काले झंडे लेकर पटना निकले ग्रामीण, क्या बदलेगा पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे का रूट?

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पैदल मार्च में शामिल विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी कुणाल कुमार व अन्य

पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे के प्रस्तावित रूट एलाइनमेंट को लेकर ग्रामीणों ने सरायरंजन से पटना तक पैदल मार्च निकाला है. वे गांव और किसानों के हितों को प्रभावित करने वाले इस रूट पर पुनर्विचार की मांग कर रहे हैं.

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Samastipur News: पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे के प्रस्तावित रूट एलाइनमेंट को लेकर रविवार को सरायरंजन स्थित केदार संत रामाश्रय महाविद्यालय (केएसआर कॉलेज) से पटना के लिए पैदल मार्च शुरू किया गया. सरायरंजन विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी कुनाल कुमार के नेतृत्व में निकले मार्च में स्थानीय ग्रामीणों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न गांवों के लोगों ने हिस्सा लिया. प्रदर्शनकारियों ने काले झंडे और पर्चे लेकर प्रस्तावित रूट पर पुनर्विचार की मांग उठाई.

Sarairanjan News: काले झंडे लेकर पटना रवाना हुए प्रदर्शनकारी

पैदल मार्च में शामिल लोगों ने हाथों में काले झंडे और पर्चे लेकर एक्सप्रेसवे के प्रस्तावित रूट एलाइनमेंट के खिलाफ विरोध जताया. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि मौजूदा रूट से क्षेत्र के कई गांवों, किसानों और आम लोगों के हित प्रभावित हो सकते हैं.

गांव और किसानों के हितों का उठाया मुद्दा

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि एक्सप्रेसवे जैसी बड़ी परियोजना के निर्माण के दौरान प्रभावित गांवों और किसानों के हितों का ध्यान रखा जाना चाहिए. इसी मांग को सरकार और संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने के उद्देश्य से पैदल मार्च आयोजित किया गया है.

पटना पहुंचकर सरकार के सामने रखेंगे मांग

पूर्व प्रत्याशी कुनाल कुमार ने कहा कि यह आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि क्षेत्र के लोगों के हित और न्यायपूर्ण रूट एलाइनमेंट की मांग को लेकर है. उन्होंने कहा कि पैदल मार्च के माध्यम से पटना पहुंचकर सरकार के समक्ष क्षेत्रवासियों की बात रखी जाएगी.

रूट एलाइनमेंट पर पुनर्विचार की मांग

प्रदर्शनकारियों ने सरकार से पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे के प्रस्तावित रूट एलाइनमेंट की समीक्षा करने और प्रभावित लोगों के हितों को ध्यान में रखते हुए उचित निर्णय लेने की मांग की. उनका कहना है कि इस मामले में न्यायपूर्ण समाधान जरूरी है.

मांग नहीं मानी तो आंदोलन जारी रखने की चेतावनी

स्थानीय लोगों ने कहा कि यदि उनकी मांगों पर उचित विचार नहीं किया गया तो आगे भी लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन जारी रखा जाएगा. मार्च में बड़ी संख्या में ग्रामीण और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए.

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