शहर में कचड़े का अंबार, चुप रहती है नगर सरकार

सहरसा : नगरदेश के अन्य शहरों को स्मार्ट सिटी बनाने की कवायद शुरू हो गयी है, इधर सहरसा के मुख्य मार्गों व मोहल्ले को स्वच्छ रखने के बजाय गंदगी के हवाले कर दिया गया है. शहर में डंपिंग यार्ड का निर्माण नहीं होने से रोजाना हजारों टन कूड़ा एक जगह से दूसरी जगह पर फेंक […]
सहरसा : नगरदेश के अन्य शहरों को स्मार्ट सिटी बनाने की कवायद शुरू हो गयी है, इधर सहरसा के मुख्य मार्गों व मोहल्ले को स्वच्छ रखने के बजाय गंदगी के हवाले कर दिया गया है. शहर में डंपिंग यार्ड का निर्माण नहीं होने से रोजाना हजारों टन कूड़ा एक जगह से दूसरी जगह पर फेंक दिया जाता है.
हद तो यह है कि बच्चों के स्कूल व अस्पातल के समीप तक इसे डंप किया जा रहा है. जिससे स्थानीय सहित बाहर से आने वाले लोगों को दूर्गंध का सामना करना पड़ता है. शहर में प्रवेश करने वाला मुख्य मार्ग हो या समाहरणालय व बाइपास की सड़क, राहगीरों को परेशान करती है. बदबू व गंदगी की वजह से मच्छर परेशान कर रहे हैं.
कूड़े-कचरे की वजह से पर्यावरण भी दूषित हो रहा है. ब्लीचिंग का नहीं करते छिड़कावनगर परिषद की उदासीनता का आलम यह है कि कूड़ा उठाव के बाद उन जगहों पर ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव भी नहीं किया जाता है. इस वजह से उठाव के घंटों बाद तक उस जगह पर बदबू आती रहती है.
जबकि नप के सफाई से जुड़े कर्मी बताते हैं कि मोहल्ले से लेकर मुख्य सड़क तक नियमित रुप से सफाई की जाती है. नाला में पनपता है मच्छर नगर परिषद द्वारा मुख्य मार्गों के नाले की सफाई तो करायी जाती है. लेकिन वार्ड में निर्मित नालों की सफाई वर्षों तक नहीं की जाती है. नाला में पानी जमा होने की वजह से मच्छर पनपने लगता है.
शहर के बटराहा, कृष्णा नगर व मारुफगंज के नालों की सफाई कई वर्षो से नहीं की गयी है. ज्ञात हो कि डेंगू के आतंक से लोग पहले ही सहमे हुए हैं. नहीं हो रही फॉगिंगपर्व-त्योहार के समय नप द्वारा फॉगिंग करने की प्रथा अब भी जारी है. जबकि नियमित फॉगिंग होने से लोगों को राहत मिलेगी.
ज्ञात हो कि शहर में फॉगिंग नहीं होने से लोगों को शाम होते ही मच्छरों से दो चार होना पड़ता है. स्थानीय वार्ड पार्षदों ने भी नियमित फॉगिंग मशीन चलाने की बात कही है. पर्यावरण के लिए खतरा समाहरणालय जाने वाली मुख्य सड़क को नप द्वारा अघोषित डंपिंग यार्ड की तरह प्रयुक्त किया जा रहा है.
ज्ञात हो कि नप द्वारा रोजाना कूड़ा अनलोड करने से सड़क किनारे लगे पेड़ सुखने लगे हैं. इसके अलावा टनों में उपलब्ध प्लास्टिक वातावरण को दूषित कर रही है.
नहीं हो रही नियमित सफाईशहर में सफाई करने के लिए नप में कार्यरत मजदूरों की उपस्थिति पंजी को देखें तो रोजाना दो सौ से अधिक मजदूर सफाई कार्य कर रहे हैं. लेकिन जमीनी हकीकत काफी अलग है. मंगलवार को शहर के हटिया गाछी, तिवारी टोला, बायपास व रिफ्यूजी चौक पर कूड़े का अंबार लगा रहा.
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