महिला अनशनकारी हुईं काफी कमजोर

Published at :06 Mar 2017 6:27 AM (IST)
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महिला अनशनकारी हुईं काफी कमजोर

कोसी नदी पर डेंगराही में पुल निर्माण के लिए अनशन 15वें दिन भी जारी सहरसा : सहरसा जिले के सलखुआ प्रखंड में कोसी नदी पर पुल निर्माण की मांग को लेकर डेंगराही घाट पर चल रहा अनशन 15वें दिन रविवार को भी जारी रहा. अनशनकारियों में दस पुरुष व 30 से अधिक महिलाएं शामिल हैं. […]

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कोसी नदी पर डेंगराही में पुल निर्माण के लिए अनशन 15वें दिन भी जारी

सहरसा : सहरसा जिले के सलखुआ प्रखंड में कोसी नदी पर पुल निर्माण की मांग को लेकर डेंगराही घाट पर चल रहा अनशन 15वें दिन रविवार को भी जारी रहा. अनशनकारियों में दस पुरुष व 30 से अधिक महिलाएं शामिल हैं. इतने दिनों में सबों की स्थिति खराब हो गयी है. सबसे पहले भूख हड़ताल शुरू करनेवाले बाबू लाल शौर्य की हालत बेहद नाजुक है. वह पीलिया रोग (जौंडिस) से ग्रसित हो चुके हैं. डॉक्टर ने जिला प्रशासन को दो दिन पूर्व ही त्राहिमाम संदेश भेज दिया है कि शौर्य का लीवर प्रभावित होने लगा है. वहीं अनशनकारी महिलाओं के संबंध में भी डॉक्टर ने कहा है कि इनके शरीर की इम्युनिटी भी समाप्त हो रही है.

लेवल मेंटेन के लिए लगातार ग्लूकोज चढ़ाया जा रहा है. यही स्थिति रही तो महिलाओं के शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता काफी कम हो जायेगी. इससे महिलाएं अन्य बीमारी से भी ग्रसित हो सकती हैं. फिर स्थिति संभालना मुश्किल हो जायेगा. हालांकि इसके बाद भी सरकार या संवेदनशील होती नहीं दिख रही है.
डेढ़ लाख लोगों को होगा फायदा : अनशन के समर्थन में पूरा फरकिया संगठित दिख रहा है. अनशन स्थल पर रोज बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंच रहे हैं. मांग व अनशन के समर्थन में डेंगराही से बाहर सिमरी बख्तियारपुर, सलखुआ, सहरसा व खगड़िया में भी बंदी, कैंडल मार्च, काला बिल्ला व सड़क जाम किये जा रहे हैं. यहां पक्ष-विपक्ष की विभिन्न पार्टियों के नेताओं का पहुंचना भी लगातार जारी है. इस इलाके के लोग बताते हैं कि सिमरी बख्तियारपुर व सलखुआ प्रखंड के दर्जनों पंचायत एवं सैकड़ों गांव कोसी के गर्भ में हैं. डेढ़ लाख से अधिक की आबादी हर साल कोसी की विनाशलीला को झेलती है. तटबंध निर्माण के 60 वर्षों बाद भी किसी सरकार ने इनकी सुधि नहीं ली. जबकि, एक अदद पुल के लिए दशकों से आंदोलन होता रहा है. पुल के अभाव में उनके गांवों में न तो अच्छा बाजार बस सका है. न शिक्षा, न स्वास्थ्य, न बिजली और न ही शुद्ध पेयजल की ही व्यवस्था की जा सकी है. सड़क का तो नामोनिशान नहीं है. छोटे से बड़े किसी भी काम के लिए उन्हें नाव से नदी पार करना होता है. कई बार नाव दुर्घटनाग्रस्त होती है और लोगों की जान भी चली जाती है. यदि सरकार पुल की स्वीकृति दे देती है, तो दशकों से कोसी में कैद लोगों को नया जीवन मिल जायेगा. खगड़िया व पटना से सहरसा की दूरी भी काफी कम हो जायेगी.
बीमारी से हो
सकती हैं ग्रसित
अनशनकारियों में दस पुरुष व 30 से अधिक महिलाएं हैं शामिल
सबसे पहले भूख हड़ताल शुरू करनेवाले बाबू लाल शौर्य की
हालत बेहद नाजुक

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