दिघवारा में लाल मुंह वाले बंदर का आतंक, एक महीने में 100 से ज्यादा लोगों पर हमला
Published by : Sakshi kumari Updated At : 01 Jun 2026 2:30 PM
सांकेतिक तस्वीर
बंदर के हमलों के बीच सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र दिघवारा में 25 मई से एंटी रैबीज इंजेक्शन उपलब्ध नहीं है. ऐसे में पीड़ितों को दरियापुर, परसा, मकेर, सदर अस्पताल छपरा और रेफरल अस्पताल सोनपुर का रुख करना पड़ रहा है.
Saran News: (दिघवारा से अमित कुमार की रिपोर्ट)
सारण जिले के दिघवारा और दरियापुर प्रखंड में एक लाल मुंह वाले बंदर का आतंक लोगों के लिए बड़ी मुसीबत बन गया है. पिछले एक महीने में यह बंदर 100 से अधिक लोगों को घायल कर चुका है. लगातार हो रहे हमलों से नगर और ग्रामीण क्षेत्रों में दहशत का माहौल है. लोग रातभर जागकर अपने परिवार की सुरक्षा करने को मजबूर हैं, जबकि पीड़ित अस्पतालों के चक्कर काट रहे हैं.
100 से अधिक लोगों को बना चुका है शिकार
स्थानीय लोगों और अस्पतालों से मिली जानकारी के अनुसार लाल मुंह वाले इस बंदर ने दिघवारा और दरियापुर प्रखंड के 100 से अधिक लोगों को अपना निशाना बनाया है. घायलों में दो वर्ष के बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक शामिल हैं. बंदर के हमलों से झौंवा, हराजी, आमी, मानुपुर मलखाचक, राईपट्टी, शंकरपुर रोड, बसतपुर, चकनूर सैदपुर और मटिहान गांव के लोग सबसे अधिक प्रभावित हैं.
घर में घुसकर करता है हमला
पीड़ितों का कहना है कि बंदर अचानक घरों में घुस जाता है और घरेलू सामान को नुकसान पहुंचाने के साथ लोगों पर हमला कर देता है. कई मामलों में लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं. हमले के बाद परिजनों को इलाज के लिए अस्पतालों का सहारा लेना पड़ रहा है.
वन विभाग ने खड़े किए हाथ
स्थानीय लोगों का आरोप है कि बंदर के आतंक की सूचना कई बार वन विभाग को दी गई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. वन विभाग के कर्मियों ने लोगों को बताया कि वे लाल मुंह वाले बंदरों का रेस्क्यू नहीं करते हैं. इससे लोगों में नाराजगी बढ़ रही है और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं.
रातभर जागकर पहरा दे रहे लोग
जिस इलाके में बंदर सक्रिय होता है, वहां के लोग पूरी रात जागकर पहरा देने को मजबूर हैं. परिजन बच्चों और बुजुर्गों को लेकर विशेष सतर्कता बरत रहे हैं. लोगों का कहना है कि हर दिन यह डर बना रहता है कि कहीं बंदर फिर किसी पर हमला न कर दे.
सीएचसी में एंटी रैबीज इंजेक्शन नहीं
बंदर के हमलों के बीच सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र दिघवारा में 25 मई से एंटी रैबीज इंजेक्शन उपलब्ध नहीं है. ऐसे में पीड़ितों को दरियापुर, परसा, मकेर, सदर अस्पताल छपरा और रेफरल अस्पताल सोनपुर का रुख करना पड़ रहा है. इससे मरीजों का समय और पैसा दोनों खर्च हो रहा है. कई लोग मजबूरी में निजी दुकानों से महंगे दाम पर इंजेक्शन खरीद रहे हैं.
राईपट्टी में एक रात में आधा दर्जन लोग घायल
बीती रात नगर पंचायत के राईपट्टी मोहल्ले में बंदर ने जमकर उत्पात मचाया. इस दौरान उसने कई घरों में घुसकर सामान को नुकसान पहुंचाया और आधा दर्जन लोगों को घायल कर दिया. घायलों में एक दो वर्षीय बालक और एक तीन वर्षीय बालिका भी शामिल हैं.
जिले से मांगी गई है एंटी रैबीज सुई
दिघवारा सीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. रौशन कुमार ने बताया कि पिछले कई दिनों से अस्पताल में एंटी रैबीज सुई उपलब्ध नहीं है. उन्होंने कहा कि मरीजों की परेशानी को देखते हुए जिले से सुई की मांग की गई है. जैसे ही उपलब्ध होगी, पीड़ितों को प्राथमिकता के आधार पर इंजेक्शन दिया जाएगा.
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By Sakshi kumari
साक्षी देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की धरती सीवान से आती हैं. पत्रकारिता में करियर की शुरुआत News4Nation के साथ की. 3 सालों तक डिजिटल माध्यम से पत्रकारिता करने के बाद वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल के साथ कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. बिहार की राजनीति में रुचि रखती हैं. हर दिन नया सीखने के लिए इच्छुक रहती हैं.
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