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बुद्धिजीवियों का दायित्व है कि अपने पूर्वजों के योगदान को सहेजकर उसका करें संवर्धनः दिलीप

Updated at : 07 Jul 2025 6:18 PM (IST)
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बुद्धिजीवियों का दायित्व है कि अपने पूर्वजों के योगदान को सहेजकर उसका करें संवर्धनः दिलीप

अपने पूर्वजों के योगदान को सहेजकर उसका करें संवर्धनः दिलीप

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पंडित मधुसूदन मिश्र के योगदान पर आलेख के साथ जानकारी की हो प्रस्तुति सहरसा . मैथिली से संबंधित कई रचनात्मक कार्य व मिथिला क्षेत्र की आवाज उठाने वाले समाजसेवी दिलीप कुमार चौधरी ने कहा कि दर्शन के क्षेत्र में मिथिला के दार्शनिकों का अवदान अविस्मरणीय है. विशेष रूप से न्याय व मीमांसा के क्षेत्र में विद्वानों की वैदुष्य पूर्ण अभिव्यक्ति का राष्ट्रीय जनमानस पर गहरा प्रभाव पड़ा है. इसी क्रम में न्याय दर्शन के मर्मज्ञ, मिथिला धरोहर न्याय विद्यांबर स्मृति शेष पंडित मधुसूदन मिश्र का अवदान अविस्मरणीय है. मिथिला के सहरसा के चैनपुर गांव निवासी स्मृति शेष पंडित मधुसूदन मिश्र ने अपने गांव चैनपुर व मिथिला के नाम को गौरवान्वित करने का काम किया. भारत के जाने-माने विमर्श स्थल नदिया बंगाल में वर्ष 1906 में स्वर्ण पदक हासिल करके किया. न्याय दर्शन के इस अभूतपूर्व अवदान को देखते उस समय के कूच बिहार के राजा ने उन्हें न्याय विद्यांबर की उपाधि के साथ स्वर्ण पदक से सम्मानित करते मिथिला के इस नैयायिक की मुक्त कंठ से प्रशंसा करते कहा कि ऐसा विद्वान मिथिला ही दे सकता है. जिसका सदियों से दर्शन पर आधिपत्य रहा है. चौधरी ने कहा कि इस स्वर्ण पदक देखने का मौका लगभग तीस साल पहले मिला था. उन्होंने मिथिला के लोगों से आह्वान किया कि हर बुद्धिजीवियों का यह दायित्व है कि अपने पूर्वजों के योगदान को सहेजकर उसका संवर्धन करें. जिससे मिथिला के उत्कर्ष व प्रसिद्धि को गति मिल सके. उन्होंने मिथिला एवं केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्राध्यापकों से भी आग्रह किया है कि पंडित मधुसूदन मिश्र जी के योगदान पर आलेख के साथ महत्वपूर्ण जानकारी प्रस्तुत करें. जो मिथिला की आने वाले पीढ़ी को प्रेरित कर सके. प्रो विनय कुमार चौधरी, केंद्रीय विश्वविद्यालय उड़ीसा के प्रो उदय नाथ झा, विद्वान भवनाथ झा एवं केंद्रीय विश्वविद्यालय की प्रो गौर प्रिया दास व कामेश्वर सिंह संस्कृत विश्वविद्यालय दरभंगा साथ ही भारत सरकार के पदाधिकारियों से भी इनके बारे में जानकारी व आलेख प्रस्तुति से संबंधित चर्चा की है. श्री चौधरी मिथिला एवं मैथिली से संबंधित कई रचनात्मक कार्य व आवाज उठाते रहे हैं. जिनमें मैथिली को सीटेट की परीक्षा में मैथिली भाषा को शामिल करने, रेलवे स्टेशन पर मंडन भारती का बोर्ड लगाना, चेतना समिति द्वारा भारती जयंती को मनाए जाने, प्रमंडलीय पुस्तकालय में राजकमल जयंती मनाए जाने के साथ प्रमंडलीय पुस्तकालय का नाम राज कमल प्रमंडलीय पुस्तकालय करने, आम चुनाव का प्रचार प्रसार मैथिली में करने, सरकारी स्तर पर डीडी मैथिली चैनल की मांग उठाते रहे हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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