सीएम आये तो, सदर अस्पताल भी हो गया चकाचक
Author Prabhat khabar digital desk
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मरीज का इंतजार करते नजर आये डॉक्टर सासाराम नगर : शहर में मुख्यमंत्री के आगमन पर सदर अस्पताल का लुक ही बदला दिखा़ डॉक्टर, नर्स, आउटडोर, मरीज वार्ड सब कुछ साफ-सुथरा व ड्रेस कोड में दिख रहा था. सुबह के आठ बजे आउटडोर में डॉक्टर व कर्मचारी ड्रेस में अपने-अपने वार्ड में नजर आ रहे […]
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मरीज का इंतजार करते नजर आये डॉक्टर
सासाराम नगर : शहर में मुख्यमंत्री के आगमन पर सदर अस्पताल का लुक ही बदला दिखा़ डॉक्टर, नर्स, आउटडोर, मरीज वार्ड सब कुछ साफ-सुथरा व ड्रेस कोड में दिख रहा था. सुबह के आठ बजे आउटडोर में डॉक्टर व कर्मचारी ड्रेस में अपने-अपने वार्ड में नजर आ रहे थे. हमेशा गंदा रहने वाला वार्ड आज चकाचक दिख रहा था. जो डॉक्टर नौ बजे के बाद अपने चेंबर में पहुंचते थे.
वे आज मरीजों के आने का इंतजार कर रहे थे. साढ़े आठ बजे तक मरीजों का आना शुरू हुआ. झटपट कर्मचारी मरीजों से पुर्जा कटाने का सलाह दे रहे थे. आइए बाबा इधर आईए डॉक्टर साहब बैठे हैं. दिखा लीजिए. मरीज अवाक क्या बात है यहां तो हमेशा डांट व दुत्कार मिलते थे. इनमें इतनी सेवा भावना कहां से आ गयी. जो डॉक्टर 10 बजे पहुंचते थे और 12 बजे ही चले जाते थे. आज पहले आ गये हैं. दरिगांव निवासी सुंदर बिंद 70 वर्ष ने कहा बाबू दो वर्षों से सदर अस्पताल का चक्कर काट रहा हूं. आज की स्थिति को देखने के बाद पता चलता है कि सरकार हम गरीबों को बेहतर व्यवस्था दी है. ये लोग जानबूझ कर मरीजों को परेशान करते है. अब समझ में आ रहा है नीतीश बाबू आये है न डर से इन की हालत खराब है. घुटने में दर्द रहता है चल नहीं पाता हूं. कभी इनलोगों ने ढंग से सलाह भी नहीं दिये है. ये इलाज क्या करेंगे.
महिला वार्ड भी दिख रहा था चकाचक
सदर अस्पताल का महिला वार्ड नाम आते ही लोग नाक-भौं सिकोड़ लेते थे. गुरुवर की सुबह इसका लुक भी बदल गया था. पूरे वार्ड की ढंग से सफाई की गयी थी. जहां, डस्टबीन में कचरा भरा पड़ा रहता था. वहीं, डस्टबीन साफ नजर आ रहा था. गंदगी का नामो निशान नहीं था. वार्ड में नर्स ड्रेस कोड में मुस्तैद दिख रही थी. महिला मरीजों को दवा इंजेक्शन दिया जा रहा था. बिना पैसा लिए इस वार्ड की नर्स किसी को इंजेक्शन नहीं देने की परपंरा बना रखी थी. वहीं, नर्स मरीजों के बेड पर जा कर उन से पूछ-पूछ कर दवा व इंजेक्शन दे रही थी. विगत माह इसी वार्ड में नर्स व डॉक्टर की लापरवाही से एक प्रसूता की मौत हो गयी थी. बहुत हंगामा हुआ था.
पहले बेड पर रहता था कुत्तों का बसेरा
जनरल वार्ड के बेड पर अभी तीन-चार दिन पहले तक आवारा कुत्ते आराम फरमाते थे और आज उसी बेड पर पीला चादर बिछा दिखा. 16 बेडों वाली इस वार्ड में कभी कभार एक दो मरीज नजर आ जाते थे. लेकिन, गुरुवार को सभी बेड मरीजों से भरे पड़े थे. समय पर सभी मरीजों को खना परोसा जा रहा था. सभी दंग थे. छोटे कर्मियों में खुसर-फुसर चल रही थी.
पहले फंड की कमी थी. इस लिए पूरी व्यवस्था नहीं हो सकने का बड़े लोग रोना रोते थे. आज अचानक फंड की बरसात हो गयी. इन लोगों के कारण हमलोगों को मरीजों का कोपभाजन बनना पड़ता था. सरकार के मुखिया के आगमन पर सब की हवा गुम हो गयी है. अगर ऐसा ही व्यवस्था हमेशा मिलता तो लोग क्यों निजी अस्पताल जाते. मजबूरी में लोग गर्दन कटवाने जाते है. यही डॉक्टर दोनो जगह बैठते हैं फिर सरकारी अस्पताल में इलाज का स्तर इतना गिरा हुआ क्यों हैं.
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