छह घंटे ही जिंदा रह सके शरीर से जुड़वां बच्चे

Published at :15 Jan 2017 4:48 AM (IST)
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छह घंटे ही जिंदा रह सके शरीर से जुड़वां बच्चे

हाथ-पैर छोड़ कर आपस में जुड़े थे सभी अंग पेट में दर्द के कारण समय से ढाई माह पहले कराना पड़ा प्रसव बिक्रमगंज : शहर के करुणा अस्पताल में जुड़वा बच्चे का जन्म हुआ. इनका गरदन, पेट, छाती, सिर व मुंह आपस में जुड़ा है. केवल हाथ व पैर ही अलग है. इनका जन्म शुक्रवार […]

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हाथ-पैर छोड़ कर आपस में जुड़े थे सभी अंग

पेट में दर्द के कारण समय से ढाई माह पहले कराना पड़ा प्रसव
बिक्रमगंज : शहर के करुणा अस्पताल में जुड़वा बच्चे का जन्म हुआ. इनका गरदन, पेट, छाती, सिर व मुंह आपस में जुड़ा है. केवल हाथ व पैर ही अलग है. इनका जन्म शुक्रवार की रात 12:45 बजे हुआ. हालांकि, सुबह सात बजे इनकी मौत हो गयी़ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ सोनम सिंह ने बताया कि सही समय से करीब ढाई माह पहले हुए इस प्रजनन की वजह से बच्चे कुछ ही घंटों में मर गये. हालांकि, इनको बचाने की बहुत कोशिश हुई पर कामयाबी नहीं मिली. जुड़वा बच्चे को जन्म देनेवाली महिला नासरीगंज थाने के चितौखर निवासी सफीक अंसारी की पत्नी जरीना खातून है.
परिजनों ने बताया कि महिला के पेट में अधिक दर्द व पेट का आकार बड़ा होने के बाद डेहरी के एक अस्पताल में ले जाया गया. वहां अल्ट्रासाउंड में बच्चे का विभत्स रूप नजर आने पर चिकित्सक ने वाराणसी रेफर कर दिया. इसके बाद एक रिश्तेदार की पहल पर करुणा अस्पताल, बिक्रमगंज में भरती कराया गया. वहां भरती होने के 12 दिन बाद ही अधिक दर्द की वजह से बच्चे का जन्म कराना पड़ा. अस्पताल के निदेशक डॉ कामेंद्र सिंह ने बताया कि जब एक अंडे व शुक्राणु आपस में मिलते है, तो उसी से भ्रूण बनता है, जो जीव का निर्माण करती है. ऐसे केस की स्थिति तब आती है, जब मोनो जायगोटिव ट्यून (मानव भ्रूण) के एक या एक से अधिक टुकड़े हो जाते है, तब जुड़वा बच्चे पैदा होते हैं. पर, यहीं टुकड़े बराबर भाग में नहीं बटंते तब आपस में जुड़ा हुए बच्चे पैदा होते हैं. जिसमे जच्चा को बचाना भी काफी जटिल होता है. फिलहाल प्रसूति महिला जरीना स्वस्थ है.
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