एआई माध्यम से टीबी रोग की शीघ्र पहचान एवं समय पर हो सकेगा उपचार : डीएम

Updated at : 24 Mar 2026 5:59 PM (IST)
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एआई माध्यम से टीबी रोग की शीघ्र पहचान एवं समय पर हो सकेगा उपचार : डीएम

एआई माध्यम से टीबी रोग की शीघ्र पहचान एवं समय पर हो सकेगा उपचार : डीएम

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विश्व यक्ष्मा दिवस पर डीएम ने हरी झंडी दिखाकर जागरूकता रैली का किया रवाना सहरसा. विश्व यक्ष्मा दिवस के मौके पर मंगलवार को जिलाधिकारी दीपेश कुमार व उप विकास आयुक्त गौरव कुमार ने संयुक्त रूप से समाहरणालय से हरी झंडी दिखाकर जागरूकता रैली रवाना किया. यह रैली समाहरणालय से प्रारंभ होकर रमेश झा महिला कॉलेज, जिला स्वास्थ्य समिति होते सदर अस्पताल में समाप्त हुई. रैली में जीएनएम, एएनएम एवं पारा मेडिकल के छात्र-छात्राओं ने टीबी की रोकथाम से संबंधित विभिन्न स्लोगनों के माध्यम से आमजन को जागरूक किया. इस मौके पर जिलाधिकारी ने टीबी मुक्त भारत अभियान के लिए हैंड होल्ड एक्सरे मशीन के गाड़ी को हरी झंडी, टीबी रोगियों के इलाज एवं जांच से संबंधित सुविधाओं की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि इस आधुनिक तकनीक से युक्त मशीन को आज से ही विभिन्न क्षेत्रों में भेजा जायेगा. जिससे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से टीबी रोग की शीघ्र पहचान एवं समय पर उपचार संभव हो सकेगा. साथ ही आज से जिले में एक सौ दिवसीय टीबी उन्मूलन अभियान की विधिवत रूप से शुरुआत की जायेगी. इस अभियान के सफल क्रियान्वयन के लिए जिले के प्रत्येक प्रखंड के लिए विस्तृत माइक्रोप्लान तैयार किया गया है. जिसके माध्यम से उच्च जोखिम समुदाय वाले क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाकर टीबी मरीजों की पहचान एवं उपचार सुनिश्चित किया जाएगा. उन्होंने कहा कि जिले में फस्ट लाइन ईलाजरत यक्ष्मा रोगियों की संख्या 5087 है. जबकि सकेंड लाइन इलाजरत यक्ष्मा रोगियों की संख्या 25 है. सिविल सर्जन ने बताया कि जिले के सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में टीबी रोगियों के लिए मुफ्त जांच व निशुल्क दवा उपलब्ध है. साथ ही एचएलएफपीपीटी के जिला सहयोगियों के माध्यम से उच्च जोखिम क्षेत्रों में सक्रिय खोज अभियान चलाकर टीबी नियंत्रण को और सशक्त बनाया जायेगा. जिला यक्ष्मा केंद्र के संचारी रोग पदाधिकारी ने कहा कि टीबी का समय पर इलाज शुरू करने एवं पौष्टिक आहार लेने से इस बीमारी पर पूर्ण नियंत्रण पाया जा सकता है. एक टीबी मरीज लगभग 15 अन्य लोगों को संक्रमित कर सकता है. इसलिए जागरूकता एवं समय पर उपचार अत्यंत आवश्यक है. उन्होंने यह भी विश्वास व्यक्त किया कि वर्ष 2030 तक टीबी पर पूर्ण रूप से नियंत्रण प्राप्त कर लिया जायेगा. कार्यक्रम में प्रभारी सिविल सर्जन डॉ हरि शेखर भारती, संचारी रोग पदाधिकारी डॉ एसके आजाद, जिला कार्यक्रम प्रबंधक विनय रंजन, जिला लेखा प्रबंधक सनोज कुमार, जिला यक्ष्मा कार्यालय से सभी कर्मी, डब्ल्यूएच से प्रवीण कुमार मिश्रा, एचएलएफपीपीटी से मो ईमरान, प्रिंस राज, अश्वनी सहित अन्य सभी कर्मी मौजूद थे.

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