व्रतियों ने पवित्रता से सुखाया गेहूं
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :05 Nov 2016 2:15 AM (IST)
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नहाय खाय संपन्न. मिट्टी के चूल्हे पर आम की लकड़ी से बनेगा खरना का प्रसाद शुक्रवार को व्रतियों ने पवित्र स्नान कर कद्दू-भात का प्रसाद ग्रहण किया. गेहूं सुखा लिया गया है. आज खरना की तैयारी में व्रती व उनके परिजन लगे हैं. शाम में खरना पूजा की जायेगी. सहरसा : आस्था व नियम-निष्ठा का […]
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नहाय खाय संपन्न. मिट्टी के चूल्हे पर आम की लकड़ी से बनेगा खरना का प्रसाद
शुक्रवार को व्रतियों ने पवित्र स्नान कर कद्दू-भात का प्रसाद ग्रहण किया. गेहूं सुखा लिया गया है. आज खरना की तैयारी में व्रती व उनके परिजन लगे हैं. शाम में खरना पूजा की जायेगी.
सहरसा : आस्था व नियम-निष्ठा का चार दिवसीय महापर्व छठ शुक्रवार को नहाय-खाय के साथ शुरू हुआ. घरों की साफ-सफाई के बाद व्रती ने स्नान-ध्यान किया. फिर साफ एवं धुले जगह पर पर्व के निमित्त रखे गेहूं को धोकर सुखाया गया. इस दौरान व्रती चिड़ियां सहित अन्य बाधकों से गेहूं की सतत निगरानी करती रहीं. गेहूं के सूख जाने के बाद उसे समेट कर रखने के बाद ही उन्होंने अनाज का निवाला ग्रहण किया. नहाय-खाय के पहले दिन उनके भोजन में अरवा चावल का भात, चने की दाल व कद्दू की सब्जी शामिल रही.
खरना की तैयारी जोरों पर
नहाय-खाय का विधि-विधान संपन्न होने के साथ ही व्रती परिवार शनिवार के खरना की तैयारी में जुट गया. खरना का प्रसाद खीर मिट्टी के चूल्हे पर आम के जलावन से बनेगा. लिहाजा शहरी क्षेत्र के लोगों ने मिट्टी का बना-बनाया चूल्हा खरीदा. चौक-चोराहों पर बिक रहे इस चूल्हे की कीमत एक सौ रुपये तक रही. हालांकि कई घरों में व्रती ने मिट्टी का चूल्हा खुद ही तैयार कर लिया है. जलावन के लिए आम की सूखी लकड़ी खरीदी गयी. सामान्य दिनों के अलावा सड़क के किनारे कई जलावन की दुकानें खुली थीं. महापर्व पर यह आठ रुपये प्रति किलो की दर से बिकती रही.
खरना के प्रसाद का है विशेष महत्व
खरना के दिन व्रती दिन भर उपवास में रह कर खीर, सोहारी (घी से सेंकी रोटी) बनाती हैं. इसके अलावा प्रसाद में केला भी शामिल होता है. देर शाम इन प्रसादों को छठि मइया को चढ़ाने के बाद व्रत का समापन होता है. पहला प्रसाद व्रती के ग्रहण करने के बाद घर के अन्य लोग खाते हैं. इस प्रसाद के ग्रहण करने के बाद ही व्रती का 36 घंटे का उपवास शुरू हो जाता है. इसके बाद उदीयकालीन सूर्य को अर्ध्य देने के बाद ही पारण कर वह अपने व्रत को समाप्त करती है. कहते हैं कि खरना के इस महाप्रसाद का काफी महत्व है. यह छठी मईया को न्योता देने के निमित्त की गयी पूजा व चढ़ाया गया प्रसाद होता है.
छठि के व्रत करब बेच के नथुनियां….
गेहूं सुखाती व्रती व उनके परिजन.
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