किसी के लिए मध्यमा विशारद का डिग्री मान्य, तो किसी के लिए नहीं

Published at :09 Jun 2016 3:54 AM (IST)
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किसी के लिए मध्यमा विशारद का डिग्री मान्य, तो किसी के लिए नहीं

निदेशक ने इस डिग्री पर नियोजित हुए शिक्षकों की मांगी थी सूची डीपीओ स्थापना ने जोड़ दी सेवा समाप्त करने की पंक्ति हाईकोर्ट गयी एक शिक्षिका को पद पर बने रहने का दिया आदेश, अन्य को नहीं सहरसा शहर : हिंदी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग इलाहाबाद से प्राप्त उपाधि मध्यमा विशारद की योग्यता पर नियुक्त नियोजित […]

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निदेशक ने इस डिग्री पर नियोजित हुए शिक्षकों की मांगी थी सूची

डीपीओ स्थापना ने जोड़ दी सेवा समाप्त करने की पंक्ति
हाईकोर्ट गयी एक शिक्षिका को पद पर बने रहने का दिया आदेश, अन्य को नहीं
सहरसा शहर : हिंदी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग इलाहाबाद से प्राप्त उपाधि मध्यमा विशारद की योग्यता पर नियुक्त नियोजित शिक्षकों के साथ दोहरी नीति अपनायी जा रही है. सरकार ने सभी जिलों से इस डिग्री पर नौकरी कर रहे शिक्षकों की सूची मंगाई थी. जबकि डीपीओ स्थापना ने इनकी सेवा ही समाप्त कर दी. इनमें से हाईकोर्ट गए शिक्षकों को पुन: सेवा पर बने रहने का आदेश दे दिया गया. शेष अन्य शिक्षकों की सेवा तीन वर्षों बाद आज भी नहीं लौटायी गयी. जबकि इनमें से अधिकतर ने भी हाईकोर्ट में सीडब्ल्यूजेसी दायर किया है.
डिग्रीधारी की सेवा कर दी समाप्त
गिरिजा कुमारी एवं अन्य बनाम राज्य सरकार व इंद्रावति कुमारी एवं अन्य बनाम राज्य सरकार के दायर वाद में हाईकोर्ट द्वारा दिए गए न्यायादेश के आलोक में शिक्षा विभाग के निदेशक अजय कुमार चौधरी ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारी को पत्र भेज हिंदी साहित्य सम्मेलन से प्राप्त मध्यमा विशारद की उपाधि पर नियोजित व कार्यरत शिक्षकों की सूची मांगी थी. साल 2013 में भेजे गए इस पत्र में निदेशक ने कहा था कि उक्त एलपीए के न्यायादेश के बावजूद ऐसे शिक्षकों से संबंधित प्रतिवेदन अप्राप्त है.
उन्होंने विशेष दूत से रिपोर्ट भेजने की बात कहते नहीं देने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की बात कही थी. इधर डायरेक्टर के इस पत्र को आधार बनाकर डीपीओ स्थापना ने सभी बीडीओ व सभी बीइओ को पत्र भेज ऐसे डिग्री पर नौकरी करने वाले सभी शिक्षकों की सेवा समाप्त करते सूची उपलब्ध कराने का निर्देश दिया.
डीपीओ ने शिक्षा निदेशक के इसी पत्रांक व इसमें वर्णित एलपीए का जिक्र करते अपने पत्र में लिखा है कि विभागीय आदेश के अनुरूप प्राथमिक व मध्य विद्यालयों में मध्यमा विशारद की डिग्री पर नियोजित हुए शिक्षकों की सेवा समाप्त करने का निर्देश दिया.
सेवा में बनी रही सुशीला
डीपीओ के इस आदेश को चुनौती देती मध्यमा विशारद की इस डिग्री पर सत्तरकटैया प्रखंड के सेवाश्रम पटोरी स्थित कन्या मध्य विद्यालय की प्रखंड शिक्षिका सुशीला महतो ने जनशिकायत कोषांग का रूख किया. जहां से प्रभारी पदाधिकारी ने प्रखंड विकास पदाधिकारी को श्रीमती महतो को न्यायालय द्वारा फलाफल होने तक पद पर बने रहने का आदेश दिया गया.
बीडीओ ने जनशिकायत कोषांग के आदेश का अनुपालन करते उक्त शिक्षिका को आदेश पत्र जारी करते कहा कि आपके द्वारा प्राप्त आवेदन पत्र में शिक्षक से बर्खास्त एवं पुन: पद पर बने रहने संबंधी वाद न्यायालय में दायर करने का उल्लेख किया है. मामला न्यायालय में रहने के कारण न्यायालय द्वारा पारित फलाफल होने के पश्चात ही इस पर निर्णय लिया जाएगा.
अन्य बरखास्त शिक्षक भी गये कोर्ट
इधर सुशीला महतो के मामले का उदाहरण देते सोनवर्षा प्रखंड के प्राथमिक विद्यालय मोतीबाड़ी के बर्खास्त प्रखंड शिक्षक मदन राम, कन्या प्राथमिक विद्यालय, देहद के पंचायत शिक्षक देव कुमार झा, प्राथमिक विद्यालय, गोआरी के पंचायत शिक्षक राणा कुमार झा व सुबोध कुमार झा ने भी डीपीओ को आवेदन देते पुनर्योगदान करने का आदेश देने की मांग की है. बर्खास्त शिक्षकों ने भी हाइकोर्ट में सीडब्ल्यूजेसी दायर करने की बात बताते न्यायालय का फलाफल आने के बाद निर्णय को सहर्ष स्वीकार करने की बात कही है.
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