सेविका-सहायिका चयन प्रक्रिया में डीपीओ को मिला विशेषाधिकार
Author Prabhat khabar digital desk
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समस्तीपुर : बाल विकास परियोजना अंतर्गत संचालित आंगनबाडी सेविका-सहायिका बहाली में अब चयन समिति के अध्यक्ष या उपाध्यक्ष की मनमानी नहीं चलेगी. यदि चयन समिति के अध्यक्ष या उपाध्यक्ष पदासीन रहने के बावजूद आम सभा की पहली अथवा दूसरी तिथि की बैठक में उपस्थित नहीं होते हैं अथवा आम सभा का दो बार आयोजन होने […]
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समस्तीपुर : बाल विकास परियोजना अंतर्गत संचालित आंगनबाडी सेविका-सहायिका बहाली में अब चयन समिति के अध्यक्ष या उपाध्यक्ष की मनमानी नहीं चलेगी. यदि चयन समिति के अध्यक्ष या उपाध्यक्ष पदासीन रहने के बावजूद आम सभा की पहली अथवा दूसरी तिथि की बैठक में उपस्थित नहीं होते हैं अथवा आम सभा का दो बार आयोजन होने के बाद भी किसी कारण से चयन संभव नहीं हो पाता है तो ऐसी स्थिति में भी बहाली प्रक्रि या बाधित नहीं रहेगी.
इसके लिए जिला प्रोग्राम पदाधिकारी एक विशेष आम सभा की तिथि निर्धारित कर अनुमंडल पदाधिकारी या उनके द्वारा नामति पदाधिकारी की अध्यक्षता में आम सभा का आयोजन कर उक्त पद के लिए चयन प्रक्रिया को अंतिम रूप दे सकते हैं. चयन प्रक्रिया में यह बदलाव विभाग द्वारा जारी चयन प्रक्रिया नियमावली 2019 में किया गया है. अक्सर ग्रामीण एवं शहरी इलाकों में सेविका-सहायिका बहाली प्रक्रिया के लिए आयोजित आमसभा के दौरान वार्ड सदस्य व वार्ड आयुक्त अध्यक्ष हुआ करते हैं.
परंतु अध्यक्ष या उपाध्यक्ष द्वारा बहाली के लिए निर्धारित प्रक्रिया में दिलचस्पी नहीं लेने या फिर हो-हंगामा के चलते चयन की प्रक्रिया पूर्ण नहीं हो पाती है. जिससे उस पोषक क्षेत्र के लाभुक सरकार के इस महत्वपूर्ण योजना से वंचित हो जाते हैं. फिलहाल सरकार द्वारा नियमों में बदलाव किए जाने से अब शत-प्रतिशत सेविका-सहायिका की बहाली का रास्ता साफ हो गया है.
अब जनप्रतिनिधि और जविप्र के रिश्तेदार भी बन सकती हैं सेविका : इससे पूर्व सरकारी नौकरी करने वाले, जनप्रतिनिधि या फिर जनवितरण प्रणाली विक्रेता के रिश्तेदार सेविका-सहायिका पद की बहाली के लिए अयोग्य मानी जाती थी. परंतु चयन प्रक्रि या के लिए पारित नए नियमावली में अब इनके रिश्तेदार भी सेविका-सहायिका बहाली के लिए आवेदन कर सकते हैं और उनका चयन हो सकता है.
अब इस पद के लिए वैसी आवेदिका जिनकी 12000 या उससे ज्यादा मासिक आमदनी है या जो स्वयं जनप्रतिनिधि और जनवितरण प्रणाली विक्रेता है वही व्यक्ति सेविका-सहायिका चयन के लिए आयोग्य माने जाएंगे. या फिर किसीन्यायालय से दंडित होने की स्थिति में ही वह सेविका-सहायिका बनने से वंचित रह सकती है.
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