2014 में शुरू हुआ और 15 आते-आते बंद हो गया सरकारी पानी

Updated at : 19 Dec 2017 7:56 AM (IST)
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2014 में शुरू हुआ और 15 आते-आते बंद हो गया सरकारी पानी

जम्हरा पंचायत के लोगों को नहीं मिल रहा स्वच्छ व शुद्ध पेयजल सूखे व पीले पड़े हैं लगाए गए सभी 23 वाटर पोस्ट ग्रामीणों को 35 रुपये प्रति गैलन की दर से खरीद पीना पड़ रहा है पानी राजेश सिंह पतरघट : लोहया स्वच्छ बिहार अभियान के तहत ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल पहुंचाने की योजना […]

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जम्हरा पंचायत के लोगों को नहीं मिल रहा स्वच्छ व शुद्ध पेयजल
सूखे व पीले पड़े हैं लगाए गए सभी 23 वाटर पोस्ट
ग्रामीणों को 35 रुपये प्रति गैलन की दर से खरीद पीना पड़ रहा है पानी
राजेश सिंह
पतरघट : लोहया स्वच्छ बिहार अभियान के तहत ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल पहुंचाने की योजना लगभग समाप्त सी हो गई. इसके लिए जिम्मेवार कार्य एजेंसी जिला जल एवं स्वच्छता समिति भी कोई दिलचस्पी नहीं ले रहा है. लिहाजा लोगों को एक बार फिर आयरनयुक्त पानी पीना पड़ रहा है.वे एक बार फिर विभिन्न बीमारियों से ग्रसित होते जा रहे हैं.
2015 तक लोगों ने पीया साफ पानी: जिला जल एवं स्वच्छता समिति द्वारा जम्हरा पंचायत में साल 2014 में आयरन रिमूवल प्लांट (आइआरपी) का जल संयत्र लगवाया था. सोलर प्लेट से चलने वाले इस संयत्र के पानी टंकी की क्षमता 5000 लीटर है. लगभग 1500 मीटर के दायरे में 23 वाटर पोस्ट अथवा सार्वजनिक नल लगवाये थे. जहां से लोगों को स्वच्छ व शुद्ध पेयजल मिलता था. आसपास के लोग इस वाटर पोस्ट से पीने के लिए पानी का स्टॉक कर लेते थे. लगभग एक वर्ष तक लोगों ने शुद्ध पेयजल का उपयोग किया गया.
इस दौरान उनके स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव दिखा. लेकिन साल भर के बाद ही संयत्र खराब होने लगा. लगाए गए पोस्टों तक पानी का पहुंचना बंद होने लगा. यदि कुछ पोस्ट में आ भी रहे थे तो पानी पूरा पीला, बदबूदार व गंदा होता था. उस पानी को पीना तो दूर, उससे हाथ-पैर धोने में भी ऊबकाई आती थी. लोगों ने उसका उपयोग पूर्णत: बंद कर दिया.
विभाग नहीं लेता दिलचस्पी: ग्रामीण संजीव कुमार सिंह, रंजन कुमार सिंह, राधारमण सिंह, रमेश कुमार सिंह, रविशेखर सिंह, सतीश कुमार चिक्कू, बिनोद कुमार सिंह, अरूण कुमार सिंह, दीपक कुमार सिंह, संजय कुमार सिंह, मुरलीधर सिंह सहित दर्जनों अन्य ग्रामीणों ने बताया कि गांव में शुद्ध पेयजल संयत्र के लगने से लोगों को बड़ी सुविधा मिली थी.
खराब होने के बाद पिछले दो वर्षों से लोगों को शुद्ध व साफ पानी नहीं मिल रहा है. सक्षम लोगों को 35 रुपये गैलन की दर से रोज खरीद कर पानी पीना पड़ रहा है. जबकि कमजोर लोगों को वही पीला व गंदा पानी पीना पड़ रहा है.
ग्रामीणों ने बताया कि संयत्र के खराब होने व लगाए गए पोस्टों तक पानी नहीं पहुंचने की सूचना कई बार पीएचइडी के कार्यपालक अभियंता को दी गई. लेकिन कोई भी इसे दुरुस्त कराने में दिलचस्पी नहीं ले रहे. इधर संक्रमित पानी पीने से गांव में बीमारों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है.
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