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जेहन में घुलने लगी तिलकुट की मिठास

Updated at : 11 Jan 2025 5:11 PM (IST)
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जेहन में घुलने लगी तिलकुट की मिठास

जेहन में घुलने लगी तिलकुट की मिठास

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शहर के चौक-चौराहों पर सजा सेहत व स्वाद का तिलकुट बाजार ग्राहकों की मांग के अनुरूप तैयारी में दिन रात जुटे हैं तिलकुट कारीगर सहरसा . मकर संक्रांति का पर्व निकट होने से शहर में तिलकुट की मिठास व उसकी सोंधी खुशबू फैलने लगी है. पर्व को लेकर शहर के चौक-चौराहों पर सेहत व स्वाद का मौसमी बाजार आबाद हो गया है. आमदनी की बेहतर संभावनाओं को देखते बाहर से कारीगर आकर ताजा तिलकुट का निर्माण कर रहे हैं. इसके अलावे गया, पटना, भागलपुर सहित अन्य जगहों से भी तिलकुट बनाने वाले कारीगर व तैयार तिलकुट बाजार में छाये हैं. यहां चीनी व गुड़ के अलावा खोआ सहित कई तरह के तिलकुट बनाये व बेचे जा रहे हैं. शहर के मुख्य बाजार शंकर चौक-चौक से लेकर सभी चौक चौराहे पर तिलकुट के एक दर्जनों से अधिक दुकानों पर तिलकुट की बिक्री हो रही है. इसके कारखाना में निरंतर तिलकुट निर्माण कार्य जारी है. ग्राहकों की मांग को देखते हुए खोआ मिश्रित तिलकुट का निर्माण बड़े पैमाने पर चल रहा है. पूर्व में यहां बाहर से आते थे तिलकुट मकर संक्रांति पर तिलकुट की मांग को देखते यहां बाहर से तिलकुट मंगाया जाता था. खासकर गया व भागलपुर के तिलकुट की काफी मांग रहती थी. लेकिन बदलते दौर में गया व भागलपुर के तिलकुट कारीगरों ने सहरसा में भी अपनी पैठ बना ली है. आज यहां भी बेहतर तिलकुट की क्वालिटी के तिलकुट का निर्माण हो रहा है. अब यहां से लोग दूर-दराज के अपने संबंधियों के यहां भी तिलकुट उपहार के रूप में भेज रहे हैं. शंकर चौक पर पिछले कई से तिलकुट के कारोबार में जुटे रोहित गाड़ा बताते हैं कि ग्राहकों को सस्ता व अच्छे तिलकुट उपलब्ध करा रहे हैं. जिससे उनका प्रशांत तिलकुट भंडार अब ब्रांड बन गया है. पूरे जिले में उनका थौक कारोबार भी काफी चल रहा है. उनका हमेशा प्रयास रहता है कि पहले से महंगाई से परेशान ग्राहकों को तिलकुट का मूल्य अधिक नहीं चुकाना पड़े. निर्माण में दिन रात जुटे हैं कारीगर प्रशांत तिलकुट भंडार के प्रोपराइटर रोहित गाडा ने बताया कि पहले तिलकुट के लिए गया, भागलपुर से कारीगर बुलाये जाते थे. लेकिन अब सब यहां भी अच्छे कारीगर उपलब्ध हो जाते हैं. बढ़ती मांग को देखते तिलकुट बनाने वाले कारीगर दिन रात निर्माण कार्य में लगे हुए हैं. तिलकुट का कारोबार दिसंबर एवं जनवरी सहित दो महीने का ही होता है. इन दो महीनों में ही कारोबारी त्योहार की डिमांड पूरी करते हैं. कारोबारियों की मानें तो इस साल पिछले साल की तुलना में अच्छी बिक्री की उम्मीद है. मौसम भी साथ दे रहा है. कारोबारी बताते हैं कि सहरसा में तैयार किया गया तिलकुट प्रमंडल के विभिन्न जिलों के शहर एवं गांवों में जाने लगा है. इस लिहाज से दिसंबर के शुरुआत से ही निर्माण का काम शुरू कर दिया जाता है. आज के दौर में यहां के तिलकुट की क्वालिटी काफी बेहतर मानी जाने लगी है. यही वजह है कि यहां से लोग दूर-दराज के अपने संबंधियों के यहां भी तिलकुट उपहार के रूप में भेज रहे हैं. कारीगर की भी होती है अच्छी कमाई पहले सहरसा के बाजार गया एवं भागलपुर के तिलकुट पर निर्भर था. उस समय तिलकुट के के दाम भी अपेक्षाकृत अधिक होते थे. लेकिन पिछले कुछ वर्षों में सहरसा में भी तिलकुट का मौसमी उद्योग शुरू हो गया है. अब जिले के कारीगर भी अच्छी क्वालिटी का तिलकुट बनाने लगे हैं. कारीगरों ने बताया कि वे सब एक महीना पहले तिलकुट कारोबारी के यहां बुक हो जाते हैं. मकर संक्रांति का बाजार नरम पड़ते ही वापस चले जाते हैं. एक सीजन में 20 से 30 हजार रूपये की कमाई हो जाती है. कारीगरों ने बताया कि वे लोग तिलकुट बनाने वाली जगह पर ही डेरा डालते हैं. जिससे रहने खाने का अलग से खर्च नहीं लगता है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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