आम व लीची के फलों की लगातार निगरानी करें

Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 17 Apr 2024 11:01 PM

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समस्तीपुर : आम व लीची के फलों पर कीट की निगरानी किसान लगातार करें. कीटों के प्रकोप के लिये मौसम अनुकूल है.

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समस्तीपुर : आम व लीची के फलों पर कीट की निगरानी किसान लगातार करें. कीटों के प्रकोप के लिये मौसम अनुकूल है. डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक डॉ. ए सत्तार ने कहा है कि लीची के पेड़ में फल बेधक कीट के शिशु उजले रंग के होते हैं. यह फलों के डंठल के पास से फलों में प्रवेश कर गुदे को खाते हैं, जिससे प्रभावित फल खाने लायक नहीं रहता. इस कीट से बचाव हेतु लीची के पत्तियों एवं टहनियों पर पारफेनोफॉस 50 ईसी का 10 मिली या कार्बारिल 50 प्रतिशत घुलनशील पॉउडर का 20 ग्राम दवा को 10 लीटर पानी में घोलकर अप्रैल में 15 दिनों के अन्तराल पर प्रति पेड़ की दर से दो छिड़काव करें. किसान लीची के बगीचों में नमी बनाये रखें. आम के पडे़ में मिलीबग (दहिया कीट) की निगरानी करें. यह कीट चिपटे गोल आकार के पंखहीन तथा शरीर पर सफेद दही के रंग का पॉउडर चिपका रहता है. यह आम के पडे़ में मुलायम डालों और मंजर वाले भाग में बहुतों की संख्या में चिपका हुआ देखा जा सकता है तथा यह उन हिस्सों से लगातार रस चूसता रहता है, जिससे अक्रान्त भाग सूख जाता है तथा फल झड़ जाते हैं. इस कीट की रोकथाम हेतु डाइमेथोएट 30 ईसी दवा का 1.0 मिली प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर पेड़ पर समान रूप से छिड़काव करें. आम के बगीचों में नमी बनाये रखें. विगत माह में बोयी गई मूंग व उड़द की फसलों में निकाई-गुड़ाई एवं बछनी करें. इन फसलों में सघन रोमोवाली सुंडिया की निगरानी करें. इनकी सुडियों के शरीर के ऊपर काफी घने बाल पाये जाते हैं. यह मूंग एवं उड़द के पौधों के कोमल भागों विशेषकर पत्तियों को खाती है. इनकी संख्या अधिक रहने पर कभी-कभी केवल डंठल ही शेष रह जाती है. इस प्रकार इस कीट से फसल को काफी नुकसान एवं उपज में काफी कमी आती है. रोकथाम हेतु फसल में मिथाइल पैराथियान 50 इसी दवा का 2 मिली प्रति लीटर या क्लोरपाईरिफॉस 20 इसी दवा का 2.5 मिली प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर फसल में छिडकाव करें. गरमा सब्जियों में भिन्डी, नेनुआ, करैला, लौकी (कद्दू) और खीरा की फसल में आवश्यकतानसुार निकाई-गुड़ाई एवं सिंचाई करें. सब्जियोंं में कीट एवं रोग-व्याधि की निगरानी प्राथमिकता से करते रहें. कीट का प्रकोप इन फसलों में दिखने पर मैलाथियान 50 ईसी या डाइमेथोएट 30 ईसी दवा का 01 मिली प्रति लीटर पानी की दर से घोलकर छिड़काव मौसम साफ रहने पर करें. टमाटर की फसल को फल छेदक कीट से बचाव हेतु खेतों में पक्षी बसेरा लगायें. कीट से ग्रसित फलों को इक्ट्ठा कर नष्ट कर दें,यदि कीट की संख्या अधिक हो तो स्पिनोसेड 48 इसी प्रति 01 मिली प्रति 4 लीटर पानी की दर से छिडक़ाव मौसम साफ रहने पर करें. भिण्डी की फसल में लीफ हॉपर कीट की निगरानी करें. यह कीट दिखने में सुक्ष्म होता है. इसके नवजात एवं व्यस्क दोनों पत्तियों पर चिपककर रस चूसते हैं. पत्तियां पीली तथा पौधे कमजोर हो जाते हैं, जिससे फलन प्रभावित होती है. इसका प्रकोप दिखाई देने पर इमिडाक्लोपिड्र 0.5 मिली प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर छिड़काव मौसम साफ रहने पर ही करें. वैज्ञानिक ने कहा है कि मौसम के शुष्क रहने की संभावना को देखते हुए तैयार गेहूं, अरहर एवं मक्का फसल की कटनी तथा दौनी करें. गेहूं एवं मक्का के दानों को अच्छी तरह धूप में सूखाने के बाद भडांरण करें. बसंतकालीन मक्का को तना छेदक कीट से बचायें बसंतकालीन मक्का की फसल जो घुटने की ऊंचाई के बराबर हो गयी हो, मिट्टी चढ़ाने का कार्य करें. आवश्यक नमी हेतु सिंचाई करें. इन फसलों में तना छेदक कीट की किसान निगरानी करें. शुष्क एवं गर्म मौसम इस कीट के फैलाव के लिए अनुकूल वातावरण है. अंडे से निकलने के बाद इस कीट की छोटी-छोटी सुडियां मक्का की कोमल पत्तियों को खाती है तथा मध्य कलिका की पत्तियों के बीच घुसकर तने में पहुंच जाती है तथा गुद्दे को खाती हुई जड़ की तरफ बढ़ते हुए सुरंग बनाती है. फलस्वरुप मध्य कलिका मुरझाई हुई नजर आती है जो बाद में सूख जाती है. इस प्रकार पौधे की बढ़वार रूक जाती है एवं ऊपज में काफी कमी आती है. इस कीट की रोकथाम हेतु क्लोरपाईरिफॉस-20 ईसी दवा का 2.5 मिली प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर फसल में समान रूप से छिडकाव करें.

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