कोसी का बढ़ता जलस्तर, नाव बनी हजारों लोगों की जिंदगी की डोर, आधे घंटे का सफर अब तीन घंटे में

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Saharsa Flood News: सहरसा के सलखुआ प्रखंड में कोसी नदी का जलस्तर बढ़ने से तटबंध के अंदर रहने वाले हजारों लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं. गांवों का संपर्क मुख्य सड़क से कट गया है और नाव ही जीवन रेखा बन गई है. मरीजों, स्कूली बच्चों, किसानों और मजदूरों को भारी परेशानी हो रही है.

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सलखुआ (सहरसा) से वशिष्ठ कुमार की रिपोर्ट

Saharsa Flood News: कोसी नदी का जलस्तर बढ़ते ही सहरसा के सलखुआ प्रखंड में तटबंध के अंदर रहने वाले हजारों लोगों की जिंदगी फिर मुश्किलों से घिर गई है. गांवों का संपर्क मुख्य सड़क से लगभग कट चुका है और नाव ही अब लोगों की एकमात्र जीवन रेखा बन गई है. हालात ऐसे हैं कि जो दूरी कभी आधे घंटे में तय हो जाती थी, अब उसी सफर में दो से तीन घंटे लग रहे हैं. सबसे ज्यादा परेशानी मरीजों, स्कूली बच्चों, किसानों और रोज कमाने-खाने वाले मजदूरों को हो रही है.

कोसी का जलस्तर बढ़ते ही बढ़ीं मुश्किलें

कोसी नदी में लगातार बढ़ रहे जलस्तर का असर तटबंध के अंदर बसे गांवों पर साफ दिखाई देने लगा है. सड़क संपर्क प्रभावित होने के कारण लोगों के लिए आवाजाही का एकमात्र साधन नाव बची है. हर दिन हजारों लोग जरूरी काम, इलाज, पढ़ाई और रोजगार के लिए नाव के सहारे नदी पार करने को मजबूर हैं.

ग्रामीणों का कहना है कि पहले जिस रास्ते को तय करने में महज आधा घंटा लगता था, अब वही सफर दो से तीन घंटे में पूरा हो रहा है. इससे लोगों की दैनिक दिनचर्या पूरी तरह प्रभावित हो गई है.

मरीजों और स्कूली बच्चों की बढ़ी परेशानी

बाढ़ जैसी स्थिति का सबसे अधिक असर मरीजों और बुजुर्गों पर पड़ रहा है. समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाने के कारण कई बार उनकी जान पर भी खतरा मंडराने लगता है.

वहीं स्कूल जाने वाले बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है. कई छात्र-छात्राओं को घंटों नाव का इंतजार करना पड़ता है, जिससे वे समय पर स्कूल नहीं पहुंच पाते.

किसान और मजदूर भी संकट में

तटबंध के भीतर रहने वाले किसानों को खेतों तक पहुंचने और पशुओं की देखभाल करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. वहीं दैनिक मजदूरी करने वाले लोगों की आमदनी पर भी इसका सीधा असर पड़ा है, क्योंकि समय पर कार्यस्थल तक पहुंचना मुश्किल हो गया है.

ग्रामीणों का कहना है कि नावों की संख्या कम होने के कारण लोगों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है, जिससे परेशानी और बढ़ जाती है.

तेज धारा के बीच जोखिम उठाकर चल रही नावें

स्थानीय नाविक तेज बहाव के बीच यात्रियों को सुरक्षित पार कराने का प्रयास कर रहे हैं. हालांकि बढ़ते जलस्तर और तेज धारा के कारण हर सफर जोखिम भरा बना हुआ है. हादसे की आशंका को देखते हुए लोग भी डर के साए में यात्रा करने को मजबूर हैं.

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Saharsa Flood News: हर साल दोहराती है यही समस्या

ग्रामीणों का कहना है कि कोसी का जलस्तर बढ़ते ही हर साल यही हालात बन जाते हैं, लेकिन अब तक इस समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला जा सका है.

लोगों ने प्रशासन से तत्काल अतिरिक्त नावों की व्यवस्था करने, सुरक्षित आवागमन के लिए निगरानी बढ़ाने और दीर्घकालिक समाधान के तहत तटबंध के अंदर सड़क या पुल जैसी स्थायी सुविधा विकसित करने की मांग की है.

ग्रामीणों का कहना है कि जब तक स्थायी संपर्क मार्ग नहीं बनेगा, तब तक हर मानसून में हजारों लोगों को इसी तरह कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ेगा. कोसी का बढ़ता जलस्तर केवल प्राकृतिक चुनौती नहीं, बल्कि प्रशासनिक तैयारियों की भी बड़ी परीक्षा बन गया है.

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Pratyush Prashant

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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