ग्रामीण इलाकों में तेजी से बढ़

दिघवारा : एक जमाना था जब होश संभालने के बाद हाथों में झोला लेकर सरकारी स्कूल या फिर कंधे पर बैग टांग कर प्राइवेट स्कूल में ज्ञान अर्जित करने पहुंचते थे. मगर जमाना बदलने के साथ अभिभावकों के सोच में बदलाव आया है. वर्तमान समय में पढ़ाई की अहमियत को समझते हुए अभिभावक बच्चों की […]
दिघवारा : एक जमाना था जब होश संभालने के बाद हाथों में झोला लेकर सरकारी स्कूल या फिर कंधे पर बैग टांग कर प्राइवेट स्कूल में ज्ञान अर्जित करने पहुंचते थे. मगर जमाना बदलने के साथ अभिभावकों के सोच में बदलाव आया है. वर्तमान समय में पढ़ाई की अहमियत को समझते हुए अभिभावक बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान देने लगे हैं.
शायद यही वजह है कि अभिभावकों के सोच को समझते हुए निजी स्कूल संचालक प्ले स्कूल को चलाने में ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहे हैं. अब ग्रामीण इलाकों में भी प्ले स्कूल का डिमांड तेजी से बढ़ा है एवं दिघवारा एवं शितलपुर जैसी छोटी जगहों पर खुले प्ले स्कूलों में नामांकित बच्चों की संख्या सैकड़ों में है. इन स्कूलों से निजी स्कूल संचालकों को अच्छी आमदनी हो रही है. वहीं स्कूलों में नामांकित बच्चों को फायदा भी हो रहा है.
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