आज का दर्शन: विराटपुर की मां चंडिका के दरबार में क्यों उमड़ती है भक्तों की भीड़? जानिए इस प्राचीन सिद्धपीठ की अनोखी महिमा

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मां चंडिका स्थान: कोसी की आस्था का शक्ति धाम

कोसी क्षेत्र का प्रतिष्ठित मां चंडिका स्थान, विराटपुर, आस्था और तांत्रिक साधना का जीवंत केंद्र है. यह सिद्धपीठ अपनी प्राचीन धार्मिक परंपराओं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करने की अद्भूत शक्ति के लिए प्रसिद्ध है. हर साल लाखों श्रद्धालु यहां मां का आशीर्वाद लेने आते हैं.

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सहरसा से विनय कुमार मिश्र की रिपोर्ट

Aaj Ka Darshan: कोसी क्षेत्र में अगर शक्ति उपासना की बात होती है तो सबसे पहले जिन मंदिरों का नाम लिया जाता है, उनमें विराटपुर स्थित मां चंडिका स्थान प्रमुख है. यह सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि आस्था, तांत्रिक साधना और सदियों पुरानी धार्मिक परंपराओं का जीवंत केंद्र माना जाता है. हर दिन यहां सैकड़ों श्रद्धालु माथा टेकने पहुंचते हैं, जबकि नवरात्र और अमावस्या जैसे विशेष अवसरों पर यह पूरा परिसर भक्तों से भर जाता है.

मान्यता है कि मां चंडिका के दरबार में जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से अपनी प्रार्थना लेकर आता है, उसकी मनोकामना अवश्य पूरी होती है. यही विश्वास हर साल बिहार ही नहीं, बल्कि आसपास के कई राज्यों से भी श्रद्धालुओं को इस सिद्धपीठ तक खींच लाता है.

कोसी की आस्था का सबसे बड़ा शक्ति धाम क्यों माना जाता है यह मंदिर?

सहरसा जिले के सोनवर्षा प्रखंड के विराटपुर में स्थित मां चंडिका स्थान लंबे समय से शक्ति साधना का प्रमुख केंद्र रहा है. स्थानीय लोगों के अनुसार यह एक प्राचीन सिद्धपीठ है, जहां वर्षों से विशेष विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ मां चंडिका की पूजा की जाती है.

मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही भक्तों को आध्यात्मिक शांति का अनुभव होता है. सुबह और शाम होने वाली आरती के दौरान घंटों की गूंज, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार पूरे वातावरण को भक्तिमय बना देते हैं. श्रद्धालु यहां दीप जलाकर परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना करते हैं.

नवरात्र और अमावस्या पर बदल जाता है पूरा नजारा

सालभर मंदिर में श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन नवरात्र, अमावस्या और दुर्गा पूजा के दौरान यहां का दृश्य पूरी तरह बदल जाता है. सुबह से देर रात तक पूजा-पाठ, भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों का सिलसिला चलता रहता है.

विशेष अवसरों पर मां चंडिका का भव्य श्रृंगार किया जाता है. वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विशेष पूजा संपन्न होती है और शाम की महाआरती में हजारों श्रद्धालु शामिल होकर मां का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं. मन्नत पूरी होने पर भक्त विशेष पूजा और प्रसाद अर्पित करते हैं, जो यहां की वर्षों पुरानी परंपरा का हिस्सा है.

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Aaj Ka Darshan: श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए भी बदली है तस्वीर

बीते कुछ वर्षों में मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की सुविधा और साफ-सफाई को लेकर कई सुधार किए गए हैं. परिसर को अधिक व्यवस्थित बनाया गया है ताकि दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को किसी तरह की असुविधा न हो.

शाम के समय मंदिर की आकर्षक रोशनी पूरे परिसर को और भी दिव्य बना देती है. घंटियों और शंखध्वनि के बीच होने वाली आरती श्रद्धालुओं के लिए विशेष आध्यात्मिक अनुभव बन जाती है. यही कारण है कि यहां आने वाले लोग सिर्फ दर्शन ही नहीं, बल्कि मानसिक शांति का अनुभव लेकर भी लौटते हैं.

धार्मिक आस्था के साथ पर्यटन का भी बन रहा प्रमुख केंद्र

विराटपुर का मां चंडिका स्थान अब केवल पूजा-अर्चना का केंद्र नहीं रह गया है, बल्कि स्थानीय धार्मिक पर्यटन का भी महत्वपूर्ण स्थल बन चुका है. कोसी क्षेत्र के अलावा बिहार के विभिन्न जिलों से आने वाले श्रद्धालु यहां की प्राचीन परंपरा, आध्यात्मिक वातावरण और शक्ति साधना की संस्कृति को करीब से देखने पहुंचते हैं.

स्थानीय लोगों का विश्वास है कि मां चंडिका के दरबार से कोई भी भक्त खाली हाथ नहीं लौटता. इसी अटूट आस्था ने इस प्राचीन सिद्धपीठ को आज भी लाखों श्रद्धालुओं की श्रद्धा का केंद्र बना रखा है.

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Pratyush Prashant

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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