समस्तीपुर: दो साल से दफ्तरों के चक्कर काट रहा दिव्यांग, ट्राईसाइकिल के नाम पर मिला सिर्फ आश्वासन

Edited by SUMIT KUMAR
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दो साल से दफ्तरों के चक्कर काट रहा दिव्यांग

Handicapped Tricycle Scheme Bihar:समस्तीपुर में सरकारी दावों की पोल खुली है. महमदपुर सकरा के दिव्यांग रंजीत पासवान पिछले दो साल से नई ट्राईसाइकिल के लिए कलेक्ट्रेट और सिविल सर्जन कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें सिर्फ आश्वासन मिल रहा है.जानिए पूरी खबर…

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Handicapped Tricycle Scheme Bihar: समस्तीपुर में सरकारी दावों और धरातल की हकीकत में कितना बड़ा फासला होता है, इसका जीता-जागता और दुखद उदाहरण एक बार फिर समस्तीपुर में सामने आया है. यहां एक बेबस दिव्यांग पिछले दो साल से एक नई ट्राईसाइकिल के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर है, लेकिन उसकी सुध लेने वाला कोई नहीं है. अधिकारी आते-जाते हैं, कागजी कोरम पूरे होते हैं, आश्वासन मिलते हैं, लेकिन इस लाचार दिव्यांग की जिंदगी व्हीलचेयर और बैसाखी के अभाव में एक ही जगह सिमट कर रह गई है. यह दर्दनाक दास्तां दोनों पैर से लाचार महमदपुर सकरा के रहने वाले रंजीत पासवान की है.

धूप में पैर घिसटकर पहुंचे सिविल सर्जन कार्यालय

सोमवार को व्यवस्था की मार झेल रहे रंजीत पासवान सबसे पहले कलेक्ट्रेट स्थित सामाजिक सुरक्षा कोषांग (SocialSecurityCell)पहुंचे.वहाँ उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला, बल्कि अधिकारियों ने सीधे छह महीने बाद आने की बात कहकर पल्ला झाड़लिया. इसके बाद किसी ने उन्हें सिविल सर्जन कार्यालय जाने की सलाह दी. जून की चिलचिलाती धूप और भीषण गर्मी में लाचार दिव्यांग रंजीत पैर घिसटते हुए सिविल सर्जन कार्यालय पहुंचे, लेकिन वहाँ भी उन्हें राहत नहीं मिली और अधिकारियों ने उन्हें वापस समाहरणालय (कलेक्ट्रेट) जाने का रास्ता दिखा दिया.

पांच साल पहले मिली गाड़ी हो चुकी है कबाड़, आवाजाही पूरी तरह ठप

मिली जानकारी के अनुसार, पीड़ित रंजीत पासवान को करीब पांच साल पहले समाज कल्याण विभाग की ओर से एक ट्राईसाइकिल दी गई थी. लंबे समय तक इस्तेमाल होने और उचित रखरखाव व मरम्मत के अभाव में वह ट्राईसाइकिल अब पूरी तरह सड़-गल चुकी है और कबाड़ में तब्दील हो गई है.गाड़ी पूरी तरह खराब होने के बाद से ही इस दिव्यांग युवक की घर से बाहर निकलना और रोजी-रोटी के लिए आवाजाही करना पूरी तरह ठप हो गया है.

दो साल से सिर्फ मिल रही है तारीख, सवालों के घेरे में कल्याणकारी योजनाएं

अपनी लाचारी को दूर करने और एक अदद नई ट्राईसाइकिल की आस में पीड़ित पिछले दो वर्षों से लगातार संबंधित विभागीय कार्यालयों और अधिकारियों की चौखट पर दस्तक दे रहा है. कई बार आवेदन देने और गुहार लगाने के बावजूद विभागीय उदासीनता के कारण उसे सिर्फ नई तारीख और कोरा आश्वासन ही नसीब हो रहा है.पीड़ित रंजीत ने रोते हुए कहा, “पांच साल पहले जो गाड़ी मिली थी, वो पूरी तरह सड़ चुकी है. पिछले दो साल से पैर घिसटकर कार्यालय आता हूं कि शायद कोई साहब मेरी सुन लें, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन देकर लौटा दिया जाता है.सरकारदिव्यांगों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए बैटरी चालित ट्राईसाइकिल और अन्य उपकरण देने की बड़ी-बड़ी योजनाएं चलाती है. लेकिन समस्तीपुर के इस मामले ने स्थानीय जिला प्रशासन और सामाजिक सुरक्षा सेल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. जब एक जरूरतमंद दिव्यांग को अपने हक के लिए दो साल तक दर-दर भटकना पड़े, तो दावों की पोल खुलना लाजिमी है.

​समस्तीपुर से गिरिजा नन्दन शर्मा की रिपोर्ट

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SUMIT KUMAR

लेखक के बारे में

By SUMIT KUMAR

सुमित पत्रकारिता में पिछले 4 वर्षों से सक्रिय। प्रभात खबर के प्रिंट मीडिया के साथ काम करने के बाद वर्तमान में प्रभात खबर की डिजिटल टीम से जुड़े हुए हैं। क्राइम, हाईपरलोकल, स्वास्थ्य विभाग व राजनीतिक रिपोर्टिंग में विशेष रुचि और अनुभव रखते हैं। क्षेत्रीय मुद्दों और जनसरोकार की खबरों को सशक्त तरीके से उठाने के लिए जाने जाते हैं।

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