय स्तर पर बाजार सीमित होने और उत्पाद का उचित मूल्य नहीं मिलने के कारण मेहनत के अनुरूप आमदनी नहीं हो पाती थी. बजरंगबली समूह की सीता देवी बताती हैं कि गांव में ही डलिया बेचने पर कई बार लागत तक निकालना मुश्किल हो जाता था.
प्रशिक्षण के बाद पारंपरिक डलिया से आधुनिक उत्पाद तक पहुंचीं महिलाएं
महिलाओं की इस समस्या को देखते हुए जिला एवं प्रखंड एसजेवाइ टीम के मार्गदर्शन में कुशाग्राम जीविका महिला सिक्की उत्पादक समूह का गठन किया गया. समूह से जुड़ी महिलाओं को प्रशिक्षण दिया गया. इसके बाद उन्होंने सिक्की घास से पारंपरिक डलिया के अलावा कई आधुनिक उत्पाद बनाना शुरू किया.
अब इन महिलाओं के उत्पादों में पेन स्टैंड, सिक्की पोला चूड़ी, कानबाली, दुल्हन सेट चूड़ी, राखी और विभिन्न तरह के गिफ्ट आइटम शामिल हैं. बदलती पसंद और बाजार की मांग के अनुरूप उत्पाद तैयार करने से इनके काम को नया बाजार मिला है.
सरस और सोनपुर मेले से बढ़ा कारोबार
वित्तीय वर्ष 2025-26 में समूह ने अलग-अलग मेलों में अपने उत्पाद बेचकर अच्छी आमदनी हासिल की. सरस मेले में समूह का करीब 55 हजार रुपये का कारोबार हुआ, जबकि सोनपुर मेले में 28 हजार रुपये के उत्पाद बिके. इससे महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ा और उन्हें अपने उत्पादों के लिए बड़े बाजार की संभावनाएं दिखाई देने लगीं.
25 से 28 हजार राखियां बेचकर बढ़ायी आमदनी
पिछले रक्षाबंधन पर सिक्की से तैयार राखियों की भी अच्छी मांग रही. महिलाओं ने करीब 25 से 28 हजार राखियां तैयार कर बेचीं. इन राखियों की कीमत 10 रुपये प्रति राखी रखी गयी थी. इससे महिलाओं को अच्छी आमदनी हुई और उनके उत्पादों को सामाजिक स्तर पर भी पहचान मिली.
घास की कटाई और रंगाई से भी महिलाओं को रोजगार
सिक्की उत्पादों के निर्माण में बरेजा पंचायत की कई महिलाएं सीधे जुड़ी हैं. मुन्नी देवी, शारदा देवी, कमलावती, पुनीता, सीता और अनीता सहित अन्य महिलाएं उत्पाद तैयार करने में योगदान दे रही हैं. वहीं कुछ महिलाएं सिक्की घास की कटाई और रंगाई का काम कर आय अर्जित कर रही हैं. इस तरह सिक्की उत्पादों ने गांव में महिलाओं के लिए रोजगार की पूरी श्रृंखला तैयार कर दी है.
अब बड़े बाजार पर नजर
जीविका से जुड़ने और प्रशिक्षण मिलने के बाद इन महिलाओं ने पारंपरिक हुनर को बाजार की मांग के अनुरूप ढाल लिया है. स्थानीय स्तर पर सीमित बिक्री से शुरू हुआ सफर अब राज्यस्तरीय मेलों तक पहुंच गया है. पटना के सरस मेले में भागीदारी से महिलाओं को अपने उत्पादों के लिए नया बाजार मिलने की उम्मीद है. साथ ही, दूसरी महिलाओं के लिए भी यह पहल आत्मनिर्भरता की राह दिखा रही है.
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