कभी दाल पकाने के लिए इस्तेमाल होता था पानी, आज कचरे से पट रहा छपरा का ऐतिहासिक शिल्पी पोखरा

Published by : Sakshi kumari Updated At : 01 Jun 2026 12:39 PM

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बदहाली का शिकार शिल्पी पोखरा

Saran News: कभी अपने मीठे और स्वच्छ पानी के लिए प्रसिद्ध यह पोखरा आज कचरा डंपिंग स्थल बनता जा रहा है. साफ-सफाई और रखरखाव के अभाव में पोखरे का पानी प्रदूषित हो चुका है.

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Saran News: (छपरा से प्रभात किरण हिमांशु की रिपोर्ट)
छपरा का ऐतिहासिक शिल्पी पोखरा, जिसे रघुनी साह सरोवर के नाम से भी जाना जाता है, आज बदहाली और उपेक्षा का शिकार है. कभी अपने मीठे और स्वच्छ पानी के लिए प्रसिद्ध यह पोखरा आज कचरा डंपिंग स्थल बनता जा रहा है. साफ-सफाई और रखरखाव के अभाव में पोखरे का पानी प्रदूषित हो चुका है और चारों ओर गंदगी का अंबार लगा हुआ है.

जीर्णोद्धार कार्य बीच में ही पड़ा ठप

अंग्रेजों के समय से अस्तित्व में रहे इस पोखरे को तीन वर्ष पूर्व अतिक्रमण मुक्त कराया गया था. इसके बाद इसके जीर्णोद्धार का कार्य शुरू हुआ, लेकिन कुछ काम होने के बाद निर्माण कार्य ठप पड़ गया. एक वर्ष पूर्व पोखरे की उड़ाही कर वर्षों से जमा कचरा हटाया गया था और इसके चारों ओर वाकिंग ट्रैक का निर्माण भी कराया गया था. इसके बावजूद नियमित रखरखाव नहीं होने से स्थिति फिर खराब हो गई है.

गंदगी और असामाजिक गतिविधियों का बना केंद्र

स्थानीय लोगों द्वारा पोखरे में कचरा फेंके जाने से इसके आसपास भारी गंदगी फैल गई है. कई लोग पोखरे के किनारे शौच भी कर रहे हैं, जबकि कुछ राहगीर इसे यूरिनल के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं. बाउंड्री वॉल का निर्माण अधूरा होने के कारण यहां असामाजिक तत्वों का जमावड़ा भी लगा रहता है.

इको पार्क के रूप में विकसित करने की योजना

जानकारी के अनुसार नगर विकास एवं आवास विभाग ने शिल्पी सरोवर को इको पार्क के रूप में विकसित करने की स्वीकृति दी है. इसके जीर्णोद्धार के लिए 30.35 लाख रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है. पहले चरण में 15.35 लाख रुपये की लागत से कुछ कार्य पूरे किए जा चुके हैं. योजना के तहत पार्क में लोगों के बैठने के लिए बेंच, टहलने के लिए वाकिंग ट्रैक, बच्चों के लिए झूले तथा अन्य सुविधाएं विकसित की जाएंगी. इसके अलावा सरोवर को विकसित कर यहां नौकायन (बोटिंग) की व्यवस्था भी की जाएगी.

कभी पीने और भोजन बनाने में होता था उपयोग

स्थानीय बुजुर्ग शारदा देवी बताती हैं कि 60 और 70 के दशक में इस पोखरे का पानी इतना स्वच्छ और मीठा था कि महिलाएं इसे घर ले जाकर भोजन बनाने में इस्तेमाल करती थीं. विशेष रूप से दाल पकाने के लिए इस पानी का उपयोग किया जाता था, क्योंकि इसमें दाल आसानी से गल जाती थी. उन्होंने बताया कि कई लोग इस पानी का उपयोग पीने के लिए भी करते थे. उस समय पोखरे के चारों ओर घने वृक्ष थे, साफ-सफाई बेहतर थी और सुबह-शाम लोग यहां सुकून के पल बिताने आते थे.

जल्द पूरे होंगे शेष कार्य

छपरा नगर निगम की डिप्टी मेयर रागिनी देवी ने कहा कि पोखरे के जीर्णोद्धार का कार्य अभी अधूरा है और कई कार्य शेष हैं. बाउंड्री वॉल सहित अन्य निर्माण कार्य पूरे होने के बाद पोखरा पूरी तरह सुरक्षित हो जाएगा. उन्होंने कहा कि साफ-सफाई को लेकर नगर निगम के सफाई कर्मियों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं.

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लेखक के बारे में

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साक्षी देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की धरती सीवान से आती हैं. पत्रकारिता में करियर की शुरुआत News4Nation के साथ की. 3 सालों तक डिजिटल माध्यम से पत्रकारिता करने के बाद वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल के साथ कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. बिहार की राजनीति में रुचि रखती हैं. हर दिन नया सीखने के लिए इच्छुक रहती हैं.

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