कनीय अभियंता भुगतान के लिए बने सहायक अभियंता
Author Prabhat khabar digital desk
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सासाराम कार्यालय : नगर पर्षद में योजनाओं के क्रियान्वयन में अनियमितता का पुराना इतिहास रहा है. अभी करोड़ों के लाइट, लैंप पोस्ट आदि का मामला ठंडा भी नहीं पड़ा है कि हाल के दिनों में हुए विभागीय कार्यों में अनियमितता की परत खुलने लगी है. हाल यह है कि योजनाओं के कार्यों के भुगतान के […]
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सासाराम कार्यालय : नगर पर्षद में योजनाओं के क्रियान्वयन में अनियमितता का पुराना इतिहास रहा है. अभी करोड़ों के लाइट, लैंप पोस्ट आदि का मामला ठंडा भी नहीं पड़ा है कि हाल के दिनों में हुए विभागीय कार्यों में अनियमितता की परत खुलने लगी है. हाल यह है कि योजनाओं के कार्यों के भुगतान के लिए विभाग के कनीय अभियंता सहायक अभियंता बन बिलों पर हस्ताक्षर कर डाले. इसके अलावा कार्य स्थल पर बोर्ड लगा नहीं और बिल के साथ योजनाओं के फोटो पर कंप्यूटर से बोर्ड बना भुगतान करा लिया गया. भाइ लोगों का तुर्रा यह कि शहर की योजनाओं में ऐसा प्राय: कार्य स्थल पर हुआ है. अगर ऐसा हुआ है, तो अधिकारी क्या कर रहे हैं?
भुगतान के लिए पद में हेरफेर : तीनों योजनाओं के बिलों पर बजाप्ता सहायक अभियंता के रूप में हस्ताक्षर करने वाले हरदीप सिंह वस्तुत: विभाग के कनीय अभियंता हैं. इसकी पुष्टि नप इओ द्वारा 17 फरवरी, 2017 को जारी पत्र से होता है, जिसमें उन्होंने लिखा है कि नगर पर्षद की सामान्य बैठक 12 जनवरी, 2017 के विषय संख्या- 05 अन्यान्य में लिये गये निणर्य के आलोक में हरदीप सिंह कनीय अभियंता को प्रतिमाह 20 हजार रुपये पारिश्रमिक भुगतान करने का आदेश दिया जाता है.
सवाल उठता है कि जब वे कनीय अभियंता हैं, तो किस परिस्थिति में सहायक अभियंता बन बिल पर हस्ताक्षर किया. जिसके बाद इओ ने भुगतान का आदेश दिया. इस संबंध में हरदीप सिंह ने कहा कि नगर विकास विभाग उन्हें सहायक अभियंता के पद के लिए यहां भेजा था. लेकिन, कुछ कारणों से मैं कनीय अभियंता ही रहा. इसकी पुष्टि इओ ने भी की. उन्होंने कहा कि वे सहायक अभियंता बन कर यहां आये थे.
बोर्ड की एक बैठक में उनके सहायक अभियंता होने का निर्णय है. फिर उन्हें कनीय अभियंता क्यों बनाया गया? के सवाल पर इओ ने कहा कि पत्र निर्गत करने में लिपिकीय भूल भी हो सकती है. तो लोगों ने सवाल उठाया, इतने दिनों में उसमें सुधार क्यों नहीं हुआ? दाल में कुछ काला है. इधर सशक्त स्थायी समिति के सदस्य अतेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर पहले ही आवाज उठायी गयी थी. लेकिन, हमारी बातों पर किसी ने ध्यान नहीं दिया. यह सब सोची समझी रणनीति के तहत कार्य किया गया है. इसकी उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए. इसकी शिकायत डीएम से की जायेगी.
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