सारण: जेपी विश्वविद्यालय ने डिजिलॉकर अंकपत्र विवाद पर दी सफाई, कहा- तकनीकी त्रुटि मार्च में ही कर दी गई थी ठीक

Saran News: जयप्रकाश विश्वविद्यालय (जेपीयू) ने डिजिलॉकर पर जारी अंकपत्रों में आई तकनीकी गड़बड़ी पर अपना पक्ष स्पष्ट किया है। जानें कि त्रुटि कब सुधारी गई थी और क्यों सोशल मीडिया पर पुराना अंकपत्र प्रसारित किया जा रहा है।
Saran News: जयप्रकाश विश्वविद्यालय (जेपीयू) में डिजिलॉकर पर जारी अंकपत्र में हुई गड़बड़ी का मामला तूल पकड़ने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने पूरे प्रकरण पर अपना पक्ष स्पष्ट किया है. परीक्षा विभाग ने कहा है कि डिजिलॉकर पर अपलोड किए गए कुछ अंकपत्रों में हुई तकनीकी त्रुटि का मार्च 2026 में ही सुधार कर दिया गया था और वर्तमान में उपलब्ध सभी अंकपत्र पूरी तरह सही एवं अद्यतन हैं.
थर्ड सेमेस्टर अंकपत्र मिलने पर उठा था विवाद
दरअसल, स्नातक तृतीय सेमेस्टर की परीक्षा का फॉर्म भरने के दौरान एक छात्र को डिजिलॉकर पर तृतीय सेमेस्टर अंकित अंकपत्र प्राप्त हुआ था. परीक्षा से पहले परिणाम जारी होने के बाद इस मामले को लेकर छात्र संगठनों ने आपत्ति जताई और विश्वविद्यालय से तत्काल सुधार की मांग की थी.
परीक्षा नियंत्रक ने जारी किया स्पष्टीकरण
इस मामले में परीक्षा नियंत्रक डॉ. अशोक कुमार मिश्रा ने गुरुवार को जारी पत्र में बताया कि सत्र 2024-28 के स्नातक प्रथम सेमेस्टर के अंकपत्र डिजिलॉकर पर अपलोड करने के दौरान तकनीकी एवं डेटा प्रविष्टि संबंधी त्रुटि के कारण कुछ विद्यार्थियों के अंकपत्र पर सेमेस्टर-1 के स्थान पर सेमेस्टर-3 अंकित हो गया था.
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह त्रुटि केवल सेमेस्टर के उल्लेख तक सीमित थी. विद्यार्थियों के प्राप्तांक, परिणाम और अन्य सभी शैक्षणिक विवरण पूरी तरह सही थे तथा उन पर इस त्रुटि का कोई प्रभाव नहीं पड़ा.
मार्च 2026 में ही कर दिया गया था सुधार
परीक्षा नियंत्रक ने बताया कि जैसे ही यह मामला विश्वविद्यालय के संज्ञान में आया, परीक्षा विभाग और संबंधित तकनीकी टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए मार्च 2026 में ही त्रुटि का पूर्ण निराकरण कर दिया था. इसके बाद संशोधित अंकपत्र डिजिलॉकर पर अपलोड कर दिए गए. वर्तमान में डिजिलॉकर पर उपलब्ध सभी अंकपत्र सही और अद्यतन हैं.
सोशल मीडिया पर पुराने अंकपत्र प्रसारित करने का आरोप
विश्वविद्यालय ने कहा कि कुछ छात्र संगठनों द्वारा सोशल मीडिया पर जिस अंकपत्र को साझा कर भ्रामक प्रचार किया जा रहा है, वह फरवरी 2026 में डाउनलोड किया गया पुराना अंकपत्र है. जबकि उसकी तकनीकी त्रुटि मार्च 2026 में ही सुधार दी गई थी.
विश्वविद्यालय के अनुसार पुराने अंकपत्र को वर्तमान स्थिति बताकर प्रसारित करना तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने और विद्यार्थियों व आमजन के बीच भ्रम फैलाने का प्रयास है.
भ्रामक प्रचार से बचने की अपील
विश्वविद्यालय प्रशासन ने विद्यार्थियों, अभिभावकों और आमजन से अपील की है कि वे केवल जयप्रकाश विश्वविद्यालय द्वारा जारी आधिकारिक सूचनाओं और डिजिलॉकर पर उपलब्ध अद्यतन अंकपत्रों को ही प्रमाणिक मानें. किसी भी अपुष्ट अथवा भ्रामक सूचना पर विश्वास न करें.
परीक्षा नियंत्रक डॉ. अशोक कुमार मिश्रा ने चेतावनी दी कि यदि कोई व्यक्ति या संगठन जानबूझकर असत्य एवं भ्रामक जानकारी प्रसारित कर विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने का प्रयास करेगा, तो उसके विरुद्ध नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी.
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