बाजार से कराते हैं अल्ट्रासाउंड
Updated at : 25 Dec 2017 6:00 AM (IST)
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बंद रहता है सदर अस्पताल का सेंटर आइजीइएमएस ने प्रसव वार्ड के बगल में ढाई माह पूर्व खोला था सेंटर सहरसा : सदर अस्पताल में अक्तूबर में आइजीइएमएस ने प्रसव वार्ड के बगल में अल्ट्रासाउंड सेंटर खोला था, लेकिन अब सेंटर लोगों को सुविधा देने की बजाय बंद ही रहता है. इससे मरीजों को अल्ट्रासाउंड […]
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बंद रहता है सदर अस्पताल का सेंटर
आइजीइएमएस ने प्रसव वार्ड के बगल में ढाई माह पूर्व खोला था सेंटर
सहरसा : सदर अस्पताल में अक्तूबर में आइजीइएमएस ने प्रसव वार्ड के बगल में अल्ट्रासाउंड सेंटर खोला था, लेकिन अब सेंटर लोगों को सुविधा देने की बजाय बंद ही रहता है. इससे मरीजों को अल्ट्रासाउंड के लिए बाजार पर ही निर्भर रहना पड़ता है. मालूम हो कि पांच अक्तूबर को सिविल सर्जन डॉ अशोक कुमार सिंह ने उद्घाटन कर मरीजों की सुविधा के लिए इसे समर्पित किया था. इसका उद्देश्य था कि अस्पताल के मरीजों को अल्ट्रासाउंड कराने के लिए बाहर नहीं जाना पड़े. सेंटर में 24 घंटे आपातकालीन कक्ष, वार्ड में भर्ती मरीज व बाह्य विभाग के मरीजों को नि:शुल्क अल्ट्रासाउंड करना था, लेकिन प्रशासनिक अधिकारी के उदासीन रवैये के कारण उद्घाटन के कुछ माह बाद ही यह अपने उद्देश्य से भटक गया है.
लापरवाही की भेंट चढ़ रही हैं सुविधाएं : सरकार के निर्देश व सिविल सर्जन की सजगता के कारण आये दिन सदर अस्पताल में मरीजों की कई सुविधा में बढ़ोतरी की गयी है, लेकिन दुर्भाग्यवश स्थानीय पदाधिकारियों व जिम्मेदार व्यक्ति की लापरवाही व सही तरीके से मॉनीटरिंग नहीं किये जाने के कारण मरीजों को दी जाने वाली सुविधा पाने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है. सूत्रों के अनुसार यह सेंटर कर्मियों के मन मुताबिक खुलता है और बंद होता है. यह किसी एक दिन का दृश्य नहीं है, बल्कि अक्सर यह नजारा देखने को मिलता है.
बाजार पर है निर्भरता : अस्पताल में अल्ट्रासाउंड सेंटर खुलने के बाद भी मरीजों को बाजार पर निर्भर होना पड़ रहा है, जबकि सिविल सर्जन के अनुसार 24 घंटे सुविधा नि:शुल्क देना था. जानकारी के अनुसार जब किसी मरीज को अल्ट्रासाउंड करवाने की सलाह दी जाती है तो सेंटर के पास जाने पर उसमें ताला ही लटका नजर आता है. इसके कारण लोगों को मजबूरी में बाजार की ओर रुख करना पड़ता है. जहां आर्थिक दंड के साथ-साथ मरीज को अस्पताल से बाजार ले जाने व लाने में मानसिक प्रताड़ना से भी गुजरना पड़ता है. मरीज व उसके परिजनों ने वरीय अधिकारियों से लापरवाह संचालन के लिए संबंधित पर कार्रवाई करने की मांग की है.
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