दर्जनों गांवों में नाव ही सहारा उपेक्षा. मुठभेड़ की राजनीति में गुम हो गयीं विकास की बातें

Published at :21 Nov 2016 6:11 AM (IST)
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दर्जनों गांवों में नाव ही सहारा उपेक्षा. मुठभेड़ की राजनीति में गुम हो गयीं विकास की बातें

गुरुवार-शुक्रवार मध्य रात्रि को चिड़ैया ओपी अंतर्गत बेलहा गांव में एसटीएफ और रामानंद गिरोह के बीच हुए मुठभेड़ के बाद चर्चा में आया दियारा फरकिया के लोगों को आज भी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में जिंदगी गुजारनी पड़ रही है. 21वीं सदी में भी कोसी दियारा-फरकिया के इलाकों में यातायात की समस्या गंभीर है. सिमरी […]

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गुरुवार-शुक्रवार मध्य रात्रि को चिड़ैया ओपी अंतर्गत बेलहा गांव में एसटीएफ और रामानंद गिरोह के बीच हुए मुठभेड़ के बाद चर्चा में आया दियारा फरकिया के लोगों को आज भी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में जिंदगी गुजारनी पड़ रही है. 21वीं सदी में भी कोसी दियारा-फरकिया के इलाकों में यातायात की समस्या गंभीर है.

सिमरी बख्तियारपुर : सहरसा जिले का पिछड़ा व बाढ़ प्रभावित माने जाने वाला सलखुआ एवं सिमरी बख्तियारपुर प्रखंड के पूर्वी कोसी तटबंध के भीतर बसे एक घनी आबादी दियारा-फरकिया के इलाकों से अभी भी लोगों को बाजार व प्रखंड मुख्यालय तक पहुंचने के लिए नावों का ही सहारा लेना पड़ता है. यह स्थिति सिमरी बख्तियापुर अनुमंडल के सिमरी बख्तियारपुर एवं सलखुआ प्रखंड के पूर्वी कोसी तटबंध के भीतर बसे दर्जनों गांवों की है.
सलखुआ प्रखंड के चार पंचायत कबीरा, चानन, अलानी एवं साम्हरखुर्द एवं सिमरीबख्तियारपुर प्रखंड के चार पंचायत धनुपरा, कठडूम्मर, घोघसम एवं बेलवाड़ा पंचायत के दर्जनों गांव के लाखों की आबादी सरकार के विकास की पोल खोल रहा है.
इन क्षेत्रों के लोगों के लिए नाव ही नदी पार करने का एक मात्र साधन है. लोग पुल सहित पक्की सड़कों की मांग वर्षों से करते आ रहे हैं. कोसी दियारा-फरकिया वासियों की मांगे आज तक पूरी नहीं हो सकी है. नदी पार करने की परेशानी से लोग अपने बच्चे को बेहतर शिक्षा नहीं दिला पाते हैं. तटबंध के भीतर दुरूह आवागमन व नदी के खौप से ग्रामवासी चाहकर भी प्रतिदिन प्रखंड मुख्यालय आने से कतराते है. इस स्थिति में फरकिया इलाके में स्वास्थ्य, शिक्षा, शुद्ध पेयजल, बिजली, पक्की सड़क एवं कोसी नदी में पुल की परिकल्पना बेमानी साबित हो रही है. इतना ही नहीं तटबंध के भीतर बसे दोनों प्रखंड के दर्जन से अधिक गांव ऐसे हैं जहां जाने के लिए नाव ही एक मात्र सहारा है.
क्या कहते हैं ग्रामीण
लक्ष्मण महतो, हैनिमैन, डेविड, एडिशन, राजेश महतो, अर्जुन यादव, पवन यादव, मिथिलेश पासवान, राजदेव महतो, शिक्षक नरेश पासवान, प्रमोद सिंह, विमल मेहता, रामविलाश भगत, मनोज भगत, लक्ष्मी यादव, कामाथान निवासी सुलतान, सहुरिया निवासी सागर कुमार, रामप्रवेश महतो आदि कहते हैं कि कोसी दियारा-फरकियावासी हमेशा से ही उपेक्षित रहा है. दियारा-फरकिया में सड़क व कोसी नदी में पुल का अभाव है. रात के समय अगर कोई गंभीर रूप से बीमार पड़ जाये तो उसका भगवान ही मालिक होता है. इन गांवों में भवन निर्माण में प्रयुक्त सामग्री में भी अधिक खर्च वहन करना पड़ता है. ग्रामीणों को गृह निर्माण कराने के लिए सामग्री लाने में भाड़ा भी अधिक लगाना पड़ता है. बिजली तो सपना बनी है. सड़क के अभाव में पगडंडी एवं नदी में पुल नहीं बनने से लोग जान जोखिम में डाल नाव की सवारी करने को मजबूर हैं और शुद्ध पेयजल के बदले लोहयुक्त जहर पीना पड़ता है.
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