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पीड़ितों की सेवा को मुजफ्फरपुर गये सोमू व रौशन

Updated at : 20 Jun 2019 7:16 AM (IST)
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पीड़ितों की सेवा को मुजफ्फरपुर गये सोमू व रौशन

सहरसा : मुजफ्फरपुर में इंसेफ्लाइटिस (चमकी बुखार) से मरने वाले बच्चों की संख्या 109 तक पहुंच गयी है. इतनी अधिक संख्या में बच्चों के मरने के बाद राज्य से लेकर केंद्र सरकार तक हिल गयी है. फेसबुक, व्हाट्सएप और ट्विटर पर देशभर के लोग अपनी बात कह रहे हैं. सब सरकार व प्रशासन को दोष […]

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सहरसा : मुजफ्फरपुर में इंसेफ्लाइटिस (चमकी बुखार) से मरने वाले बच्चों की संख्या 109 तक पहुंच गयी है. इतनी अधिक संख्या में बच्चों के मरने के बाद राज्य से लेकर केंद्र सरकार तक हिल गयी है. फेसबुक, व्हाट्सएप और ट्विटर पर देशभर के लोग अपनी बात कह रहे हैं.

सब सरकार व प्रशासन को दोष देने में जुटे हुए हैं, लेकिन प्राथमिक जरूरत के अनुरूप अभी पीड़ितों की सेवा व अन्य गरीबों में जागरूकता फैलाने के नाम पर सबके हाथ रुक जा रहे हैं. ऐसे में स्थिति को भयावह होता देख सहरसा के दो युवक मुजफ्फरपुर पहुंच पीड़ितों की सेवा में लगे हुए हैं. बीमारी बाहुल्य बस्तियों में लोगों को जागरूक कर रहे हैं.
टीवी वाले नहीं, डॉक्टरों की है जरूरत: रौशन ने बताया कि वे लोगों को जागरूक करने के अलावे श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज हॉस्पीटल जाकर भी पीड़ितों की सेवा कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि यहां जितने डॉक्टर हैं, समर्पित होकर मरीजों का इलाज कर रहे हैं. बीमारों की तुलना में डॉक्टर व संसाधन बढ़ाने की जरूरत है.
जागरूक करने के नाम पर सरकार व प्रशासन ने भरपूर लापरवाही बरती है. बड़ी संख्या में आशा के होने का कोई फायदा नहीं दिख रहा है. लोगों को बीमारी से बचने की सलाह देने की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि मुजफ्फरपुर में बच्चों की मौत तमाशा बनकर रह गयी है. कुछ टीवी पत्रकार आइसीयू के सारे नियम कानून की धज्जियां उड़ा रहे हैं. इससे स्वास्थ्य व्यवस्था प्रभावित हो रही है.
लोगों को बुखार मापना सिखा रहे
सहरसा से मुजफ्फरपुर जाने वाले सोमू आनंद और रौशन झा हैं. चमकी बीमारी से मरने वाले बच्चों की संख्या लगातार बढ़ने के साथ ही दोनों युवक सोमवार को मुजफ्फरपुर निकल गये.
दोनों अपने साथ लोगों के सहयोग से मिले 500 पैकेट ग्लूकोज, 500 पैकेट ओआरएस और 50 थर्मामीटर ले गये हैं. ये वहां पनघाड़ा, मीनापुर, शिवायपट्टी, टेंगराहा, हरिदासपुर, छत्तरपट्टी गांव में घूम कर गरीबों की बस्ती में लोगों को एकत्रित कर उन्हें बच्चों को चमकी बीमारी से बचने के लिए जागरूक कर रहे हैं. सोमू ने बताया कि वे वहां चार-पांच घरों पर एक थर्मामीटर देकर लोगों को बुखार मापने का तरीका बता रहे हैं.
बुखार बढ़ने पर पानी की पट्टी देने और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करने की सलाह दे रहे हैं. जरूरतमंदों को ग्लूकोज और ओआरएस दे रहे हैं. सोमू व रौशन ने बताया कि इसके अलावे लोगों को बीमारी से बचने के सभी आवश्यक टिप्स दे रहे हैं. जैसे बच्चों को खाली पेट नहीं सोना है. रात के भोजन के बाद थोड़ा मीठा जरूर दें. खाली पेट लीची नहीं खाना है. साफ-सफाई का विशेष रूप से ध्यान रखने को जागरूक कर रहे हैं.
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